जयपुर: राजस्थान की सरकारी भर्तियों में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र से नौकरी हथियाने का खेल चल रहा है. एसओजी ने इस खेल की जांच की तो कई परतें खुल रही हैं. दिव्यांगता के फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर पति-पत्नी दोनों सरकारी नौकर बन गए. कहीं, भाई-बहन ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र से नौकरी हासिल कर ली. अब एसओजी इस पूरे मामले की गहनता से जांच में जुटी है.
पहले चरण में दिव्यांगता प्रमाण पत्र पेश कर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले 66 कर्मचारियों की विशेषज्ञ डॉक्टरों से मेडिकल जांच करवाने की कवायद की गई. हालांकि, एसओजी के अधिकारी खुद भी मान रहे हैं कि फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र से नौकरी पाने वालों का आंकड़ा कई गुना बढ़ने की आशंका है. प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद इस संबंध में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी. इसके साथ ही फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने वाले डॉक्टर्स पर भी एसओजी शिकंजा कसने की तैयारी में हैं.
डमी कैंडिडेट, फर्जी डिग्री के बाद सर्वाधिक शिकायतें: एसओजी के डीआईजी परिस देशमुख का कहना है कि राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के मामलों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया और हेल्पलाइन शुरू की तो बड़ी संख्या में शिकायतें आई हैं. डमी अभ्यर्थी बिठाकर परीक्षा पास करने और फर्जी डिग्री से नौकरी हासिल करने से जुड़ी शिकायतों के बाद सबसे ज्यादा शिकायतें फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र से नौकरी हासिल करने से जुड़ी आई. ऐसी सभी शिकायतों को इकठ्ठा कर प्रारंभिक जांच शुरू की गई.
पहले चरण में 66 चिह्नित, 24 प्रमाण पत्र फर्जी: उनका कहना है, एसओजी के एएसपी भवानी शंकर मीणा के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया. इस टीम ने पूरा रिकॉर्ड एकत्रित किया और पहले चरण के लिए 66 सरकारी कर्मचारियों को चिह्नित किया. सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टर्स का एक बोर्ड बनाकर ऐसे लोगों की दुबारा जांच करवाई गई. अब तक 29 लोगों की रिपोर्ट एसओजी को मिली है. इनमें से 24 लोगों के पहले जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र गलत साबित हुए हैं. सीधे शब्दों में ये दिव्यांग नहीं हैं, लेकिन दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाकर नौकरी हासिल की है.
प्रमाण पत्र बनाने वालों पर भी शिकंजा: वे बोले, अब यह भी पता लगाया जा रहा है कि यह प्रमाण पत्र जारी करने में किन-किन लोगों का हाथ था. पहले प्रमाण पत्र जारी करने में तय मानक और प्रोसेस का ध्यान रखा गया था या नहीं रखा गया. उन्होंने कहा कि इसमें जो भी दोषी पाए जाएंगे. उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी. प्रमाण पत्र पर जिन डॉक्टर्स के दस्तखत हैं. उनसे भी एसओजी ने पूछताछ की है. किसी डॉक्टर ने अपने कार्यकाल में प्रमाण पत्र जारी नहीं होने की बात कही है. किसी ने दस्तखत फर्जी होने की बात कही है. वे बोले, गहनता से जांच जारी है.
15 परीक्षाओं में 400 से ज्यादा श्रव्यबाधित: उन्होंने बताया कि प्रारंभिक तौर पर कर्मचारी चयन बोर्ड की 15 परीक्षाओं का रिकॉर्ड हासिल किया गया है. इनमें 404 लोग ऐसे हैं. जिन्होंने श्रव्यबाधित होने का प्रमाण पत्र दिया है. इसके साथ ही अन्य श्रेणी की दिव्यांगता के मामले अलग हैं. दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर सबसे ज्यादा नौकरी शिक्षा विभाग में दी गई हैं. उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा कभी बड़ा हो सकता है. इसकी तह तक जाने का प्रयास कर रहे हैं. इसके अलावा अन्य एजेंसियों की भर्ती परीक्षाओं में भी बड़ी संख्या में दिव्यांगता प्रमाण पत्र लगे हैं.
