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कुत्तों के काटने से सिर्फ रैबीज नहीं, इन बीमारियों का भी रहता है खतरा

लगभग रोजाना किसी न किसी आवारा कुत्ते के लोगों को काटने की खबर हम सुनते रहते हैं.कभी किसी कुत्ते ने किसी इंसान या बच्चों पर हमला कर दिया, कभी किसी आवारा कुत्ते को खाना खिलाने को लेकर लोग आपस में मार-पीटाई पर उतर जा रहे हैं. पिछले दिनों कई ऐसी खबरें भी आईं जिनमें आवारा कुत्ते के काटने से कई लोगों की मौत (अलग-अलग मामलों में) भी हो गई. आवारा कुत्तों के सबसे अधिक शिकार छोटे बच्चे बन रहे हैं. इसके अलावा कई तरह की बीमारियां भी कुत्ते के काटने से हो जाती है.

इन्ही सब मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि दिल्ली एनसीआर के सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शैल्टर होम्स में शिफ्ट किया जाए. कोर्ट ने कहा लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ये फैसला लिया गया है. जिसका सख्ती से पालन करने का आदेश भी है. कोर्ट के इस फैसले को लेकर काफी लोग खुश भी है क्योंकि सड़कों पर घूमने वाले आवारा कुत्तों को किसी भी प्रकार की वैक्सीन नहीं लगाई जाती. फिर कोई इंसान इन कुत्तों का शिकार बनते हैं तो रैबीज जैसी जानलेवा बीमारी से जूझना पड़ता है.

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कुत्तों के काटने से सबसे पहले जो बीमारी सबसे ज्यादा होती है वो है रैबीज, इस बीमारी का टीका न लगे तो ये जानलेवा साबित हो सकती है. बीते दिनों एक खिलाड़ी की मौत भी रैबीज के कारण हुई है. हालांकि कुत्तों के काटने से सिर्फ रैबीज नहीं बल्कि कुछ ऐसी बीमारियों भी होती हैं जो काफी खतरनाक हैं.

पस (प्यूरुलेंट) संक्रमण और बैक्टीरिया

जस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के डॉ. एनआर रावत बताते हैं कि कुत्ते के काटने से जो चोट लगती है, उसके जरिए कुत्ते के शरीर का एक बैक्टीरिया पीड़ित व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता हैं. इस बैक्टीरिया का नाम है Capnocytophaga canimorsus. ये बैक्टीरिया उन लोगों में अधिक घातक होता है जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है जैसे- बुजुर्ग, डायबिटीज या कैंसर के मरीज.ये बैक्टीरिया शरीर में संक्रमण फैलता है जिससे गंभीर लक्षण होते है जैसे- चोट लगने या काटने की जगह पर पस पड़ने के साथ सूजन और स्किन लाल होने लगती है. समय पर इलाज न मिलने पर ये संक्रमण घातक हो सकता है.

सेप्सिस (Sepsis)

अगर कुत्ते के काटे हुए कट को अच्छी तरह साफ न किया हो या समय पर डॉक्टर को न दिखाया जाए तो बैक्टीरिया आपकी खून की धमनियों में भी फैल सकता है जिससे सेप्सिस हो जाता है. यह स्थिति बूँद-बूँद खून खत्म होने, आर्टरी ब्लॉक होने और ऑर्गन फेल्योर जैसे संकट खड़े कर सकती है. यहां वजह किसी सामान्य कट की तरह नहीं, इसमें जानलेवा खतरा हो जाता है.

कैसे सुरक्षित रहें?

  • किसी भी डॉग-बाइट को हल्के में न लें. मेडिकल उपचार के साथ काटे हुए अंग की साफ-सफाई ज़रूर करें.
  • कट लग जाए तो तुरंत साफ-पानी और साबुन से कची हुई जगह को धो दें.
  • कोई लालिमा, पस या सूजन दिखे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.
  • टिटनेस वैक्सीन अगर समय-सीमित हो जाए तो उसकी बूस्टर लेना न भूलें.
  • डॉग-बाइट के आसपास जलन, बुखार या कमजोरी जैसे लक्षण दिखें तो इन्हें सेप्सिस की चेतावनी समझें.

Dog Bite को ‘छोटा हादसा’ समझकर भूलने की भूल न करें

डॉग बाइट को सिर्फ ‘छोटा हादसा’ समझकर भूलने की भूल न करें. खासकर थर्ड बीमारी सेप्सिस को समझना ज़रूरी है. यहां कुत्तों के व्यवहार को समझना भी जरूरी है कि वो इंसानों पर हमला क्यों करते हैं या फिर स्ट्रे-डॉग इनते अग्रेसिव क्यों हो जाते हैं. आपको बता दें कि आमतौर पर पालतू कुत्तों को ट्रैनिक दी जाती है की कब किसपर अटैक करना है या फिर पालतू कुत्ते को यह अंदाजा रहता है कि उनसे गलती हो गई है और वो पीछे हट जाते हैं. लेकिन स्ट्रे-डॉग शिकारी प्रवृति वाले होेते हैं जो हल्का सा खतरा दिखने पर ही अटैक कर देते हैं. इसके अलावा पालतू कुत्तों को वैक्सीन लगी होती है जबकि स्ट्रे डॉग वैक्सीनेटेड नहीं होते हैं तो इनके काटने से बीमारी होने का खतरा अधिक होता है जैसे रैबीज या सेप्सिस जैसी बीमारियों का.

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