उदयपुर: झाड़ोल इलाके के लीलावास गांव का नाम तब चर्चा में आया, जब यहां की रेखा कालबेलिया ने 55 की उम्र में 17वीं संतान को जन्म दिया. चौंकाने वाली बात यह है कि इस गांव के अधिकांश परिवारों में पांच से ज्यादा बच्चे हैं. अशिक्षा और गरीबी के हालातों के चलते यहां स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण की स्थिति बदतर है. इसे लेकर ईटीवी भारत ने गांव के हालातों की रिपोर्ट प्रमुखता से प्रकाशित की. इसके बाद मामले पर कैबिनेट मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने गांव में आंगनबाड़ी खोलने की घोषणा की है. साथ ही हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है. वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता और अधिकारी गांव पहुंचे और हालातों को बदलने का बीड़ा उठाया.
राशन सामग्री की वितरित: 17वीं संतान को जन्म देने वाली रेखा कालबेलिया और लीलावास गांव की खबर चर्चा में आने के बाद राजस्थान चाइल्ड एडवाइजरी ग्रुप (आर-केग) के सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे. वंचित परिवारों को राशन सामग्री वितरित करने के साथ ही उनके स्वास्थ्य की जांच की गई. आर-केग के अध्यक्ष एवं समाज सेवी चन्द्रगुप्त सिंह चौहान ने ग्रामीणों को परिवार नियोजन के फायदे बताए. उन्होंने बताया कि गांव में करीब 35 से 40 परिवारों में 130 से ज्यादा बच्चे हैं. हालांकि इनमें से नाम मात्र बच्चे स्कूल जाते हैं. यहां स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण की स्थिति बदतर है. इन्हें शिक्षा से जोड़ने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों से बातचीत की गई है.
रेखा को मिलेगा मकान का पट्टा: इस अवसर पर बाल अधिकार विशेषज्ञ एवं राजस्थान बाल आयोग के पूर्व सदस्य डॉ शैलेन्द्र पण्ड्या ने 40 परिवारों से अधिक की बस्ती में 130 से ज्यादा छोटे बच्चों के आंगबाड़ी या विद्यालय नहीं जाने को लेकर चिंता जताई. उन्होंने स्थानीय प्रशासन से इन्हें जल्द नामांकित करने एवं बस्ती में मां-बाड़ी केंद्र या आंगबाड़ी केंद्र खोलने की आवश्यकता बताई. डॉ पण्ड्या ने ग्रामीणों से अधिक बच्चों को लेकर समझाइश की. उन्होंने कहा कि 17 बच्चों को जन्म देने वाली रेखा कालबेलिया के परिवार को पट्टा दिलाने का काम किया जाएगा. इसके साथ के बच्चों के स्वास्थ्य जांच होगी.
कैबिनेट मंत्री ने की गांव के लिए घोषणा: आर-केग अध्यक्ष चौहान द्वारा मौके से जनजाति विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी से टेलीफोन पर चर्चा करते हुए इस गंभीर विषय से अवगत करवाया गया. जिस पर मंत्री खराड़ी ने तुरंत विभाग से मां-बाड़ी खुलवाने की घोषणा करते हुए जल्द हरसंभव सहायता का विश्वास दिलाया गया. जल्द ही इस इलाके में आंगनबाड़ी केंद्र खोला जाएगा. साथ ही मंत्री द्वारा आर-केग द्वारा दूरदराज वनवासी क्षेत्र में किए जा रहे प्रयास की सरहाना की.
दिलाई परिवार नियोजन की शपथ: जब इस गांव में सामाजिक कार्यकर्ताओं की टीम पहुंची, तो उन्होंने देखा कि 30 से 35 परिवारों में हर परिवार में करीब 5 से ज्यादा बच्चे हैं. ना सिर्फ रेखा बाई के 17 बच्चे हैं, पड़ोस में रहने वाले भंवरलाल के 11 बच्चे हैं. डॉ शैलेन्द्र पण्ड्या ने बताया कि ऐसे में ग्रामीणों को परिवार नियोजन को लेकर शपथ दिलाई गई. उन्होंने बताया कि इसके अलावा गांव में सर्वे करवाया जाएगा. जिसमें बच्चों में कुपोषण की स्थिति को देखा जाएगा. साथ ही बच्चों को लगने वाले टीकों के बारे में भी जानकारी मांगी गई है.
आंगनबाड़ी से बदलेंगे हालात: ग्रामीण विनोद ने कहा कि गांव में आंगनबाड़ी खुलने से बच्चों का भविष्य सुनहरा बनेगा. आंगनबाड़ी खुलने से न केवल बच्चे शिक्षित होंगे बल्कि उनको पौष्टिक आहार मिलने से उचित पोषण भी मिल पाएगा. इस अवसर पर आर-केग के पदाधिकारी एवं समाजसेवी प्रदीप रावानी, अशोक मालवीय, सखाराम मेघवाल, सामाजिक कार्यकर्ता अमित राव, काउंसलर रणवीर सिंह राणावत, संजय मेहता, बंसीलाल वडेरा झाड़ोल सरपंच, धरमचंद खरवड़ और लीलावास सरपंच सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे.




















