उदयपुर: शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने गुरुवार को नगर निगम के टाउन हॉल में आयोजित राज्य स्तरीय संस्कृत विद्वत सम्मान समारोह में शिरकत की. इस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री सभी विषयों का ज्ञाता होगा, ऐसा कहीं नहीं लिखा है. साथ ही उन्होंने कहा कि वे इतिहासकार नहीं हैं. दरअसल, मीडिया ने जब शिक्षा मंत्री दिलावर से एनसीईआरटी की किताबों में राजस्थान को मराठा के अधीन बताने वाले नक्शे को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने कहा, ‘मैं इतिहासकार नहीं हूं.’ वहीं मीडिया ने जब ये कहा कि आप शिक्षा मंत्री हैं, तो उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री को सभी भाषाओं और किताबों का ज्ञान हो, ऐसा कहीं लिखा हुआ नहीं है.
‘चीन को समृद्ध नहीं करें’: दिलावर ने कहा कि चीन का सामान भारत में बहुत तेजी से बिकता है. लेकिन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाकिस्तान का सहयोग करने वाले चीन को हमें सहयोग नहीं करना चाहिए और हमें हमारे देश को कमजोर नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा कि मैंने यह कहा था कि हमारा देश आर्थिक दृष्टि से कमजोर ना हो. हमारे देश के लोगों को रोजगार मिले. इसके अलावा हमारे देश का पैसा बाहर न जाए. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान का चीन ने सहयोग किया था. हिंदुस्तान चीन के लिए बहुत बड़ा मार्केट है. उन्होंने कहा कि अगर मैं दूसरी भाषा में कहूं, तो हम ही समृद्ध कर रहे हैं. हम ही उन्हें समृद्ध करेंगे, तो हमारे देश का नुकसान होगा.
कैलाश चंद्र मूंदड़ा को संस्कृत साधना शिखर सम्मान: संस्कृत शिक्षा विभाग द्वारा संस्कृत दिवस पर राज्य स्तरीय विद्वत सम्मान समारोह-2025 आयोजित किया गया. इसमें मुख्य अतिथि प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी थे. जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने की. इस दौरान 1 लाख राशि का संस्कृत साधना शिखर सम्मान चित्तौड़गढ़ के कैलाश चंद्र मूंदड़ा को दिया गया. जबकि संस्कृत साधना सम्मान पुरस्कार प्रोफेसर वाई एस रमेश, जयपुर तथा प्रोफेसर डॉक्टर मूलचंद, चूरु को दिया गया. इस पुरस्कार में सम्मान स्वरूप दोनों को 51 हजार रुपए की राशि भेंट की. इसी प्रकार संस्कृत विद्वत सम्मान डॉ भगवती लाल सुखवाल, उदयपुर, डॉ नाथूलाल सुमन, जयपुर, डॉ लता श्रीमाली, जयपुर, चंद्रशेखर शर्मा, टोंक, मनीषी लालस, जयपुर, डॉ कौशल तिवारी, बारां और जयपुर के डॉ फिरोज को दिया गया.
कैलाश चंद मूंदड़ा का परिचय: कैलाश चंद मूंदड़ा संस्कृत के प्रख्यात विद्वान हैं. उन्हें 2025 में मेवाड़ विद्वत एवं प्रतिभा सम्मान समारोह समिति, चित्तौड़गढ़ द्वारा विद्वत रत्न सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है. उन्होंने वर्ष 2002 में श्री कल्लाजी वेदपीठ एवं शोध संस्थान की स्थापना की. वर्ष 2021 में ग्राम जावदा में संस्कृत प्रवेशिका विद्यालय की स्थापना की जो वर्तमान में वरिष्ठ उपाध्याय में कर्मोन्नत है. मूंदड़ा गौसेवार्थ गौशाला में 400 गायों की सेवा करते हैं. 67 वर्षीय कैलाश चंद्र मूंदड़ा का जन्म 23 सितंबर, 1957 को हुआ.




















