जयपुर: राज्य सरकार की ओर से प्रदेश की मंडियों में लगाए गए यूजर चार्ज का व्यापारिक संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है. राजस्थान की मंडियों से जुड़े विभिन्न संगठनों ने शुक्रवार को एक बैठक की. इसमें अगले तीन दिन तक मंडियों में सभी तरह का कारोबार बंद रखने की घोषणा की गई. इनमें आटा, दाल, तेल, मसाले, ड्राईफ्रूट्स, पशु आहार आदि के कारोबार से जुड़ी एसोसिएशन शामिल है. व्यापारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि जब तक यूजर चार्ज हटाया नहीं जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. इस फैसले के तहत राजस्थान की 247 मंडियां अगले रविवार तक बंद रहेगी. इस दौरान सभी व्यापारी अपने क्षेत्र के विधायकों को ज्ञापन देंगे. साथ ही मुख्यमंत्री से वार्ता के प्रयास किए जाएंगे.
राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के चेयरमैन बाबूलाल गुप्ता का कहना था कि राज्य सरकार की ओर से 13 अगस्त को एक आदेश जारी किया गया, जिसमें मंडियों में बिकने वाले आटा, मैदा, खाद्य तेल, मसाले, दाल, पशु आहार आदि पर 50 पैसे प्रति सैकड़ा (0.5%) यूजर चार्ज लगाया गया है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह यूजर चार्ज जारी रहता है तो मंडियों का व्यापार अन्यत्र शिफ्ट हो जाएगा और मंडियां वीरान हो जाएंगी.
गुप्ता का कहना था कि यूजर चार्ज से जुड़ा मुद्दा सरकार के समक्ष रखा जा चुका है, लेकिन अभी तक किसी भी तरह का आश्वासन सरकार या संबंधित विभाग के अधिकारियों की ओर से प्राप्त नहीं हुआ है. ऐसे में व्यापारियों का मानना है कि सरकार उनकी बात सुनना नहीं चाहती. सरकार के इस आदेश से न केवल व्यापारियों का व्यापार खत्म होगा, बल्कि मुनीम, पल्लेदार, ठेला-ठेली वाले और ट्रांसपोर्ट वाले भी बेरोजगार हो जाएंगे. ऐसे में तुरंत प्रभाव से यूजर चार्ज समाप्त किया जाना चाहिए.
करोड़ों का कारोबार होगा प्रभावित: 2-3 दिन प्रदेश की मंडियां बंद रहती है तो निश्चित तौर पर करोड़ों का कारोबार प्रभावित होगा. खासकर पशु आहार की बाजार में सबसे अधिक किल्लत होगी. गुप्ता ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा जिन कृषि जिंसों पर मंडी टैक्स लगा है, उनके बाय-प्रोडक्ट पर यूजर चार्ज लगाया गया है, जो कि गलत है. उन्होंने कहा कि जब तक समस्या का समाधान नहीं हो जाता, तब तक यूजर चार्ज से प्रभावित व्यापारी अपना आंदोलन जारी रखेंगे. व्यापार इस तरह बंद रहा तो उपभोक्ताओं को भी बहुत बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी.
मंडियों पर असर: व्यापारी वर्ग का यह भी कहना था कि इसका सबसे अधिक असर प्रदेश की मंडियों पर देखने को मिलेगा, क्योंकि चीनी को छोड़कर मंडी में बिकने वाली अन्य सभी खाद्य वस्तुओं पर यूजर चार्ज लगेगा, जबकि वे खाद्य पदार्थ यदि मंडी से बाहर किसी अन्य जगह खरीदे-बेचे जाते हैं तो उस पर यूजर चार्ज लागू नहीं होगा. ऐसे में मंडी में बिकने वाला माल महंगा होगा, जबकि वही माल मंडी से बाहर सस्ते दाम पर मिलेगा. इस वजह से व्यापारियों को मजबूरी में मंडियों से व्यापार बंद करना पड़ सकता है.




















