जयपुर: जन्माष्टमी पर्व पर शनिवार को राजधानी के राधा दामोदर मंदिर में भक्तिभाव और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला. यहां भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप ‘दामोदर’ का जन्मोत्सव रात्रि 12 बजे नहीं, बल्कि दोपहर 12 बजे मनाया गया. खास बात ये रही कि मंदिर परिसर में मौजूद गोवर्धन शिला (गिरिराज स्वरूप) को भी आज विशेष भोग अर्पित किया गया. मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने जिस गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी, वही आस्था यहां जीवंत स्वरूप में विद्यमान है.
दोपहर में हुआ महाभिषेक: जैसे ही घड़ी में दोपहर के 12 बजे, राधा दामोदर मंदिर परिसर ‘नंद के आनंद भयो’ के जयकारों से गूंज उठा. महंत मलय गोस्वामी और गोस्वामी परिवार ने परंपरागत ढंग से पहले पंचगव्य से अभिषेक किया. इसके बाद पंचामृत और सुगंधित जल से ठाकुर जी का महाभिषेक हुआ. रेशमी वस्त्र और फूलों से सजे झूले में ठाकुर जी के बाल स्वरूप की झांकी सजाई गई. इस दौरान भक्तों ने माखन-मिश्री, पंजीरी और पंचामृत सहित विविध भोग अर्पित किए. मलय गोस्वामी ने बताया कि यहां गिरिराज जी विराजमान हैं. उन्हें सब स्वीकार है. भक्त अपनी श्रद्धा और प्रेम से जो भी अर्पित करते हैं, वही भगवान को भोग स्वरूप चढ़ाया जाता है.
500 साल पुरानी परंपरा: मलय गोस्वामी ने बताया कि यह विश्व का एकमात्र मंदिर है, जहां भगवान का जन्म दोपहर 12 बजे मनाया जाता है. यह परंपरा वृंदावन से चली आ रही है. लगभग 500 वर्ष पूर्व सनातन गोस्वामी और रूप गोस्वामी ने ठाकुर जी का विग्रह प्रकट किया था और सेवा की जिम्मेदारी जीव गोस्वामी को दी थी. उन्होंने बताया क्योंकि ठाकुर जी का स्वरूप बालक रूप में है, इसलिए उनके प्राकट्य का उत्सव दिन में तय किया गया. वही परंपरा आज भी जयपुर में निभाई जा रही है.
जन्माष्टमी के साथ नंदोत्सव भी: बाल स्वरूप होने के कारण दामोदर जी को रात्रि 11 बजे तक शयन करा दिया जाता है. इससे पहले रात 8 बजे से 11 बजे तक नंदोत्सव कार्यक्रम होता है. इसमें भक्तों के बीच नंदोत्सव की भेंट उछाली जाती है. इसके बाद गोस्वामी परिवार जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर में मध्यरात्रि प्राकट्य की तैयारियां शुरू करता है. रात्रि 12 बजे भगवान गोविंद देव जी का महाभिषेक और प्राकट्य उत्सव होता है, जिसमें हजारों भक्त शामिल होते हैं.
भक्तों की उमड़ी भीड़: मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. महिलाओं ने पारंपरिक परिधान में भजन-कीर्तन किए और भक्तों ने गिरिराज स्वरूप के दर्शन करते हुए परिक्रमा की. प्राकट्य उत्सव के दौरान भी भगवान के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे. ठाकुर जी के अभिषेक के बाद भगवान पर अर्पित पंचामृत को प्रसाद स्वरूप भक्तों में बांटा गया.




















