उदयपुर : ‘तंबू में तंगहाल 13 जिंदगियां…’ प्रकाशित खबर का असर हुआ है. मामला संज्ञान में आने के बाद भंवरलाल के दृष्टिबाधित बच्चों का इलाज शुरू हुआ है. दरअसल, उदयपुर झाड़ोल इलाके की लीलावास गांव के रहने वाले भंवरलाल के 11 बच्चों में से पांच बच्चे जन्म से दृष्टिबाधित थे. परिवार तंबू के नीचे रहकर अपना भरण पोषण कर रहा है. इलाज तो दूर की बात पेट भरने के लिए ही परिवार रोज मशक्कत कर रहा है. खबर सामने आने के बाद सामाजिक संगठनों के लोग आगे आए और इन पांच दृष्टिबाधित बच्चों को लीलावास गांव से एंबुलेंस की सहायता से उदयपुर के महाराणा भूपाल अस्पताल लाया गया. अब डॉक्टर इन बच्चों का इलाज कर रहे हैं.
डॉक्टर ने बताया कि इस बीमारी से ग्रसित बच्चे न तो देख पाते हैं और न ही रंगों में भेद कर पाते हैं. जब इन बच्चों की नजर करवाई गई तो काफी कम पाई गई. इन बच्चों के सर्टिफिकेट भी बनवाए जा रहे हैं, जिससे इनको राज्य और केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता भी मिल सके. इन बच्चों के चश्में भी बनवाई जा रहे हैं.मासूम बच्चों ने कहा अब वह खेल पाएंगे, स्कूल जा पाएंगे.
भंवरलाल अपने पांचों बच्चों को एमबी अस्पताल लेकर आए हैं. पांचों बच्चों में प्राथमिक तौर पर यह तकलीफ पाई गई है कि दिन में इन बच्चों की आंखें बंद हो जाती हैं, जबकि रात में हल्का-फुल्का नजर आता है. प्राथमिक तौर पर जांच करने से इन बच्चों में एक लक्षण पाया गया है. एक बीमारी होती है जिसे कहते हैं ‘कन्जेनिटल कोन डिस्ट्रोफी’.
प्रदेश में बाल अधिकारों के संरक्षण गठित विशेषज्ञों का समूह राजस्थान चाइल्ड एडवाइजरी ग्रुप (आर-केग) इस गांव पहुंचा था. इन बच्चों को चश्मा दिलाने के साथ ही दृष्टिबाधित सर्टिफिकेट मिलेगा. इन बच्चों को पेंशन मिल सके, इसको लेकर भी काम किया जा रहा है.
अब दोस्तों के साथ खेल पाएंगे : भंवरलाल के सबसे छोटे बेटे पुष्कर ने कहा कि अब वो स्कूल जा पाएंगे. अपने दोस्तों के साथ खेल पाएंगे. बहुत खुशी हो रही है. उपचार होने के बाद हम देख पाएंगे. वहीं, पिता भंवरलाल ने कहा कि अब मेरे पांच बच्चों का उपचार हो रहा है. बहुत खुशी हो रही है. मेरी शादीशुदा दृष्टिबाधित बेटियां भी अब अपना काम कर पाएंगी.
ये था पूरा मामला : इस दौरान परिवार ने बताया कि 13 सदस्य तंबू में अपना जीवन यापन कर रहे हैं. कचरा बीनकर और खाना मांगकर पेट भरते हैं. भंवरलाल ने बताया कि उनकी 11 संतान हैं, जिनमें से 5 बेटे और 6 बेटियां हैं. बड़ी बेटी 22 साल की है, जो दृष्टिहीन है. उसका नाम पूजा है. इसके अलावा पायल, काजल, खुशी और एक बेटे को नहीं दिखता है. 11 में से पांच शादीशुदा हैं. उनकी सबसे बड़ी बेटी की उम्र 25 साल है.
परिवार की हालत ऐसी थी कि वो बच्चों का उपचार नहीं करवा सके. इस कारण उन्हें शिक्षा भी नहीं मिल पाई. ईटीवी भारत ने इस खबर को प्रमुखता से दिखाया, जिसके बाद सामाजिक संगठनों के लोग गांव पहुंचे. मामला संज्ञान में आने के बाद शासन-प्रशासन भी हरकत में आया. अब मासूम बच्चों का उदयपुर के एमबी अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ उपचार कर रहे हैं. साथ ही इनका आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज बनवाए जा रहे हैं ताकि इस परिवार को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके.




















