बीकानेर : सनातन धर्म में रक्षाबंधन पर्व भाइयों के दीर्घायु होने व सुख समृद्धि की कामना के लिए मनाया जाता है. बहनें अपने भाइयों की सलामती के लिए रक्षा सूत्र बांधती है. भाई-बहन के अटूट रिश्ते के रूप में रक्षा बंधन पर्व मनाया जाता है. सावन मास की पूर्णिमा को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है. भाई और बहन के आपसी विश्वास और समर्पण का त्योहार रक्षाबंधन इस बार 9 अगस्त शनिवार को है और इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं है ऐसे में पूरे दिन यह पर्व मनाया जाएगा.
भाइयों की खुशहाली और बहन की रक्षा के संकल्प का पर्व : बीकानेर के पंचांगकर्ता पंडित राजेंद्र किराडू ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन के दिन भद्रा का साया नहीं है. ऐसे में पूरे दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा और दिन में कभी भी बहनें अपने भाइयों के रक्षा सूत्र बांध सकती हैं.
किराडू ने बताया कि बहनें अपने भाइयों के ललाट पर कुमकुम-अक्षत तिलक कर व मिठाई से मुंह मीठा करवाकर भाइयों के हाथों पर रक्षा सूत्र बांधती है. इस दौरान बहनें अपने भाइयों के दीर्घायु होने, सुख-समृद्धि और निरोग रहने की कामना करती है. वहीं भाई अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेते हैं.
धर्म शास्त्रों में बताया विशेष महत्व : पंडित राजेन्द्र किराडू के अनुसार सनातन धर्म में रक्षा बंधन पर्व का विशेष महत्व है. धर्मग्रंथों में रक्षा बंधन पर्व का विशेष महत्व बतलाया गया है. स्कन्द पुराण सहित पौराणिक मान्यताओं में रक्षा बंधन पर्व को विशेष बताया गया है. सावन पूर्णिमा के दिन रक्षा सूत्र बांधने की कई जानकारियां धर्मग्रंथों में उल्लेखित है.
कैसे हुई रक्षा बंधन पर्व की शुरुआत : किराडू कहते हैं कि स्कन्द पुराण के अनुसार देवासुर संग्राम के समय देवताओं के गुरु बृहस्पति ने इन्द्र की रक्षा के लिए सावन सुदी पूर्णिमा के दिन रक्षा सूत्र बांधा था. पौराणिक मान्यता अनुसार इसी दिन मां लक्ष्मी ने राजा बलि के अनुरोध पर उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था.
कब मनाएं रक्षा बंधन पर्व : किराडू कहते हैं कि शनिवार 9 अगस्त के दिन सूर्योदय के बाद सूर्यास्त से पूर्व रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा और पूरे दिन कभी भी बहनें भाइयों को रक्षा सूत्र बांध सकती है क्योंकि इस बार रक्षाबंधन के दिन पूर्णिमा पर भद्रा का साया नहीं है. भद्रा रात्रिकाल में ही उतर जाएगी.




