पांच-छह साल की परीक्षाओं की शिकायतें ज्यादा: उन्होंने कहा कि अब तक जिन कर्मचारियों की जांच की गई है. उनमें कुछ आपस में रिश्तेदार भी हैं. पति-पत्नी, भाई-बहन और भाई-भाई ने फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरियां हासिल की हैं. इनमें से कोई दो साल से सेवा में है तो कोई चार-पांच साल से नौकरी कर रहा है. उन्होंने कहा, एसओजी के पास परीक्षा का रिकॉर्ड है. लेकिन परिणाम जारी होने और नियुक्ति को लेकर अब दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं. उन्होंने कहा, एसओजी के पास इसे लेकर जो भी शिकायतें आई हैं. उन्हें जांच में लिया गया है. ज्यादातर शिकायतें पिछले पांच-छह साल में नौकरी लगने वालों की हैं.
हर भर्ती में होता है दिव्यांग कोटा: आमतौर पर हर भर्ती परीक्षा में दिव्यांगों के लिए अलग कोटा होता है. इन पदों पर दिव्यांग अभ्यर्थियों का चयन किया जाता है. दिव्यांगता के आधार पर अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट मिलती है और उनकी अलग मेरिट बनती है. ऐसे में सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए कई शातिर फर्जी तरीके से दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाकर नौकरी लगे हैं. फिलहाल, एसओजी इस पूरे मामले की पड़ताल में जुटी है. गहराई से जांच में इस संबंध में कई और खुलासे होने की संभावना है.
फैक्ट फाइल:
- एसओजी को 100 से ज्यादा शिकायतें मिली हैं फर्जी प्रमाण पत्र से नौकरी हासिल करने की.
- राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की 15 परीक्षाओं में 400 से ज्यादा लोगों ने श्रव्यबाधिता के प्रमाण पत्र से हासिल की नौकरी.
- पहले चरण में 66 सरकारी कर्मचारियों को बुलाया मेडिकल जांच के लिए.
- अब तक 29 लोकसेवकों की रिपोर्ट एसओजी को मिली, जिनमें 24 के दिव्यांगता प्रमाण पत्र गलत.
- कई की रिपोर्ट आना बाकि और कई सरकारी कर्मचारी नहीं पहुंचे मेडिकल बोर्ड से जांच करवाने.
इस कैटेगरी में मिले फर्जी प्रमाण पत्र:
- एसओजी को मिली 29 कर्मचारियों की जांच रिपोर्ट में पांच के ही प्रमाण पत्र पाए गए सही.
- श्रव्यबाधित श्रेणी के सभी 13 कर्मचारियों के प्रमाण पत्र जांच में पाए गए गलत.
- दृष्टिबाधित 8 दिव्यांग कर्मचारियों में से 6 के प्रमाण पत्र जांच में गलत निकले हैं.
- लोकोमोटर व अन्य दिव्यांगता वाले 8 कर्मचारियों में से 5 के प्रमाण पत्र गलत पाए गए हैं.
- तीन सहायक प्राध्यापक, दो शिक्षक (ग्रेड-2), दस शिक्षक (ग्रेड-3), दो स्टेनोग्राफर और दो एएनएम के दिव्यांगता प्रमाण पत्र निकले गलत.
- एक-एक कनिष्ठ सहायक, ग्राम विकास अधिकारी, सूचना सहायक, संयुक्त निदेशक और सहायक प्रशासनिक अधिकारी का दिव्यांगता प्रमाण पत्र फर्जी.
- राजसमंद, करौली, बाड़मेर, बीकानेर, पाली, गंगानगर, बूंदी, अजमेर और जालौर जिले से एक-एक कर्मचारी हैं. जिनका प्रमाण पत्र गलत.
- जयपुर के तीन, भरतपुर के सात, डीडवान-कुचामन के दो और सिरोही के तीन कर्मचारी भी हैं एसओजी के राडार पर हैं.




















