जयपुर: राजस्थान में सड़क सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर चल रहा ‘सुरक्षित सड़क मार्ग अभियान’ (सुसमा अभियान) इंडिया एवं एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में शामिल हुआ है. यह देश का सबसे बड़ा युवा-नेतृत्व वाला अभियान बनकर सामने आया है. इस अभियान के तहत 19 जिलों के करीब ढाई लाख विद्यार्थियों को प्रशिक्षित कर उन्हें सड़क सुरक्षा एंबेसडर बनाया गया है. ये छात्र अब सड़क सुरक्षा का संदेश समाज तक पहुंचाने के साथ-साथ सड़कों की गुणवत्ता, यातायात नियमों और सुरक्षा मानकों की निगरानी भी करेंगे.
जयपुर के महारानी कॉलेज में बुधवार को आयोजित समारोह में इंडिया एवं एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने जयपुर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को इसका प्रमाण पत्र दिया गया. विभाग को ‘सबसे बड़ा युवा-नेतृत्वित सड़क सुरक्षा अभियान एवं सुरक्षित सड़क कॉरिडोर विकास’ श्रेणी में रिकॉर्ड दर्ज करने की घोषणा की. यह उपलब्धि राजस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान दिलाएगी. इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रही.
सड़कें सुरक्षित बनाना साझा जिम्मेदारी: कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने कहा कि राज्य सरकार सड़क निर्माण की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है. हर नई सड़क के मानक और गुणवत्ता की सख्त जांच होगी. आमजन के लिए एक टोल-फ्री नंबर की सुविधा दी जाएगी, जिस पर सड़क निर्माण या गुणवत्ता में कमी की शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी. शिकायत मिलने पर पीडब्ल्यूडी की गुणवत्ता नियंत्रण (क्वालिटी कंट्रोल) टीम मौके पर जाकर जांच करेगी और दोष पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने छात्रों से कहा कि सड़क सुरक्षा केवल सरकार या प्रशासन का काम नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी है. जब युवा अपनी सोच और जीवनशैली में सड़क सुरक्षा को शामिल करेंगे, तो भविष्य में गड्ढों, दुर्घटनाओं और अव्यवस्था जैसी समस्याएं काफी हद तक खत्म हो जाएंगी.
अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश: दीया कुमारी ने पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को सप्ताह में दो दिन फील्ड विजिट कर सड़कों की नियमित जांच करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी इन निरीक्षणों में शामिल होंगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और मानकों का पूरी तरह से पालन हो रहा है.
अभियान की प्रमुख उपलब्धियां:
- 19 जिलों में मॉडल स्ट्रेच (मार्गों) का विकास
- लगभग 2.51 लाख विद्यार्थियों को प्रशिक्षण
- 6 हजार से अधिक हेलमेटों का वितरण
- यातायात नियमों पर व्यापक जागरूकता अभियान
- सड़क ढांचे को सुरक्षित बनाने की ठोस पहल




















