जयपुर: सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के अधीन सुपर स्पेशलिटी अस्पताल ने रोबोटिक सर्जरी के क्षेत्र में इतिहास रचा है. प्रदेश का यह अस्पताल अब रोबोटिक सर्जरी के क्षेत्र में उत्तर भारत का पहला सरकारी अस्पताल बन चुका है जिसने रिकॉर्ड संख्या में जटिल रोबोटिक सर्जरी को अंजाम दिया है. अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक और कुशल चिकित्सकों की टीम ने कई ऐसी जटिल सर्जरी को अंजाम दिया है जो पहले बेहद जोखिमपूर्ण मानी जाती थीं. एसएमएस मेडिकल कॉलेज के यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ शिवम प्रियदर्शी का कहना है कि अब तक 225 से अधिक रोबोटिक सर्जरी यहां की जा चुकी है. इनमें यूरोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, गैस्ट्रो सर्जरी जैसी जटिल सर्जरी शामिल है. खास बात यह है कि आमतौर पर रोबोटिक सर्जरी निजी अस्पतालों में काफी महंगी होती है, लेकिन सरकारी क्षेत्र में राजस्थान के निवासियों के लिए यह निशुल्क है.
बचाए मरीजों के अंग: डॉ शिवम का कहना है कि पारंपरिक ऑपरेशन में कई बार किसी अंग को निकालना मजबूरी बन जाता था, लेकिन रोबोट अंगों को नुकसान पहुंचाए बिना आसानी से इस सर्जरी को अंजाम देता है. करीब तीन साल पहले यह रोबोट अस्पताल में लाए गए थे जिसके बाद सर्जरी का इतिहास बदल दिया है. उन्होंने बताया कि किडनी ट्यूमर के मामलों में, जहां पहले पूरी किडनी निकालनी पड़ती थी, रोबोटिक सर्जरी से सिर्फ ट्यूमर को हटाकर मरीज की स्वस्थ किडनी को बचाया जाता है. इसके अलावा जटिल सर्जरी में अंग संरक्षित रखते हुए उपचार किया जाता है. कैंसर के मामलों में भी ट्यूमर हटाने के बाद मरीजों के अंग संरक्षित किए जा सकते हैं. इस तरह हजारों मरीजों की न केवल जान बची, बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बनी रही.
क्यों आसान हुई सर्जरी?: डॉ शिवम का कहना है कि रोबोटिक तकनीक में सर्जरी के दौरान मिनिमल इनवेसिव प्रोसेस (छोटे चीरे से ऑपरेशन) का उपयोग किया जाता है. इससे ऑपरेशन में खून बहने की संभावना बेहद कम हो जाती है और मरीज जल्दी रिकवर कर पाता है. इसके अलावा शरीर के कई हिस्सों में आसानी से रोबोट पहुंच जाता है, जिससे सर्जरी काफी आसान हो गई है. इसके साथ ही रोबोटिक सर्जरी से मरीजों को सुरक्षित, कम दर्दनाक और तेज रिकवरी मिल रही है. उन्होंने बताया कि बड़ी सर्जरी से मरीज को अस्पताल में 10-12 दिन रहना पड़ता था. वहीं अब 3-4 दिन में छुट्टी मिल जाती है. साथ ही संक्रमण का खतरा कम होता है और सर्जरी के निशान भी बेहद छोटे होते हैं. रोबोटिक आर्म्स 360 डिग्री तक घूम सकती हैं, जिससे शरीर के बेहद जटिल हिस्सों तक पहुंच आसान हो जाती है.
करोड़ों के हैं रोबोट: डॉ शिवम का कहना है कि यूरोलॉजी से संबंधित मरीजों में पहले लेप्रोस्कॉपी के जरिए सर्जरी की जाती थी. अब रोबोट के जरिए सर्जरी हो रही है. जिससे सर्जरी काफी आसान हो गई है. डॉक्टर्स का कहना है कि मरीज के शरीर में ऐसी कई जगह होती हैं, जहां सर्जरी के दौरान हाथ नहीं पहुंच पाता, लेकिन रोबोट आसानी से शरीर के किसी भी हिस्से में पहुंच सकता है. एक साल पहले करीब 50 करोड़ की लागत से दो रोबोटिक सिस्टम अस्पताल में स्थापित किए गए थे. हालांकि रोबोटिक सर्जरी में रोबोट को सर्जन ही ऑपरेट करता है. फिलहाल अस्पताल में प्रोस्टेट कैंसर, पिशाब की थैली का कैंसर समेत अन्य सर्जरी को अंजाम रोबोट द्वारा दिया जा रहा है.




















