बूंदी : राजस्थान की मिट्टी वीरता, परंपराओं और लोक आस्था की अद्भुत मिसालों से भरी पड़ी है. इसी श्रृंखला में बूंदी का कजली तीज महोत्सव भी शामिल है, जो न केवल एक धार्मिक आयोजन है बल्कि एक ऐसा ऐतिहासिक किस्सा भी है, जिसे सुनकर हर कोई चौंक जाता है. कहा जाता है कि जयपुर की तीज लूट लाए थे बूंदी के दरबार बलवंत सिंह और तभी से लोग कहने लगे ‘बूंदी में असली, जयपुर में नकली तीज की सवारी निकलती है’.
कई साल पुरानी है बूंदी की कजली तीज : बूंदी के कापरेन ठिकाने के बलभद्र सिंह ने बताया कि यह परंपरा कई साल पुरानी है. उस वक्त बूंदी रियासत के गोठड़ा ठिकाने के दरबार बलवंत सिंह ने जयपुर में तीज की भव्य सवारी देखकर कहा था कि ‘ऐसी ही सवारी बूंदी में क्यों न हो?’ फिर क्या था, राजा बलवंत सिंह जयपुर पहुंचे और जब तीज की स्वर्ण प्रतिमा सवारी के लिए निकाली गई तो प्रतिमा को लूट लिया और बूंदी ले आए. बाद में इसे महाराजा रामसिंह को सौंपा गया और तब से आज तक कजली तीज के दिन बूंदी में तीज माता की भव्य सवारी निकलती है.
राजपरिवार की परंपरा आज भी बरकरार : पूर्व राजपरिवार की सदस्य रानी रोहिणी कुमारी ने बताया कि उनके परिवार में गणगौर नहीं मनाई जाती, क्योंकि वर्षों पहले एक दुखद हादसे के चलते घर में आठ (शोककाल) मान लिया गया. हादसे के पहले तक गणगौर मनाया जाता था. एक समय गणगौर को जेत सागर में नौका विहार करवाते समय हाथियों ने नाव को डुबो दिया था. उस हादसे में गणगौर सहित कई लोग पानी में डूब गए थे. हादसे के बाद से ही बूंदी राज परिवार में गणगौर पर्व की आठ पड़ गई, लेकिन तीज माता की पूजा और सवारी की परंपरा आज भी राजपरिवार में श्रद्धा से निभाई जाती है.
वह बताती हैं कि उस दौर में जयपुर की तीज माता की प्रतिमा असली सोने की थी और वही प्रतिमा आज भी बूंदी में विराजमान है. आज जयपुर में जो सवारी निकलती है, वह असली नहीं है, वह सिर्फ परंपरा को जीवित रखने के लिए है. उन्होंने कहा कि पहले तीज की सवारी किले और रावले (राजमहल) से निकलती थी और पूरा शहर उमड़ पड़ता था. छतों पर भीड़, ढोल-नगाड़ों की गूंज और पुष्पवर्षा के साथ तीज माता नगर भ्रमण करती थीं. अब यह जिम्मेदारी नगर परिषद निभा रही है, लेकिन उत्सव का शाही अंदाज आज भी जीवंत है. उन्होंने कहा कि तीज देवी पार्वती की भक्ति और स्त्री के समर्पण का पर्व है. यह महिलाओं के निस्वार्थ प्रेम और पति की दीर्घायु की कामना का प्रतीक है.
1947 में अंतिम बार निकाली शाही सवारी : बलभद्र सिंह ने बताया कि बूंदी राजपरिवार की ओर से वर्ष 1947 में बूंदी के अंतिम शासक महाराव कर्नल बहादुर सिंह की ओर से अंतिम बार शहर में तीज माता की शाही सवारी निकाली गई थी. इसके बाद से राजपरिवार की परंपरा की जिम्मेदारी सरकारी स्तर पर यानी नगर परिषद के जिम्मे आ गई. तब से अब तक शहर में दो दिन तीज माता की सवारी शाही ठाठ बाट से निकाली जाती है. सामाजिक कार्यकर्ता पुरुषोत्तम पारीक बताते हैं कि कजली तीज भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है. ये बूंदी में सिर्फ पूजा नहीं, इतिहास का गर्व भी है. यह त्योहार नारी शक्ति, प्रेम और राजसी शान का संगम है. यह परंपरा यह साबित करती है कि बूंदी में तीज सिर्फ त्योहार नहीं, आत्म गौरव और ऐतिहासिक विरासत है.
तीज मेला इस बार भव्य और ऐतिहासिक होगा : कजली तीज मेले को लेकर नगर परिषद सभापति सरोज अग्रवाल ने बताया कि बूंदी का ऐतिहासिक कजली तीज मेला 12 अगस्त से 26 अगस्त तक आयोजित किया जा रहा है. हमारा प्रयास है कि इस वर्ष कजली तीज मेला भव्य, व्यवस्थित एवं ऐतिहासिक बने. इसके लिए दो माह से मेला स्थल को नए नक्शे के साथ तैयार करने का कार्य किया गया है. उन्होंने बताया कि इस बार मेला ग्राउंड में रोड बनाकर व जीएसबी डालकर रोलर से पूरे ग्राउंड को समतल करने का कार्य किया गया है. साथ ही मेले में पानी का भराव न हो, इसके लिए नाली निर्माण कार्य किया गया है. मेले में आयोजित होने वाले समस्त कार्यक्रम और झूले, चकरी, पार्किंग, तहबाजारी आदि के कार्य टेंडर के माध्यम से करवाए गए हैं. टेंडर समस्त निविदादाताओं के समक्ष खोले गए और पूर्ण पारदर्शिता से कार्य करवाए गए हैं. मेले के दौरान प्राप्त होने वाला राजस्व इस वर्ष पूर्व की तुलना में लगभग 2.5 गुना प्राप्त होने का अनुमान है.
पूरे 15 दिनों तक होंगे आयोजन : नगर परिषद आयुक्त धर्मेंद्र कुमार मीणा ने बताया कि 12 व 13 अगस्त को कजली तीज माता की सवारी निकाली जाएगी. वहीं, 13 अगस्त को अलगोजा कार्यक्रम होगा. 14 अगस्त को सांस्कृतिक कार्यक्रम, 15 अगस्त को देशभक्ति कार्यक्रम (ऑपरेशन सिंदूर), 16 अगस्त को जन्माष्टमी महोत्सव एवं भजन संध्या, 17 अगस्त को पर्यटन विभाग द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम, 18 अगस्त को राजस्थानी कवि सम्मेलन, 19 अगस्त को सांस्कृतिक कार्यक्रम व 20 अगस्त को स्कूली बच्चों का कार्यक्रम होगा. इसी तरह 21 अगस्त को कव्वाली मुकाबला, 22 अगस्त को बॉलीवुड नाइट, 23 अगस्त को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, 24 अगस्त को रंगीला राजस्थान नाइट, 25 अगस्त को स्टार नाइट व 26 अगस्त को पुरस्कार वितरण, समापन समारोह एवं बूंदी के सितारों की ओर से संगीत संध्या से मेले का समापन होगा.




















