जयपुरः हर साल 12 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है. भारत में युवाओं की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है. यही भारत की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है, लेकिन बीते कुछ वर्षों में युवाओं की सेहत पर बिगड़ रही है और इसका कारण है गैजेट्स पर बढ़ती निर्भरता.
इसके कारण युवा रीढ़, कमर और गर्दन से जुड़ी समस्याओं से ग्रस्त हो रहे हैं. सवाई मानसिंह अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉक्टर अचल शर्मा का कहना है कि पिछले कुछ सालों में मोबाइल फोन और लैपटॉप के लगातार इस्तेमाल ने युवाओं की जीवनशैली को बदल दिया है. इसके कारण कई बीमारियों से युवा ग्रस्त हो रहे हैं.
युवा इन बीमारियों से हो रहे ग्रस्तः डॉक्टर अचल शर्मा के मुताबिक आमतौर पर लोगो में 50 वर्ष के बाद रीढ़, कमर और गर्दन की समस्या देखने को मिलती है, लेकिन अब युवा इन बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं. इसका कारण तकनीक पर बढ़ती निर्भरता, गलत बैठने की आदतें और शारीरिक गतिविधियों में कमी है. घंटों तक स्क्रीन के सामने बैठना, गर्दन को नीचे झुकाकर मोबाइल देखना और कंधों को आगे की ओर मोड़कर काम करना, ये सब मिलकर रीढ़ की हड्डी पर दबाव डालते हैं.
कोविड के बाद मामलों में तेजीः चिकित्सको का कहना है कि कोविड-19 के दौरान वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन पढ़ाई ने स्क्रीन टाइम को कई गुना बढ़ा दिया. इसका असर सेहत पर भी दिखाई दे रहा है. लॉकडाउन के दौरान लोग मोबाइल और लैपटॉप के साथ अधिक समय बिताने लगे जो अभी तक जारी है. डॉक्टर शर्मा का कहना है कि गैजेट्स के उपयोग के कारण रीढ़ की हड्डी में समस्या के मामले सबसे अधिक बढे़ हैं. इसका मुख्य कारण लंबे समय तक शरीर को एक ही मुद्रा में रखना है.
SMS अस्पताल में बढ़ रहे मरीजः डॉक्टर अचल शर्मा का कहना है कि SMS अस्पताल की ओपीडी में इन समस्याओं से जूझ रहे युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है. डॉक्टरों का कहना है कि 25 से 35 साल के बीच के हर चौथे या पांचवें युवा को कमर दर्द, गर्दन में अकड़न या रीढ़ की हड्डी में दर्द की शिकायत है. ये समस्याएं पहले मध्यम आयु वर्ग या बुजुर्गों में आम थीं, लेकिन अब युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं.
व्यायाम जरुरीः चिकित्सकों का कहना है कि डिजिटल दुनिया से जुड़े रहना जरुरी है, लेकिन सही जीवनशैली अपनाकर और शरीर की देखभाल करके ही स्वस्थ रहा जा सकता है. अगर इन समस्याओं पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो रीढ़ स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है. समय पर इलाज, सही बैठने का तरीका अपनाना, रोज़ाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम और स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है.




















