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पाठशाला की दीवारें दरकने लगीं, सरकारी स्कूल को घोषित किया गया ‘जीवन के लिए असुरक्षित’

जयपुर : एक समय नौनिहालों से गुलजार रहने वाला विद्याधर नगर सेक्टर-1 स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय आज वीरान हो चुका है. स्कूल की दरकती दीवारें और टपकती छतें अब बच्चों की खिलखिलाहट की जगह सन्नाटे को समेटे हुए हैं. झालावाड़ जिले के पीपलोदी गांव में हाल में हुए स्कूल हादसे के बाद राजधानी जयपुर में भी जर्जर स्कूल भवनों पर संज्ञान लिया जा रहा है, जिसके तहत विद्याधर नगर के इस सरकारी स्कूल को ‘जीवन के लिए असुरक्षित’ घोषित कर चेतावनी बोर्ड लगाया गया है.

नामांकन घटा : उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी के विधानसभा क्षेत्र राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की बिल्डिंग वर्ष 1981 में बनाई गई थी. आरोप है कि बीते 44 सालों से इसमें किसी प्रकार की मरम्मत नहीं हुई. परिणामस्वरूप दीवारों में दरारें आ गई हैं और छत से पानी रिसने लगा है, जिससे कक्षा-कक्षों तक पानी पहुंचता है. भवन की छतें केवल पट्टियों पर टिकी हुई हैं, जिनमें आरसीसी निर्माण तक नहीं किया गया. स्थानीय लोगों और स्कूल प्रशासन के अनुसार, स्कूल में वर्तमान में 180 छात्र और 9 शिक्षक कार्यरत हैं.

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छात्रों को किया गया शिफ्ट : स्कूल को असुरक्षित घोषित करने के बाद सभी छात्रों को किशनबाग स्थित प्राथमिक विद्यालय में शिफ्ट कर दिया गया है. ये फैसला भले ही छात्रों की सुरक्षा के लिहाज से उचित है, लेकिन इससे उनकी पढ़ाई और उपस्थिति पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है. स्कूल की इंचार्ज शिक्षिका निर्मला ने बताया कि फिलहाल स्कूल शिफ्ट कर दिया गया है. हालांकि, जर्जर भवन और मरम्मत के लिए बजट को लेकर वो कुछ भी कहने से बचती नजर आईं.
शिकायतों के बावजूद विभाग उदासीन : स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि उन्होंने कई बार निगम और शिक्षा विभाग को स्कूल की जर्जर स्थिति के बारे में अवगत कराया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. शिक्षकों ने भी लिखित में विभाग को पत्र भेजे, बावजूद इसके अनदेखी होती रही. बताया गया कि स्कूल के लिए बजट स्वीकृत हुआ था, लेकिन आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के चलते निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका. आखिरकार जब नगर निगम ने खुद भवन की स्थिति को खतरनाक पाया, तब जाकर खतने का साइन लगाने की कार्रवाई हुई.
ड्रॉपआउट और दुर्घटना का खतरा बढ़ा : अभिभावकों का मानना है कि अगर छात्रों को दूरस्थ स्कूलों में भेजा जाएगा तो न केवल दुर्घटना की आशंका बढ़ेगी, बल्कि नामांकन में कमी और ड्रॉपआउट रेट में भी इजाफा हो सकता है. छात्रों को सुरक्षित और समीपवर्ती शिक्षा उपलब्ध करवाना सरकार की जिम्मेदारी है.
जगदंबा कॉलोनी और आसपास के इलाकों के लोगों का कहना है कि ये स्कूल क्षेत्र के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. बच्चे पास के स्कूल में पढ़ते थे, अब उन्हें करीब एक किलोमीटर दूर भेजना पड़ेगा. ये न तो सुरक्षित है, न ही व्यावहारिक.
इस स्कूल सहित 170 तहसीलों के 7500 स्कूलों की मरम्मत के लिए 150 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. प्राथमिकता पर 1965 स्कूलों की मरम्मत के लिए बजट स्वीकृत कर दिया गया है.
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