बाड़मेर: भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व 9 अगस्त को मनाया जाएगा. देश की सरहद की हिफाजत में तैनात सेना के जवानों के हाथों की कलाई सुनी ना रहे, इसलिए सरहदी बाड़मेर की बेटियों ने अपने हाथों से राखी बनाकर जवानों के लिए भेजी है. इतना ही नहीं इसके साथ इन बेटियों ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर उनके जज्बे को सलाम भी किया है.
शहर के अंतरी देवी राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में अध्यनरत बालिकाओं ने अपने हाथों से तिरंगे की थीम सहित अलग-अलग तरह की राखियां बनाई हैं. शुक्रवार को इन राखियों को एक बॉक्स में पैक कर सरहद पर तैनात फौजी भाइयों के लिए भेजा गया है. छात्रा गरिमा खत्री ने बताया कि फौजी भाइयों के लिए राखी बनाने के लिए विद्यालय की ओर से कहा गया था. जिस पर हम सभी बहनों ने अपने फौजी भाइयों के लिए अपने हाथों से राखियां बनाई हैं. जो फौजी रक्षाबंधन पर अपने घर नहीं जा पा रहे हैं, उनके लिए ये राखियां भेजी हैं. साथ ही ऑपरेशन सिंदूर में उनकी बहादुरी को लेकर पत्र भी भेजा है.
सैनिकों से है सीमाएं सुरक्षित: गरिमा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की ओर से ड्रोन छोड़े जा रहे थे, उन्हें सेना ने जवानों ने आसमान में ही ध्वस्त कर दिया. सैनिकों के चलते हमें किसी तरह की कोई चिंता नही थी और हम अपने घर में बड़े आराम से थे. छात्रा हर्षिता सोनी ने बताया कि अपने हाथों से फौजी भाइयों के लिए राखी बनाई है और साथ ही उन्हें पत्र भी लिखा. रक्षाबंधन के पर्व पर फौजी भाइयों के हाथों की कलाई सुनी ना रहे, इसलिए हमने राखियां भिजवाई हैं.
प्रधानाचार्य अनीता चौधरी ने बताया कि हर साल विद्यालय की ओर से फौजी भाइयों के लिए राखियां भेजी जाती हैं. विद्यालय की बालिकाओं ने राखियां बनाई हैं. इसके साथ ही खत भी लिखे हैं. जिनमें बालिकाओं ने अपने-अपने मन की भावनाओं को प्रकट किया है. उन्होंने बताया कि बालिकाओं द्वारा बनाई गई इन सैकड़ों राखियों को बॉक्स में पैक करके आज भिजवाया गया है ताकि रक्षाबंधन के पर्व पर फौजी भाइयों की कलाई सूनी ना रहे.




















