जयपुर: जयपुर में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण के विग्रहों को लेकर एक अद्भुत पौराणिक मान्यता प्रचलित है. जयपुर के गोपीनाथ जी का वक्षस्थल और बाहु, गोविंद देवजी का मुखमंडल और नयन और करौली के मदन मोहन जी के चरण मिलकर साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप बनाते हैं. मान्यता है कि यदि कोई भक्त एक ही दिन में इन तीनों विग्रहों के दर्शन कर ले, तो उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है. इसी आस्था के आलोक में इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर जयपुर का गोविंद देवजी मंदिर भक्तों का सबसे बड़ा केंद्र बनने जा रहा है. जहां 10 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है. इसी को लेकर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया है ताकि मंदिर में पहुंचने वाला हर भक्त अपने आराध्य के दर्शन कर सके.
मंदिर में सुरक्षा और व्यवस्थाएं चाक-चौबंद: जयपुर की जन्माष्टमी सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और उल्लास का ऐसा संगम है, जो हर भक्त को कान्हा की लीलाओं के युग में ले जाता है. 16 अगस्त की भोर से ही गोविंद देवजी मंदिर में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ेगा. सुबह 4:30 बजे की मंगला झांकी से ही गोविंद देवजी के दर्शन शुरू हो जाएंगे. भीड़ को देखते हुए पासधारक, बिना जूते-चप्पल पहने आमजन, जूता-चप्पल पहने आमजन और जगमोहन इन चार श्रेणियों के लिए अलग-अलग लाइनें बनाई गई हैं. जलेब चौक से लेकर मंदिर तक दर्शनार्थियों की कतार रहेगी. इस व्यवस्था को संभालने के लिए 1000 से ज्यादा कार्यकर्ता और लगभग इतने ही पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे. वहीं, 10 मेटल डिटेक्टर, सीसीटीवी कैमरे और कंट्रोल रूम भी सुरक्षा का पहरा देंगे. भीड़ और मौसम को ध्यान में रखते हुए जगह-जगह शेड और एलईडी स्क्रीन भी लगाई गई हैं.
फूलों के विशेष शृंगार और ‘बधाई है’ पताकाओं से सजा मंदिर: जन्माष्टमी को लेकर मंदिर को पारंपरिक ‘बधाई है’ और सातिया की पताकाओं से सजाया गया है. वहीं मुख्य द्वार और निकास पर शहनाई की मधुर धुन श्रद्धालुओं का स्वागत करेगी. ठाकुर जी को विशेष पीली रेशमी पोशाक धारण कराई जाएगी, जिस पर महीनों की मेहनत से राजस्थानी गोटा-पत्ती का बारीक काम हुआ है. जन्माष्टमी की रात को जैसे ही घड़ी में 12 बजेंगे, 31 तोपों की सलामी और रंगीन आतिशबाजी के बीच गोविंद देवजी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा. इस अवसर पर पंचामृत से ठाकुर जी का जन्माभिषेक होगा. इसमें 425 लीटर दूध, 365 लीटर दही, 11 किलो घी, 85 किलो बूरा और 11 किलो शहद का प्रयोग होगा. शहद और बूरा के अलावा सभी सामग्री देसी गाय के दूध से निर्मित होगी. अभिषेक के बाद ठाकुर जी को पंजीरी लड्डू और कुल्हड़ में रबड़ी जैसे भोग अर्पित होंगे.
भजन, बधाइयां और नंदोत्सव का उल्लास: 17 अगस्त को गोविंद देवजी मंदिर में नंदोत्सव की धूम रहेगी. ठाकुर जी को केसरिया पोशाक और पुष्प शृंगार से अलंकृत किया जाएगा. मंदिर प्रांगण ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की…’ जैसे भजनों और बधाइयों से गूंज उठेगा. परंपरा के अनुसार कपड़े, खिलौने, बिस्किट और फल भक्तों में उछाले जाएंगे.
जयपुर के इन मंदिरों में भी जन्माष्टमी पर होंगे आयोजन: गोविंद देवजी के अलावा गोपीनाथ जी, राधा दामोदर जी, ब्रजनिधि, आनंद कृष्ण बिहारी और गोविंद देव जी के अधीन आने वाले श्री राधा माधवजी, नटवरजी, कुंज बिहारीजी, श्री गोपालजी नागा, तालाब वाले श्री गोपालजी, मुरली मनोहरजी और रोपाड़ा गोपालजी में भी जन्माष्टमी उत्सव हर्षोल्लास से मनाया जाएगा. उधर, श्री कृष्ण बलराम मंदिर में कर्नाटक से मंगवाए पुष्पों से भगवान का शृंगार किया जाएगा. साथ ही भगवान कृष्ण के स्वागत के लिए गुप्त वृंदावन धाम मंदिर में रंग-बिरंगी रोशनी कर नंदलाल के जन्मदिन पर अर्द्धरात्रि को महाआरती की जाएगी.




















