जयपुर : भारत के मिलेट मैन और पद्मश्री सम्मानित डॉ. खादर वली ने रविवार को जयपुर में आयोजित ‘मिलेट विजडम : क्लीन लिविंग विद डॉ. खादर वली’ कार्यक्रम में कहा कि सही भोजन अपनाने से जीवनभर दवाइयों से दूरी बनाई जा सकती है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जब भोजन सही होता है, तब दवाइयों की जरूरत नहीं पड़ती. जब भोजन गलत होता है, तब दवाइयां भी काम नहीं करतीं हैं. जयपुर के जेएलएन मार्ग पर हुए इस कार्यक्रम में करीब 200 गणमान्य लोग शामिल हुए, जिनमें ज्वैलर्स, उद्योगपति और नौकरशाह भी मौजूद थे.
मिलेट्स को बनाएं जीवनशैली का हिस्सा : कार्यक्रम की शुरुआत में कहा गया कि रसोई हमारा पवित्र स्थान है. यहीं से जीवन की असली शक्ति मिलती है. भोजन को सम्मान देना ही स्थायी स्वास्थ्य की कुंजी है. डॉ. वली ने बताया कि मिलेट्स (श्रीअन्न) को रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा बनाना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि मिलेट्स को हमेशा 8 से 10 घंटे तक भिगोकर ही सेवन करें. इससे पाचन आसान होगा और शरीर को सम्पूर्ण पोषण मिलेगा. साथ ही, चीनी की जगह पाम शुगर का इस्तेमाल करने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि अगर हम अलग-अलग प्रकार के मिलेट्स को हर दो दिन में भोजन का हिस्सा बनाते हैं तो किसी भी डिटॉक्स सेंटर की जरूरत नहीं पड़ेगी.
आधुनिक खानपान पर कड़ा प्रहार : आधुनिक आहार प्रणाली की आलोचना करते हुए डॉ. वली ने कहा कि चावल, गेहूं और चीनी आधारित भोजन शराब और तंबाकू की तरह नशे हो चुके हैं. चीनी आखिरी चीज है, जिसका सेवन हमें करना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि गन्ने से बनी परिष्कृत चीनी, मैदे के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले रसायन और ऑक्सीटोसिन/एस्ट्रोजन से प्रभावित दूध बच्चों और युवाओं के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं. इसके कारण लड़कियों में अर्ली प्यूबर्टी और पैंक्रियाज से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं.
स्वास्थ्य और परंपरा की ओर लौटें : डॉ. वली ने कहा कि भारत हर साल अरबों डॉलर मेडिकल और फार्मा सेक्टर पर खर्च कर रहा है, फिर भी लोग स्वस्थ नहीं हो पा रहे. उन्होंने जाहिर तौर पर कहा कि अगर आप जीवनभर डॉक्टरों से दूर रहना चाहते हैं तो उसका रास्ता मिलेट्स हैं. असली स्वास्थ्य का नियंत्रण फाइबर में है और मिलेट्स उसका सबसे समृद्ध स्रोत हैं. उन्होंने आह्वान किया कि हमें पारंपरिक अनाजों की ओर लौटना चाहिए और प्रसंस्कृत भोजन की जगह प्राकृतिक भोजन अपनाना चाहिए.
बीमारियों के लिए मिलेट्स और हर्बल काढ़ा: कार्यक्रम में डॉ. वली ने यह भी बताया कि कैसे गंभीर बीमारियों में मिलेट्स और पारंपरिक औषधियों का इस्तेमाल जीवनदायी हो सकता है. डॉ. खादर वली ने चिंता जताई कि वर्तमान में भारत की केवल 3.2% आबादी ही मिलेट्स का सेवन करती है. उन्होंने कहा कि इसे बड़े स्तर पर बढ़ाना होगा, ताकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित हो सके. डॉ. वली का संदेश साफ था सही भोजन ही सबसे बड़ी औषधि है और उसकी शुरुआत मिलेट्स से होती है.
पार्किंसन्स : डॉ. वली ने बताया कि पार्किंसन्स होने पर अमरूद, पारिजात, पीपल, नीम, दालचीनी और हल्दी से बना काढ़ा सात दिन तक सेवन करें. इसके अलावा उन्होंने मिलेट्स के सेवन का क्रम भी बताया, जिसमें फॉक्सटेल (2 दिन), ब्राउन टॉप (2 दिन), सांवा (1 दिन), कोदो (1 दिन), छोटा बाजरा (1 दिन) का सेवना करना है.
लिवर, किडनी और पैंक्रियाज की पथरी : डॉ. वली ने बताया कि लिवर, किडनी और पैंक्रियाज में पथरी होने पर धनिया पत्ता, मैथी दाना, पथरचटा, पुनर्नवा, भुई आंवला से तैयार काढ़ा सेवन करें. इसके अलावा मिलेट्स के सेवन का क्रम कुछ इस तरह है कि सांवा (3 दिन), कोदो (1 दिन), छोटा बाजरा (1 दिन), फॉक्सटेल (1 दिन), ब्राउन टॉप (1 दिन) सेवन करना है.




















