जयपुर : विश्व अंगदान दिवस हर साल 13 अगस्त को मनाया जाता है. यह दिन लोगों को अंगदान के महत्व के बारे में जागरुक करने और अंगदान करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए समर्पित है. इस खास दिन हम रिटायर्ड फॉरेस्ट अधिकारी से मिलते हैं, जो रिटायरमेंट के बाद घर पर आराम की जिंदगी जीने की जगह लोगों का जीवन बचाने की मुहिम में जुटे हुए हैं. मां की दोनों किडनी फेल होने के बाद दो साल जिस दर्द में उन्होंने जिंदगी बिताई, उसे देख अजय गुप्ता ने रिटायरमेंट के बाद लोगों को नेत्र और अंग दान के लिए जागरुक करने का संकल्प लिया. डॉ. अजय गुप्ता हर दिन ऑफिस ड्यूटी की तरह तैयार होते हैं और निकल पड़ते हैं लोगों को अंगदान को लेकर जागरूक करने के लिए. गुप्ता कहते हैं कि एक दिन मरने के बाद शरीर को राख होना है या खाक होना है, लेकिन आप के एक संकल्प से लोगों को नया जीवन मिल सकता है. इससे बड़ा पूण्य का क्या काम होगा?
मां के दर्द ने दिखाई राह : डॉ. अजय गुप्ता कहते हैं कि उनकी मां की 2011-12 में दोनों किडनी फेल हो गई थी. इसके बाद 2014 में उनका देहांत हो गया, लेकिन उन दो-ढाई सालों के दौरान घर हॉस्पिटल की तरह बन गया था. दिन में चार बार डायलिसिस होता था. वो जिस दर्द से गुजरती थी, उसे देखना बहुत पीड़ादायक था. दर्द का एहसास हुआ तो लगा कि सरकारी जिम्मेदारियों से फ्री होकर शेष जीवन को समाज के ऐसे लोगों के लिए समर्पित करना है, जिनको हमारी जरूरत है. रिटायरमेंट के बाद कई अलग-अलग सामाजिक संस्थाओं के साथ जुड़ा और उसके बाद नेत्रदान और अंगदान के लिए लोगों को हर दिन जागरूक करने की मुहिम में जुट गया. अंगदान ऐसे व्यक्ति का किया जाता है, जिसका दिल तो धड़कता है, लेकिन बाकी शरीर काम करना बंद कर देता है. खासतौर से ब्रेनडेड व्यक्ति का ही काम में लिया जाता है.
एक व्यक्ति जाने के बाद भी 8 लोगों की जिंदगी बचा सकता है, अगर उसके सभी आठ अंग काम के हैं तो. लोगों को जागरूक करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब भी लोगों को जागरूक करने जाते हैं तो लोगों को संकल्प लेने की बात करते हैं, क्योंकि अंगदान तो आदमी के जीवन छोड़ने के बाद होता है. हम पहले जीते जी तो सिर्फ व्यक्ति को संकल्प लेने के लिए ही प्रेरित कर सकते हैं. अंगदान से आसान कोई दान नहीं है, अगर आप रक्तदान करते हैं तो उसके लिए भी आपके शरीर से ब्लड निकलता है, लेकिन अंगदान के लिए तो आपको सिर्फ एक संकल्प लेना होता है.
अंगदान संकल्प लेने में राजस्थान पहले नंबर पर : इसमें सिर्फ इतना लिखना होता है कि ‘मेरे जाने के बाद अगर मेरा अंग किसी भी व्यक्ति के काम आता हो तो उसको काम में लेना चाहिए’. सरकार और सामाजिक संगठनों की कोशिश का नतीजा है कि अंगदान संकल्प लेने के मामले में राजस्थान देश में पहले पायदान पर है. राजस्थान में सबसे ज्यादा लोगों ने अंगदान करने का संकल्प लिया है. 90 हजार से ज्यादा लोगों ने अंगदान का संकल्प ले रखा है. राजस्थान में हजारों लोग अंग के इंतजार में हैं.
अलग-अलग संगठनों से जुड़ें : अजय गुप्ता अपने सामाजिक कार्य के लिए करीब 10-12 संस्थाओं से निस्वार्थ भाव से जुड़े हुए हैं. उनका एक दिन किस तरह से समाज के लोगों के काम आए, इसके लिए वो समर्पित होकर संस्थानों के साथ बिना किसी आर्थिक लाभ के काम करते हैं. अजय गुप्ता संदेश देते हैं कि आप अपनी मृत्यु के बाद 8 लोगों का जीवन बचाने में अपनी भूमिका निभा सकते हैं. आपके जाने के बाद यह शरीर तो राख होना है या खाक होना है, लेकिन अगर किसी को आपकी वजह से किसी को जिंदगी मिल जाए तो इससे बेहतर क्या बात हो सकती है? इससे आसान और इससे सुलभ कोई भी अंगदान नहीं है. सबको अंगदान का संकल्प लेना चाहिए. भारत सरकार की www.notto.nic.in एक वेबसाइट है उसके ऊपर आप मोबाइल से 2 मिनट में ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए अब फॉर्म भर के संकल्प ले सकते हैं.




















