अलवर: देश के पहले बाघ पुनर्वास का गवाह बना सरिस्का बाघों से फलने-फूलने के बाद अब प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व जल्द ही मध्यप्रदेश व उत्तराखंड के बाघों से खुशहाल होंगे. इस साल सर्द मौसम में इन दोनों प्रदेशों के टाइगर रिजर्व से मुकुंदरा हिल्स व रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में 7 बाघ-बाघिनों को लाया जाएगा. इंटर स्टेट कॉरिडोर के तहत बाघ-बाघिनों की शिफ्टिंग की एनटीसीए की ओर से मंजूरी मिल चुकी है. अब प्रदेश के टाइगर रिजर्व को बाघ पुनर्वास के लिए रणथंभौर पर ही निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. वन विभाग की ओर से टाइगर शिफ्टिंग की तैयारी शुरू कर दी गई है, जिसके तहत दोनों टाइगर रिजर्व में प्रे-बेस बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं.
वन मंत्री संजय शर्मा ने बताया कि प्रदेश के टाइगर रिजर्व में बाघों के जीन में बदलाव के लिए बाहरी प्रदेशों के टाइगर रिजर्व से टाइगर लाकर छोड़ने की लंबे समय से मांग थी. अब एनटीसीए (National Tiger Conservation Authority) ने मध्यप्रदेश व उत्तराखंड से मुकुंदरा हिल्स व रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में इसी साल सर्दियों के मौसम में बाघ व बाघिन लाने की मंजूरी दी है. उन्होंने बताया कि इन दोनों टाइगर रिजर्व में प्रे-बेस को बढ़ाया जा रहा है. हाल ही में पुष्कर, दिल्ली व भरतपुर से सांभर-चीतल को लाया जा रहा है. 150 चीतलों को टाइगर रिजर्व क्षेत्र में छोड़ा जाएगा. वन मंत्री शर्मा ने कहा कि बाहरी राज्यों के टाइगर रिजर्व से बाघ-बाघिनों का आना प्रदेश के लिए अच्छा है.
राजस्थान में पहली बार आएंगे बाहरी राज्यों से बाघ : वन्यजीव प्रेमी लोकेश खंडेलवाल ने बताया कि प्रदेश में 1973 में बाघ परियोजना शुरू होने के बाद यह पहला मौका होगा, जब दूसरे राज्यों के टाइगर रिजर्व से राजस्थान में बाघ-बाघिनों की शिफ्टिंग होगी. अभी तक बाघों की ज्यादातर शिफ्टिंग रणथंभौर से हुई है और सरिस्का के एक बाघ की कुछ समय पहले रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में शिफ्टिंग कराई गई थी, लेकिन सरिस्का के बाघ को यह शिफ्टिंग रास नहीं आई और कुछ ही समय बाद उसकी वहां मौत हो गई. हालांकि, जीन पूल में सुधार के लिए सरकार ने बाघों के इंटरस्टेट कॉरिडोर की योजना बनाई थी.
खुशहाल होंगे टाइगर रिजर्व : मध्यप्रदेश व उत्तराखंड से टाइगरों की शिफ्टिंग की योजना को एनटीसीए की मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश के टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ेगी. अभी मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में एक शावक व दो मादा सब एडल्ट बाघिनों समेत पांच बाघ हैं. वहीं, रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में अभी बाघों की संख्या 7 है. मध्यप्रदेश व उत्तराखंड से करीब 7 बाघ व बाघिनों को लाए जाने की संभावना है, जिसके चलते इन दोनों टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़कर करीब 20 तक पहुंचने की उम्मीद है.
सरिस्का में हुआ था देश का पहला बाघ पुनर्वास : वन्यजीव प्रेमी लोकेश खंडेलवाल के अनुसार 2005 में सरिस्का को बाघ विहिन घोषित किए जाने के बाद वर्ष 2008 में सरिस्का में रणथंभौर से बाघ का पुनर्वास कराया गया. यह देश का पहला बाघ पुनर्वास था. अभी तक प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व में रणथंभौर से लाए गए बाघ-बाघिन या उनकी संतानें हैं. इनमें से कई मेल-फीमेल्स में ब्लड रिलेशन हैं. इससे कई जेनेटिक प्रॉबलम्स हो सकती हैं. संक्रमण का खतरा रहता है, लेकिन अब दूसरे राज्य से बाघ-बाघिन आने से यहां संक्रमण का खतरा कम और बाघों की नस्ल में सुधार हो सकेगा. वहीं, प्रदेश के टाइगर रिजर्व में बाघ-बाघिनों की संख्या के अनुपात में सुधार हो सकेगा.




















