झालावाड़: जिले की पॉक्सो कोर्ट के विशिष्ट न्यायाधीश ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आरोपी बलीराम को दोषी मानते हुए शुक्रवार को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. न्यायाधीश ने आरोपी पर 28 हजार रुपए का आर्थिक दंड भी लगाया. आदेश में कहा गया कि यदि आरोपी यह दंड राशि नहीं चुकाता है तो उसे 1 वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.
परिजनों की रिपोर्ट से खुला मामला: लोक अभियोजक गिरिराज नागर ने बताया कि करीब 1 वर्ष पूर्व रायपुर थाने में पीड़िता के परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी. परिजनों ने बताया कि उनकी 15 वर्षीय बेटी घर से बाजार गई थी, लेकिन बाद में वह बस से चंवली गांव चली गई और वहीं से लापता हो गई. परिजनों ने रिश्तेदारों व परिचितों के यहां तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला.
बाद में पुलिस ने अनुसंधान के दौरान पीड़िता को छापरा, मध्यप्रदेश से दस्तयाब किया. पूछताछ में पीड़िता ने बताया कि उसकी जान-पहचान आरोपी बलीराम से एक साल पहले हुई थी. आरोपी ने उसे बहला-फुसलाकर इंदौर बुलाया और फिर अपने गांव छापर (मध्यप्रदेश) ले गया, जहां उसने उसके साथ कई बार जबरन शारीरिक संबंध बनाए.
गवाह और दस्तावेजों के आधार पर फैसला: पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर चालान न्यायालय में पेश किया. अभियोजन पक्ष ने मामले में 19 गवाह और 23 दस्तावेज प्रस्तुत किए. इन्हीं सबूतों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए 20 वर्ष कठोर कारावास और 28 हजार जुर्माने की सजा सुनाई. न्यायाधीश ने पीड़िता को न्याय दिलाने के साथ-साथ उसे सहारा देने के लिए पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दिलाने की अनुशंसा भी की है.




















