कोटा : गणेश उत्सव कोटा में धूमधाम से मनाया जाता है. गली-मोहल्ले, चौराहे से लेकर हाईराइज मल्टी बिल्डिंग और हाउसिंग सोसाइटी में भी गणपति विराजित किए जाते हैं. यहां तक कि कोटा के सैकड़ों घरों में भी गणपति स्थापित होते हैं, जिसकी तैयारी धूमधाम से शुरू हो गई है. ढोल नगाड़ा और बाजों की धुन पर इन गणपति को पांडाल तक ले जाने का क्रम शुरू हो गया है. यह पांडाल भी हजारों क्षमता के वाटरप्रूफ बनाए जा रहे हैं. इन लोगों ने पहले ही अपनी मूर्तियां बुक कर दी थी. पंडाल में 10 से लेकर 17 फीट तक की मूर्ति स्थापित की जा रही हैं.
कोटा में बड़े गणपति के पांडाल कोटा जीएडी सर्किल, महावीर नगर चौराहा, तलवंडी सर्कल, रामपुरा पुराना शहर क्षेत्र, घंटाघर, चम्बल गार्डन के पास, केशवपुरा, भीमगंज मंडी, लैंडमार्क, नयापुरा, बोरखेड़ा, विज्ञान नगर, डीसीएम इंदिरा गांधी नगर, रानपुर व नयापुरा क्षेत्र शामिल हैं. कोटडी भोई मोहल्ला निवासी पवन कश्यप का कहना है कि उन्होंने अपने लिए 21000 में 9.5 फीट की मूर्ति तैयार करवाई है. आरके पुरम निवासी मनीष सोनी का कहना है कि पहले उन्होंने इमरजेंसी की वजह से इस बार आयोजन नहीं रखा था, अब अचानक से प्रोग्राम दोबारा बना है. वह मूर्ति नहीं बनवा पाए थे, लेकिन अब मूर्ति को बनवा रहे हैं. एक दिन में ही पूरा पांडाल भी हम तैयार करवा रहे हैं.
बंगाल के कारीगर 3 महीने से जुटे : कोटा शहर में 10 से ज्यादा जगह पर यह मूर्ति बनाने का काम हो रहा है, जिनमें छावनी, कोटडी, थेकड़ा, अनंतपुर बंजारा बस्ती सीएडी चौराहा, कुन्हाड़ी सहित कई जगह शामिल है. सभी जगह पर पश्चिम बंगाल से आए हुए कारीगर ही मूर्ति बना रहे हैं. करीब 400 से ज्यादा कारीगर कोटा में अलग-अलग जगह पर काम कर रहे हैं. कोटा में बरसों से वेस्ट बंगाल के नदिया जिला के राणाघाट से आकर मूर्ति बनाने का काम करने वाले मोहित पाल का कहना है कि उनके पास करीब 50 कारीगर आकर काम कर रहे हैं. यह 3 महीने पहले आ गए थे और अभी गणपति की मूर्तियां बनाने का काम अंतिम चरण में है. इसके बाद दुर्गा मां की मूर्तियां बनाने का काम शुरू होगा. यह काम भी एक महीने चलेगा. ऐसे में साल में 4 महीने कारीगर कोटा में ही रहते हैं. इसके बाद दुर्गा पूजा के पहले कोटा से चले जाएंगे.
केवल मिट्टी की मूर्तियां 8 क्विंटल तक वजन : मोहित पाल का कहना है कि वह केवल मिट्टी की ही मूर्तियां बनाते हैं, इसलिए काफी वजनी होती है. छोटी मूर्ति 2 फीट की है, इसके बाद बड़ी मूर्ति 14 से 15 फीट तक की है. कुछ लोगों की डिमांड पर मूर्ति बड़ी भी बनाई जाती है. यह शहर के बड़े पांडाल के लिए होती हैं, जहां पर हजारों की संख्या में लोग रोज दर्शन के लिए आते हैं और लंबे समय से यह आयोजन हो रहे हैं. इन मूर्तियों का वजन भी काफी होता है, जिन्हें क्रेन की मदद से ही उठाया जा सकता है. इन्हें ट्रॉली पर ही तैयार किया जा रहा है. सोमवार और मंगलवार को पांडाल आयोजक मूर्ति को ही ट्रॉली के साथ ट्रैक्टर की मदद से ले जाएंगे. यह मूर्तियां 8 क्विंटल वजनी तक है.
राम मंदिर और ब्रह्मा- विष्णु-महेश के साथ भी मूर्ति : मूर्ति बनाने में जुटे कारीगर गणेश दास का कहना है कि उन्होंने 200 मूर्तियां कोटा में तैयार की हैं, जिसमें 2 फीट से लेकर 12 फीट तक की मूर्ति बना रहे हैं, अन्य भी कई जगह पर मूर्ति बनाने वाले लोग हैं. इसमें अलग-अलग अवतार की मूर्तियां उन्होंने बनाई है, जिनमें शेषनाग का अवतार, राममंदिर के साथ गणपति, ब्रह्मा, विष्णु व महेश, शिवलिंग के साथ, खड़े हुए और विराजित हुए गणपति, एक पैर पर खड़े हैं. अधिकांश बड़ी मूर्तियां बुकिंग पर ही बनाई जाती हैं. इनमें बड़े-बड़े पांडाल वाले पहले ही आकर अपनी फोटो दे जाते हैं और वह हर बार अलग-अलग मुद्रा में मूर्ति बनवाते हैं. इस बार ढोलक पर खड़े हुए, बांसुरी पर बैठे हुए, दूध पीते, चट्टान पर विराजित, इसके साथी और रिद्धि सिद्धि और सारंगी बजाते हुए भी मूर्ति बनाई हैं.
धूमधाम से ले जा रहे हैं गणपति को: खड़े गणेश जी मंदिर गणेश नगर में स्थापित होने वाली मूर्ति को ले जाने वाले मोहित शुक्ला का कहना है कि उन्होंने 3 महीने पहले ही इसकी तैयारी शुरू कर दी थी. चंदा और समिति के सदस्यों ने आर्थिक मदद दी है, जिसके बाद वाटरप्रूफ पांडाल तैयार करवा दिया है. 10 दिन तक चलने वाले आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आएंगे और अलग-अलग दिन अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित होंगे.




















