झालावाड़: नगर परिषद में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के चलते सभापति संजय शुक्ला को उनके पद से निलंबित कर दिया गया है. यह फैसला स्वायत शासन विभाग के निदेशक जेपी शेखर द्वारा जारी आदेश के तहत लिया गया. इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत एक शिकायत के आधार पर हुई, जिसमें नगर परिषद के बाबू और एक दलाल को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों ACB ने गिरफ्तार किया. मामले की तह में जाने पर ACB ने खुलासा किया कि यह रिश्वत सभापति संजय शुक्ला के निर्देश पर ली जा रही थी.
DLB निदेशक का बड़ा फैसला: स्वायत शासन विभाग के निदेशक जेपी शेखर ने पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए संजय शुक्ला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. निदेशक के अनुसार, न्यायिक जांच के दौरान संजय शुक्ला का सभापति पद पर बने रहना जांच को प्रभावित कर सकता है. ऐसे में उन्हें न केवल सभापति के पद से बल्कि नगर परिषद के सदस्य के पद से भी निलंबित किया गया है. शेखर ने यह भी स्पष्ट किया कि शुक्ला ने अपनी पदीय हैसियत का दुरुपयोग किया, जो प्रतिकूल आचरण और व्यवहार की श्रेणी में आता है. विभाग ने पूरे मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं, जिससे दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.
भाजपा ने भी की कड़ी कार्रवाई: इस मामले पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी संजय शुक्ला को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से उन्हें हटाया जा सकता है. उन्हें नोटिस का जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है. भाजपा की इस सख्त कार्रवाई से यह संकेत मिलता है कि पार्टी भ्रष्टाचार के मामलों में अब कोई ढील देने के मूड में नहीं है. वहीं, नगर परिषद के आयुक्त नरेंद्र मीणा ने बताया कि एसीबी द्वारा गिरफ्तार किए गए बाबू आकाश क्लोसिया को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. निलंबन अवधि में उन्हें क्षेत्रीय कार्यालय कोटा में अटैच किया गया है. दलाल अजय कुमार की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है.
ACB की छापेमारी और गिरफ्तारी: सोमवार को ACB (एंटी करप्शन ब्यूरो) की टीम ने झालावाड़ शहर में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर परिषद के बाबू आकाश क्लोसिया और दलाल अजय कुमार को 30 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया. यह राशि एक परिवादी से ली जा रही थी, जिसने ACB को शिकायत दी थी कि भूमि कन्वर्जन पट्टे पर हस्ताक्षर के एवज में उससे 50 हजार रुपए की रिश्वत मांगी गई है. ACB एडिशनल एसपी प्रेरणा शेखावत ने बताया कि आरोपियों ने यह राशि सभापति संजय शुक्ला के कहने पर ली. प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि संजय शुक्ला पूरे प्रकरण में मुख्य सूत्रधार हैं. हालांकि, छापेमारी के समय शुक्ला मौके पर नहीं थे और अब तक फरार हैं.




















