जैसलमेर: रक्षाबंधन का पर्व हर साल भाई-बहन के अटूट रिश्ते का जश्न होता है, लेकिन इस बार जैसलमेर की तपती रेत पर इसकी तस्वीर कुछ अलग थी. भारत-पाक सीमा पर तैनात महिला BSF जवानों ने अपने साथ ड्यूटी कर रहे पुरुष जवानों की कलाइयों पर राखी बांधी. उन्होंने तिलक किया, मिठाई खिलाई और आंखों में वही स्नेह था, जो घर की बहनों की आंखों में होता है. फर्क बस इतना था कि इस डोर में खून का रिश्ता नहीं, बल्कि मातृभूमि के लिए निःस्वार्थ प्रेम और कर्तव्य की भावना बंधी थी.
तपते रेगिस्तान में त्योहार का जज्बा: तनोट, किशनगढ़, लोंगेवाला, सम और शाहगढ़ जैसे इलाकों में रेत के अनंत विस्तार के बीच जवानों ने राखी का पर्व मनाया. गर्म हवाओं और तेज धूप के बावजूद, चेहरे पर मुस्कान थी. एक महिला जवान ने कहा, “हमारी ड्यूटी ही हमारी पूजा है, लेकिन राखी हमें यह एहसास दिलाती है कि हम सिर्फ बॉर्डर के प्रहरी नहीं, बल्कि इस देश के हर घर की सुरक्षा के वचनबद्ध भाई-बहन हैं.”
BSF ने बनाया त्योहार को खास: BSF राजस्थान फ्रंटियर की ओर से हर पोस्ट पर मिठाई, रंगीन राखियां और त्योहार की सामग्री पहुंचाई गई. यह सुनिश्चित किया गया कि हर जवान, चाहे वह रेगिस्तान के सबसे दूरस्थ चौकी पर हो, उसे त्योहार का एहसास मिले. कई पोस्टों पर DIG स्तर के अधिकारी खुद पहुंचे. उन्होंने भी महिला जवानों से राखी बंधवाई और अपने अधीनस्थों को भाई की तरह आशीर्वाद और वचन दिए. BSF के एक कमांडेंट ने कहा, “हमारे लिए राखी केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत है. यह हमें याद दिलाती है कि हमारी जिम्मेदारी केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि इस देश के हर नागरिक की मुस्कुराहट और चैन की नींद से भी जुड़ी हुई है.”
त्योहार और सुरक्षा दोनों साथ: रक्षाबंधन के उत्सव में चौकसी में कोई कमी नहीं आई, जब एक टीम राखी मना रही थी, दूसरी टीम अपनी पोस्ट पर हथियारों के साथ सतर्क खड़ी थी. कुछ पोस्टों पर भजन-कीर्तन की धुन गूंज रही थी, तो कहीं देशभक्ति गीतों ने माहौल को और भावपूर्ण बना दिया. एक जवान ने मुस्कुराते हुए कहा, “जब बहन राखी बांधती है, तो यह सिर्फ एक रस्म नहीं रहती. यह हमें याद दिलाती है कि हमारी ड्यूटी केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि व्रत है, जो आखिरी सांस तक निभाना है.”
बच्चों का तोहफा, सैनिकों की मुस्कान: जैसलमेर के स्कूलों और सामाजिक संस्थाओं ने इस रक्षाबंधन को खास बनाने में अपनी भूमिका निभाई. बच्चों ने रंग-बिरंगी राखियां बनाई, शुभकामनाओं से भरे पत्र लिखे और पोस्ट ऑफिस के जरिए बॉर्डर पोस्टों पर भेजे, जब जवानों ने इन्हें खोला, तो चेहरे पर अनमोल मुस्कान थी. एक बीएसएफ जवान ने कहा, “इन राखियों में घर की खुशबू है, जब तक ये हमारे हाथ में बंधी रहती हैं, हमें लगता है कि पूरा देश हमारे साथ खड़ा है. कोई दुश्मन इस डोर को तोड़ नहीं सकता.” सीमा पर तैनात जवानों के लिए राखी अब केवल रिश्तों का प्रतीक नहीं, बल्कि कर्तव्य, त्याग और निष्ठा का संदेश है. जैसलमेर की सीमा पर इस बार का रक्षाबंधन एक गूंज बन गया, जिसमें बहन की चिंता, भाई का वचन और देश की मिट्टी की महक एक साथ घुली हुई है.




















