भरतपुर: विश्व धरोहर स्थल केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (घना) एक बार फिर प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार हो गया है. इस बार लगभग 200 पेंटेड स्टार्क का झुंड उद्यान में पहुंच चुका है और एन व एल ब्लॉक में इनकी नेस्टिंग (घोंसले बनाने की प्रक्रिया) शुरू हो गई है. साथ ही करीब 700 कार्मोरेंट की मौजूदगी ने उद्यान की रौनक और बढ़ा दी है. इन पक्षियों की आमद से न सिर्फ पक्षी प्रेमी उत्साहित हैं, बल्कि स्थानीय गाइड, फोटोग्राफर और पर्यटक भी रोमांचित हैं.
उद्यान निदेशक मानस सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष बर्ड फ्लू की चपेट में आने से करीब 40 पेंटेड स्टार्क के बच्चे काल का ग्रास बने थे. उस अनुभव से सबक लेते हुए इस बार स्टार्क ने उस प्रभावित इलाके में नेस्टिंग नहीं की है. वहीं, विभाग की टीमें पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी पक्षी में लक्षण मिलने पर तुरंत सैंपलिंग की जाएगी. पेंटेड स्टार्क को उसकी खूबसूरत रंगत के कारण पक्षी प्रेमी जीवित पेंटिंग भी कहते हैं. इसका शरीर मुख्य रूप से सफेद होता है, लेकिन इसके पंखों पर गुलाबी आभा, पंखों की काली धारियां और लंबी पीली चोंच इसे बेहद आकर्षक बनाती है. गीली भूमि, तालाब और झीलों में भोजन तलाशते समय इसका झुंड देखने लायक होता है. यह पक्षी मछलियां, मेंढक और छोटे जलीय जीव खाकर जीवन यापन करता है. दिलचस्प बात यह है कि शिकार करते समय यह अपनी लंबी चोंच को पानी में डालकर धीरे-धीरे आगे बढ़ता है और जैसे ही शिकार उसके संपर्क में आता है, तुरंत पकड़ लेता है.
नेस्टिंग और जीवन चक्र: पेंटेड स्टार्क सामाजिक पक्षी है और बड़े झुंड में रहना पसंद करता है. ये अक्सर ऊंचे पेड़ों पर घोंसले बनाते हैं. एक मादा स्टार्क आमतौर पर 2 से 5 अंडे देती है. अंडों की ऊष्मायन अवधि करीब एक माह होती है और बच्चे घोंसले में ही रहकर धीरे-धीरे उड़ान भरने लायक बनते हैं. निदेशक मानस सिंह ने बताया कि इनका प्रजनन चक्र बरसात और पर्याप्त जल उपलब्धता पर निर्भर करता है. यही वजह है कि बीते दो वर्षों से पांचना बांध से लगातार पानी मिलने और अच्छी बरसात के कारण घना में पेंटेड स्टार्क की संख्या सामान्य से कई गुना बढ़ी है. इस बार भी इनकी संख्या उम्मीदों से बेहतर रहने की संभावना है.
घना का पर्यावरण और अन्य पक्षी: केवलादेव में सिर्फ पेंटेड स्टार्क ही नहीं, बल्कि करीब 700 कार्मोरेंट भी पहुंच चुके हैं. इनके अलावा ईग्रेट, आइबिस और स्पूनबिल जैसे कई अन्य पक्षी भी यहां दिखाई देने लगे हैं. यह संकेत है कि उद्यान का पारिस्थितिकी तंत्र पक्षियों के लिए बेहद अनुकूल है. पेंटेड स्टार्क की संख्या में वृद्धि उत्साहजनक है, लेकिन बर्ड फ्लू जैसी बीमारियां इनके संरक्षण की बड़ी चुनौती हैं. निदेशक सिंह के अनुसार उनकी प्राथमिकता है कि किसी भी पक्षी को कोई संक्रमण न फैले. वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं, यदि किसी भी पक्षी में कोई लक्षण नजर आएंगे तो उसे अलग कर सैंपलिंग की जाएगी.
जानिए पेंटेड स्टार्क को:
- पेंटेड स्टार्क को उनकी रंगीन आभा के कारण जीवित पेंटिंग भी कहा जाता है.
- बनावट: सफेद शरीर, पंखों पर काली धारियां और हल्की गुलाबी छटा, साथ ही लंबी पीली चोंच.
- आहार: ये मुख्य रूप से मछलियां, मेंढक और छोटे जलीय जीव खाते हैं.
- शिकार करने की शैली: पानी में धीरे-धीरे चोंच डालकर आगे बढ़ते हैं और जैसे ही कोई जीव संपर्क में आता है, तुरंत पकड़ लेते हैं.
- पेंटेड स्टार्क सामाजिक पक्षी हैं और बड़े झुंड में रहना पसंद करते हैं.
- ये ऊंचे पेड़ों पर घोंसले बनाते हैं.
- मादा एक बार में 2 से 5 अंडे देती है.
- अंडों से करीब 30 दिन में बच्चे बाहर आ जाते हैं.
- बच्चे घोंसले में ही पंख मजबूत करते हैं और उड़ान भरना सीखते हैं.




















