उदयपुर: देशभर में जन जागरूकता का संदेश देने के लिए निकले जयपुर के वकील राधा गोविंद ने 1 साल में 45000 किलोमीटर की यात्रा पूरी की है. वे 28 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों की यात्रा कर अब उदयपुर पहुंचे. फतहेसागर की पाल पर ईटीवी भारत से खास बातचीत में उन्होंने इस पूरे अभियान और अपने अनुभव साझा किए.
15 अगस्त 2024 से शुरू हुई यात्रा: राधा गोविंद ने बताया कि उन्होंने यह यात्रा 15 अगस्त 2024 को दिल्ली से शुरू की थी. इस दौरान उनके साथ उनका 7 वर्षीय बेटा सहज छीपा भी रहा. पिता-पुत्र ने एक छोटी कार में पूरे देश का भ्रमण किया और जगह-जगह जाकर जागरूकता का संदेश दिया. यात्रा का उद्देश्य महिला सशक्तीकरण, शिक्षा, कला व शिल्प, संस्कृति, विरासत संरक्षण, पर्यावरण, नशामुक्ति और समग्र विकास जैसे विषयों पर लोगों को प्रेरित करना रहा.
कोरोना से मिली आत्मचेतना: राधा गोविंद ने कहा कि जीवन पहले सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन कोरोना काल में आत्मचिंतन के बाद उन्हें अहसास हुआ कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य समाज के लिए कार्य करना है. इसके बाद उन्होंने गरीब बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर काम करना शुरू किया. वर्ष 2024 में उन्होंने ठाना कि भारत को असल मायनों में समझने के लिए इसके हर कोने तक जाना होगा और तभी विवेकानंद ज्योति ज्ञान यात्रा का संकल्प लिया.
यात्रा के अनुभव और चुनौतियां: भारत यात्रा के दौरान उन्होंने शौर्य स्थलों, धरोहरों, स्मारकों, सांस्कृतिक केंद्रों और गांवों का भ्रमण किया. पंजाब सहित कई राज्यों में बढ़ती नशाखोरी की समस्या उन्होंने गंभीर बताई. दक्षिण भारत की यात्रा के दौरान भाषा की बाधा सबसे बड़ी चुनौती रही. उन्होंने कहा कि कहीं-कहीं शिक्षा की स्थिति भी बहुत चिंताजनक दिखी. 15 अगस्त को जयपुर के अमर जवान ज्योति पर इस यात्रा का समापन होगा और इसके अनुभवों की रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपेंगे.
बेटे सहज का अनुभव: इस अखंड यात्रा में उनके बेटे सहज छीपा ने भी बराबर साथ निभाया. सहज ने बताया कि उसे भारत को नजदीक से देखने और समझने का मौका मिला. उसने कहा कि भारत बेहद खूबसूरत है, जहां विविधता में एकता की झलक दिखती है. सहज ने 12 महीनों में 28 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों की यात्रा की है. उसकी इस यात्रा के लिए गिनीज बुक, इंटरनेशनल बुक, एशिया बुक और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में आवेदन किया गया है.
समाज को दिया बड़ा संदेश: पिता-पुत्र ने हर जिले में जाकर प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात की और कॉलेजों, सभाओं व एनजीओ में जागरूकता का संदेश दिया. सहज ने साफ-सफाई, नशामुक्त भारत और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जैसे विषयों पर बच्चों और युवाओं को प्रेरित किया. राधा गोविंद ने कहा कि उनका सपना है हर गांव में स्वामी विवेकानंद जैसे युवा तैयार हों और हर व्यक्ति यह सोचे कि उसकी जाति भारतीय है और धर्म इंसानियत.
आगे की योजना: यात्रा के दौरान मिले अनुभव और समस्याओं का विश्लेषण कर वे इसे केंद्रीय मंत्रियों और प्रधानमंत्री तक पहुंचाएंगे. उनका कहना है कि स्वामी विवेकानंद से प्रेरित होकर वे भारत को फिर से सोने की चिड़िया बनाने के लिए युवाओं को प्रेरित करेंगे.




















