Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

जयपुर में धूल फांक रही अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की ‘विरासत’, अल्बर्ट हॉल के स्टोर रूम में 3 साल से ताले में बंद

जयपुर : कई महान क्रांतिकारियों के कारण देश को दशकों की गुलामी के बाद आजादी मिली. इसके लिए कई क्रांतिकारियों ने जान तक की परवाह नहीं की और देश के लिए बलिदान दिया. इन्हीं में से एक हैं महान क्रांतिकारी और अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद, जिनकी विरासत आज जयपुर अल्बर्ट हॉल म्यूजियम के स्टोर में धूल फांक रही है. हिडन जेम्स ऑफ राजस्थान सीरीज पार्ट-5 में जानिए चंद्रशेखर आजाद की साइकिल और लाठी के बारे में, जिसको स्टोर रूम के ताले में बंद किया हुआ है. बहुत कम लोगों को जानकारी है कि महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की साइकिल और लाठी पिछले 3 साल से जयपुर अल्बर्ट हॉल म्यूजियम के स्टोर रूम में पड़ी है, जबकि इस विरासत को लोगों के दर्शनार्थ म्यूजियम में प्रदर्शित करना चाहिए था.

जयपुर में भेष बदलकर इसी साइकिल से घूमते थे आजाद : दरअसल, काकोरी कांड के बाद जब ब्रिटिश हुकूमत चंद्रशेखर आजाद के पीछे पड़ गई थी तब उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में ब्रिटिश हुकूमत से बचने के लिए शरण ली थी. जयपुर में भी 1930 में चंद्रशेखर आजाद ने शरण ली थी. आजाद जयपुर रियासत के राजवैद्य पंडित मुक्ति नारायण शुक्ल की बाबा हरिशचंद्र मार्ग स्थित हवेली में करीब 2 महीने तक उनके रिश्तेदार बनकर ठहरे थे. तब आजाद के पास एक साइकिल और लाठी भी थी. कई बार आजाद भेष बदलकर साइकिल से परकोटे और बाहरी इलाकों में जाकर लोगों से मिलते थे.

Advertisement Box

साइकिल से बस्सी रेलवे स्टेशन पहुंचे थे आजाद : जब ब्रिटिश पुलिस को मुखबिर के जरिए चंद्रशेखर आजाद के जयपुर में होने की सूचना मिली थी, तब आजाद ब्रिटिश पुलिस की छापेमारी से पहले ही वहां से भाग निकले थे. वो पंडित मुक्ति नारायण शुक्ल के बेटे अवधेश नारायण शुक्ल के साथ साइकिल पर सवार होकर घाटगेट, कानोता होते हुए बस्सी रेलवे स्टेशन पहुंचे थे. यहां से उन्होंने इलाहाबाद की ट्रेन पकड़ी और लाठी, साइकिल अवधेश नारायण शुक्ल को दे दी थी. हालांकि, जयपुर से जाने के कुछ समय बाद ही चंद्रशेखर आजाद इलाहाबाद में ब्रिटिश पुलिस के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गए थे. अंग्रेजी सेना से मुठभेड़ के बाद चंद्रशेखर आजाद ने अपनी पिस्टल की आखिरी गोली खुद को मारकर अपनी जान दे दी थी.

लंबे समय तक शुक्ल परिवार ने संभाली थी विरासत : वहीं, शुक्ल परिवार ने तब साइकिल और लाठी को चंद्रशेखर आजाद की विरासत के तौर पर अपनी हवेली में संभाल कर रखा था. मुक्तिनारायण शुक्ल और अवधेश नारायण शुक्ल के देहांत के बाद उनकी बेटी ने साइकिल और लाठी को अपने पास रखा. अवधेश नारायण शुक्ल की बेटी ने अपनी अधिक उम्र को देखते हुए 14 मार्च 2022 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार में मंत्री बीडी कल्ला की मौजूदगी में साइकिल और लाठी अल्बर्ट हॉल प्रशासन के सुपुर्द की थी ताकि इन्हें चंद्रशेखर आजाद की विरासत के तौर पर लोगों के दर्शनार्थ रखा जाए. हालांकि, 3 साल बीतने के बावजूद भी साइकिल और लाठी अल्बर्ट हॉल प्रशासन लोगों के दर्शनार्थ नहीं रख पाया. आलम ये है कि स्टोर रूम में कैद साइकिल और लाठी धूल फांक रहे हैं.

