भरतपुर: विश्व प्रसिद्ध केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान एक बार फिर सुर्खियों में है. यहां पहली बार स्लेटी-ब्रेस्टेड रेल (Lewinia striata) नामक दुर्लभ और आकर्षक पक्षी रिकॉर्ड किया गया है. यह पक्षी अब तक भारत के पश्चिमी घाट और दलदली क्षेत्रों में ही देखा जाता था. लगातार दो साल से पांचना बांध का पानी मिलने और घना की आबोहवा में आए सकारात्मक बदलाव की वजह से अब यहां नई प्रजातियों का आगमन देखा जा रहा है. इस पक्षी का फोटो केवलादेव घना के ग्रासलैंड क्षेत्र में वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर रॉबिन ने खींचा. रॉबिन का कहना है कि मेरे लिए यह जीवन का बेहद खास पल था. कैमरे की आंख में जैसे ही यह पक्षी कैद हुआ, उसी क्षण एहसास हुआ कि घना की प्रकृति फिर से जीवन से भर रही है.
पक्षी की पहचान और विशेषता: केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक मानस सिंह ने बताया कि स्लेटी-ब्रेस्टेड रेल भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण-पूर्व एशिया की मूल निवासी रेल प्रजाति है. इसका वैज्ञानिक नाम Lewinia striata है. नाम के अनुरूप इसके वक्षस्थल का रंग स्लेटी होता है.यह आकार में अपेक्षाकृत छोटा और शरीर से पतला होता है.यह पक्षी दलदली घास के मैदानों और झाड़ियों में रहना पसंद करता है. जमीन पर सक्रिय रहने वाला यह पक्षी अक्सर पानी की सतह के किनारों पर देखा जाता है. प्रजनन काल में नर अपनी तीखी आवाज से क्षेत्र पर अधिकार जताता है.
सिंह ने बताया कि जुलाई माह में इसका प्रजनन देहरादून के पास हिमालय की तलहटी में दर्ज किया गया था. पारंपरिक रूप से इसे गैलिरेलस (Gallirallus) वंश का हिस्सा माना जाता था, लेकिन हाल के आनुवंशिक अध्ययनों के बाद इसे लेविनिया (Lewinia) वंश में शामिल किया है. आईयूसीएन और आईओसी ने इस वर्गीकरण को औपचारिक मान्यता दी.
भरतपुर आने की वजह: निदेशक मानस सिंह ने बताया कि केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान की बदलती पारिस्थितिकी ही इस दुर्लभ प्रजाति के आने का मुख्य कारण है.पिछले दो वर्षों से पांचना बांध का पानी उद्यान तक पहुंच रहा है. जलभराव होने से घना क्षेत्र में दलदली घास और वेटलैंड का विस्तार हुआ. इससे वेटलैंड पर निर्भर प्रजातियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ.
पारिस्थितिकी का पुनर्जीवन: निदेशक मानस ने बताया कि स्लेटी-ब्रेस्टेड रेल का आना संकेत है कि केवलादेव की पारिस्थितिकी पुनर्जीवित हो रही है. पानी और दलदली वनस्पति के कारण यहां की जैव विविधता में तेजी से वृद्धि हो रही है. स्लेटी-ब्रेस्टेड रेल का केवलादेव में पहली बार दिखना भरतपुर के लिए सकारात्मक संकेत है. यहां की आबोहवा दुर्लभ प्रजातियों को आकर्षित कर रही है. अगर इसी तरह पांचना का पानी और पर्यावरण संरक्षण के प्रयास जारी रहे, तो केवलादेव आने वाले वर्षों में और भी कई नई प्रजातियों का ठिकाना बन सकता है.




















