भीलवाड़ा: श्री गणेश उत्सव एवं प्रबंधन समिति ने इस वर्ष भी भीलवाड़ा सहित प्रदेश के 6 जिलों में लागत मूल्य से कम दाम पर भगवान गणेश की इको-फ्रेंडली प्रतिमाएं वितरित करने का निर्णय किया है. समिति का कहना है कि इसका उद्देश्य सामाजिक समरसता के साथ-साथ पर्यावरण प्रदूषण रोकना भी है. समिति के तत्वावधान में आगामी 10 दिवसीय गणेश महोत्सव की तैयारियां 27 अगस्त से शुरू हो गई है. इंदौर के मूर्तिकारों को बुलाकर भगवान गणपति की आकर्षक प्रतिमाएं तैयार कराई जा रही हैं, जिन्हें लागत मूल्य से कम पर वितरित किया जाएगा.
समिति के मीडिया प्रभारी महावीर समदानी ने बताया कि समिति 30 वर्षों से गणेश महोत्सव मना रही है. हर वर्ष स्थानीय मांग के अनुसार मूर्तियां तैयार कराई जाती हैं. इस बार 10 दिवसीय आयोजन 27 अगस्त गणेश चतुर्थी से शुरू होकर 6 सितंबर अनंत चतुर्दशी पर प्रतिमा विसर्जन पर सम्पन्न होगा. समदानी ने बताया कि गणेश महोत्सव के माध्यम से सभी जातियों और समुदाय के लोगों को एक मंच पर लाने का प्रयास है, जिससे राष्ट्रीय एकता एवं राष्ट्रवादी भावनाओं को बढ़ावा मिलता है. यह त्योहार भारतीय संस्कृति और परंपराओं को पुनर्जीवित करने का एक प्रमुख मंच बन गया है.
इको-फ्रेंडली प्रतिमाएं: समिति द्वारा इस बार दो प्रकार की प्रतिमाएं निर्मित करवाई गई हैं, जिनमें 1 फीट से लेकर 5 फीट तक की प्रतिमाएं शामिल हैं. बड़ी प्रतिमाएं संस्थाओं, मोहल्लों और चौराहों पर स्थापित की जाएंगी, जबकि छोटी प्रतिमाएं घरों एवं प्रतिष्ठानों में स्थापित की जा सकेंगी. इस बार भी प्रतिमाएं काली मिट्टी, जूट, चिकनी मिट्टी और प्राकृतिक रंगों के मिश्रण से इको-फ्रेंडली तैयार की गई हैं, ताकि जल में विसर्जन के बाद किसी तरह का प्रदूषण न फैले. मूर्तियों का पंजीकरण आर.सी. व्यास कॉलोनी स्थित आश्रम में किया जा रहा है. इनका वितरण 27 अगस्त को सुबह 9 बजे गणपति वितरण समारोह के दौरान किया जाएगा.




















