कोटा : शहर के महावीर नगर में लोन नहीं चुकाने पर एक हॉस्टल को सीज करने का मामला सामने आया है. इस सीज हुई हॉस्टल में कोचिंग स्टूडेंट और उनके परिवार भी रह रहे थे जिन्हें भी बाहर निकाल दिया गया है. साथ ही हॉस्टल मलिक के परिवार को भी बाहर निकाल दिया है. एकाएक हुई इस कार्रवाई से हॉस्टल में रह रहे बच्चे व उनके पेरेंट्स सकते में आ गए हैं.
उन्हें तत्काल ही पुलिस और बैंक के स्टाफ ने कमरा खाली करने के लिए कह दिया. उसके बाद तुरंत हॉस्टल को खाली कर लिया गया. उसके बाद यह बच्चे अपने बैग को पैक कर सामान समेटते हुए हॉस्टल के बाहर ही बैठे हुए हैं. हॉस्टल में रहने वाले बिहार निवासी छात्र अंकित का कहना है कि हमारे सामने अजीबोगरीब समस्या खड़ी हो गई है. इस हॉस्टल में उनके साथ-साथ 10 अन्य स्टूडेंट भी थे. जिनके साथ भी ऐसा ही हुआ है. वही एक बच्चा अपने परिवार के साथ रहता था जिन्हें भी बाहर निकाल दिया गया है.
बैंक ने हॉस्टल पर लिया कब्जा : निजी बैंक के एडवोकेट नरेंद्र योगी का कहना है कि हॉस्टल मालिक पर 71 लाख रुपए का लोन बकाया था. वह 2 साल से किश्त नहीं चुका रहे थे. इसीलिए न्यायालय की परमिशन से हॉस्टल को सीज करके कब्जा लिया है. दूसरी तरफ हॉस्टल मालिक भुवनेश अग्रवाल की पत्नी पूजा का कहना है कि लोन उनके पति ने लिया था. वे दिल्ली गए हुए थे.
उसके बाद यह कार्रवाई बैंक कर्मियों ने पुलिस स्टाफ के जरिए की है. जबकि इन्होंने अप्रैल के आर्डर पर कार्रवाई की है, इसके खिलाफ हमने दूसरी कोर्ट से स्टे ले लिया था. उसके बावजूद भी बैंक ने एक्शन लिया है, जिसमें कोर्ट में हमें 10 लाख रुपए जमा करवाने के लिए कहा था, यह हमने जमा भी करवा दिए थे. इसके बावजूद बैंक ने छुट्टी का फायदा उठाकर यह कार्रवाई की है. जबकि बैंक वर्किंग डे में भी कार्रवाई कर सकती थी, लेकिन अचानक रविवार को यह कार्रवाई करना भी संशय खड़ा कर रहा है.




















