अजमेर: पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध पक्ष का विशेष महत्व है. श्राद्ध के दिनों में पितरों के निमित्त पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण किया जाता है. मान्यता है कि श्राद्ध के दिनों में पितर धरती पर आते हैं और अपने परिवार के लोगों से श्राद्ध कर्म के माध्यम से तृप्ति की उम्मीद करते हैं. तीर्थ नगरी पुष्कर में श्राद्ध पक्ष के दौरान श्रद्धालु पितरों की आत्मिक शांति के लिए श्राद्ध कर्म करने तथा पितृ दोष के निवारण के लिए देशभर से बड़ी संख्या में आते हैं.
पुष्कर के ज्योतिष पंडित कैलाश नाथ दाधीच ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में पितरों के लिए किए गए श्राद्ध कर्म से वे प्रसन्न होकर परिवार को खुशहाली और संतान वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं. इस बार श्राद्ध पक्ष 7 सितंबर से शुरू होगा. दाधीच के अनुसार पंचांग गणना के आधार पर पूर्णिमा श्राद्ध 7 सितंबर रविवार से शुरू होगा.
इसी प्रकार प्रतिपदा का श्राद्ध 8 सितंबर को, द्वितीया श्राद्ध 9 सितंबर , तृतीया श्राद्ध 10 सितंबर, चतुर्थी श्राद्ध 10 सितंबर (दोपहर बाद) एवं 11 सितंबर, पंचमी श्राद्ध 11 सितंबर, षष्ठी श्राद्ध 12 सितंबर , सप्तमी श्राद्ध 13 सितंबर (तिथि क्षय), अष्टमी श्राद्ध 14 सितंबर, नवमी श्राद्ध 15 सितंबर, दशमी श्राद्ध 16 सितंबर, एकादशी श्राद्ध 17 सितंबर, द्वादशी श्राद्ध 18 सितंबर को, त्रयोदशी श्राद्ध 19 सितंबर, चतुर्दशी श्राद्ध 20 सितंबर को और अमावस्या श्राद्ध 21 सितंबर रविवार को होगा.
तिथि-विशेष सावधानियां:
- 10 सितंबर (बुधवार): तृतीया दोपहर 3:38 बजे तक रहेगी.
- 11 सितंबर: चतुर्थी दोपहर 12:46 बजे तक रहेगी, इसलिए इस दिन चतुर्थी एवं पंचमी दोनों का श्राद्ध किया जा सकता है.
- सप्तमी तिथि क्षय के कारण इस बार श्राद्ध पक्ष 14 दिनों का होगा.
पंडित दाधीच ने बताया कि श्राद्ध पक्ष में पितरों के नाम से दान, पुण्य, हवन, पूजन, तर्पण, मार्जन, नारायण बलि और पिंडदान करने से उनकी मोक्ष प्राप्ति होती है तथा पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. श्राद्ध पक्ष में ही पितरों को देवताओं के समकक्ष मानने का विशेष योग बनता है.




