विदेशी निर्मित है साइकिल : दरअसल चंद्रशेखर आजाद की साइकिल विदेशी निर्मित है, साइकिल पर आज भी कंपनी की मोहर और दिनांक लिखी हुई है. उनकी लाठी भी शीशम की लकड़ी से बनी हुई है. सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र सेन का कहना है कि 1930 में चंद्रशेखर आजाद ने बाबा हरचंद मार्ग स्थित एक हवेली में शरण ली थी. जब हवेली पर पुलिस के छापे से पहले ही चंद्रशेखर आजाद ने हवेली छोड़ दी थी और साइकिल से बस्सी पहुंचे थे. इसके बाद से उनकी साइकिल और लाठी शुक्ल परिवार के पास रह गई थी. शुक्ल परिवार ने 2022 में लाठी और साइकिल अल्बर्ट हॉल में जमा कर दी थी कि इसे लोगों के दर्शनों के लिए रखा जाए, लेकिन आज तक साइकिल और लाठी को लोगों के दर्शनार्थ नहीं रखा गया है. सरकार से मांग है कि चंद्रशेखर आजाद की विरासत को जनता के दर्शनार्थ रखा जाए ताकि लोगों को उनके इतिहास के बारे में मालूम हो सके.

अल्बर्ट हॉल के जीर्णोद्धार के बाद रखेंगे जनता के लिए दर्शनार्थ : अल्बर्ट हॉल म्यूजियम के निदेशक महेंद्र का कहना है कि 14 मार्च 2022 को तत्कालीन मंत्री बीडी कल्ला की मौजूदगी में जयपुर के स्वतंत्रता सेनानी अवधेश नारायण शुक्ल की पुत्री ने चंद्रशेखर आजाद की साइकिल और लाठी को अल्बर्ट हॉल म्यूजियम को सुपुर्द की थी. यह साइकिल विदेशी निर्मित है. चंद्रशेखर आजाद जयपुर में आए थे और जब उनको वापस जाना पड़ा था. तब इसी साइकिल से हुए कानोता और बस्सी रेलवे स्टेशन पहुंचे थे. यह साइकिल ऐतिहासिक है. हम अल्बर्ट हॉल म्यूजियम के जीर्णोद्धार के बाद लाठी और साइकिल को जनता के दर्शनार्थ रखेंगे. उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आजाद की लाठी भी करीब साढ़े 4 फीट के आसपास है, उसे भी लोगों के दर्शनार्थ रखेंगे, जिससे लोगों को चंद्रशेखर आजाद के बारे में और ज्यादा जानकारी मिलेगी. साथ ही यह भी पता चलेगा कि साइकिल और लाठी भी आजादी के आंदोलन का हिस्सा थी.

Best Service Providers Near You
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एपल प्रमुख टिम कुक से आईफोन का निर्माण भारत में न करने को कहा है। क्या इसका असर देश के स्मार्टफोन उद्योग पर पड़ सकता है?

Aries Rashifal
मेष
taurus Rashifal
वृषभ
gemini Rashifal
मिथुन
cancer Rashifal
कर्क
leo Rashifal
सिंह
virgo Rashifal
कन्या
libra Rashifal
तुला
scorpion Rashifal
वृश्चिक
sagittarius Rashifal
धनु
capricorn Rashifal
मकर
aquarius Rashifal
कुंभ
pisces Rashifal
मीन
Advertisement Box

और भी पढ़ें