जयपुर: राजधानी में रक्षाबंधन पर्व से पहले ही त्यौहार की रंगत राजनीतिक और सामाजिक आयोजनों में नजर आने लगी है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पूरे पखवाड़े हर वर्ग की महिलाओं से राखी बंधवाकर यह पर्व मना रहे हैं. इसी क्रम में हवा महल विधानसभा के विधायक बालमुकुंद आचार्य ने शुक्रवार को स्कूली छात्राओं, बुजुर्ग महिलाओं और युवतियों के साथ रक्षाबंधन मनाया. इस अवसर पर उन्होंने रक्षा सूत्र बंधवाते हुए महिलाओं की सुरक्षा का संकल्प लिया और समाज में सजग रहने का संदेश दिया.
महिलाओं से सीधी अपील: जयपुर के एक निजी होटल में आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं और महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया. आचार्य ने राखी बंधवाने के बाद महिलाओं को उपहार दिए और उनसे आग्रह किया कि वे किसी भी बहकावे या लालच में न आएं. उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में पारिवारिक मूल्यों का विशेष महत्व है, और युवाओं को इन्हें अपनाना चाहिए. आचार्य ने महिलाओं को विश्वास दिलाया कि राज्य सरकार उनकी सुरक्षा, सेवा और सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि समाज में हर महिला को नारी शक्ति के रूप में सम्मानित किया जाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर सरकार एवं समाज दोनों उनके साथ खड़े हैं.
स्वच्छता और आत्मनिर्भरता का संदेश: वहीं, ग्रेटर नगर निगम में भी रक्षाबंधन का आयोजन हुआ. महापौर सौम्या गुर्जर ने ट्रिपल आर सेंटर में बनी राखियों को स्वच्छता योद्धाओं को बांधते हुए ‘स्वच्छता बंधन’ अभियान की शुरुआत की. उन्होंने अपील की कि शहरवासी वेस्ट जनरेटर के बजाय रीसायकलर बनें. कार्यक्रम में स्वच्छता योद्धाओं ने जयपुर को स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर स्थान दिलाने का संकल्प लिया. ट्रिपल आर में बनी राखियों को प्रधानमंत्री को भी भेजा गया.
महापौर ने बताया कि भविष्य में इस सेंटर पर और उत्पाद तैयार होंगे और अधिक महिलाओं को इस मुहिम से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाएगा. महापौर ने पुलिस कर्मियों, पार्षदों और एनजीओ की महिला सदस्यों को भी रक्षा सूत्र बांधे. एनजीओ की महिलाओं ने महापौर को भाई मानते हुए राखी बांधी. इस मौके पर सभी ने रक्षाबंधन को केवल भाई-बहन का पर्व नहीं बल्कि सामाजिक एकजुटता और सहयोग का प्रतीक बताया.
वहीं, शुक्रवार को उदयपुर कन्हैया लाल हत्याकांड पर बनी फिल्म भी रिलीज हुई. इस पर विधायक बालमुकुंद आचार्य ने बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जिस तरह कन्हैयालाल की जिहादियों ने निर्मम हत्या की, ये ठीक उसी तरह का केस है, जिस तरह से कश्मीर में आतंकवादियों ने धर्म पूछ कर मारा. इस तरह की घटना राजस्थान के उदयपुर भी हुई. कांग्रेस ने उन गुनहगारों को बचाने का काम किया. कन्हैयालाल ने अपनी सुरक्षा मांगी, लेकिन तत्कालीन सरकार और प्रशासन के कान पर जूं नहीं रेंगी और कन्हैया लाल की हत्या कर दी गई. उनकी सरकार गुनहगारों को फांसी की सजा दिलाने का प्रयास कर रहे हैं.




















