जोधपुर: औद्योगिक क्षेत्रों के प्रदूषित जल से प्रदूषित हुई जोजरी नदी के किनारे बसे गांव मैलबा में लूणी जोजरी बचओ संघर्ष समिति की ओर से मंगलवार को प्रशासन व राजनेता इस प्रदूषित नदी के आस पास के गांवों की दुर्दशा सुधारने के लिए काम करें, इसको लेकर सदबुद्धि यज्ञ किया गया. जिसमें कांग्रेस नेता करण सिंह उचियारडा, लूणी के पूर्व विधायक महेंद्र सिंह विश्नोई सहित अन्य लोग शामिल हुए. संघर्ष समिति इसको लेकर बड़ा आंदोलन करेगी.
इधर लगातार गांवों में हो रही परेशानी का मामला तूल पकड़ते देख जोधपुर प्रशासन ने भी सक्रियता दिखाई है. संभागीय आयुक्त प्रतिभा सिंह के निर्देश पर जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल ने छह टीमों का गठन किया है, जो अवैध ओद्योगिक इकाई के खिलाफ कार्रवाई करने और प्रदूषित जल प्रवाहित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है.
32 इकाइयों में मिली खामियां : कलेक्टर गौरव अग्रवाल ने बताया कि इस अभियान के तहत 6 निगरानी टीमों का गठन किया गया, जिन्होंने रीको औद्योगिक क्षेत्र, विभिन्न टेक्सटाइल इकाइयों और एम्स जोधपुर परिसर का गहन निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान कुल 72 औद्योगिक इकाइयों का दौरा किया गया, जिनमें से 32 इकाइयों को गंभीर तकनीकी कमियों जैसे कि PETP की खराब स्थिति, SCADA इंटरलॉकिंग की अनुपस्थिति और अवैध बायपास लाइनों के चलते कारण बताओ नोटिस जारी किए गए. इन इकाइयों में पानी बिना उपचारित ही जा रहा है. प्रशासन की टीमों ने खेमा कुआं क्षेत्र में अवैध फेक्ट्रियां भी ध्वस्त की है.
यह है जोजरी नदी का इतिहास : जोजरी नदी का उद्गम नागौर जिले में होता है. बरसाती नदी लूनी की सहायक नदी है जो बालोतरा से आगे जाकर लूणी में मिलती है. इस बार मानसून में अच्छी बारिश हुई तो यहां पानी बहने लगा, लेकिन उसे पानी में भी प्रदूषित पानी आगे जाकर लूणी में मिल गया. जिसको लेकर बालोतरा जिले के लोगों ने काफी विरोध दर्ज करवाया. जोधपुर बालोतरा जिले में करीब 83 किमी यह नदी बहती है, लेकिन बरसात के बाद यह प्रदूषित पानी का नाला बन जाती है.
लूणी भी हुई प्रदूषित : लूणी नदी के भी हालत कमोबेश ऐसे ही हैं. मारवाड़ की मरु गंगा कहलाने वाली लूणी नदी और उसकी सहायक नदियां लंबे प्रदूषण और अतिक्रमण की चपेट में हैं. जिसके चलते नदी का असितत्व ही खतरे में आ गया है. एक दौर था जब लूणी नदी साल में आठ माह बहती थी, तो पूरे क्षेत्र में खेती और पीने के पानी की कमी नहीं रहती थी, लेकिन अब सिर्फ मानूसन के दौरान भारी बारिश होने पर ही प्रवाह दिखता है. उसके बाद इस नदी में फैक्ट्री नदी नालों से निकले रसायनिक पानी जगह जगह भर जाता हैं.
अजमेर के नाग पहाड़ से निकलने वाली यह नदी राजस्थान के कई जिलों से बहती हुए अजमेर से शुरू होने वाली यह नदी बाड़मेर के गांधव से होते हुए गुजरात में कच्छ के रण में समाप्त होती है. इसका बहाव क्षेत्र 500 किमी से ज्यादा है. आफरी ने इस नदी को सुधारने के लिए पौधारोपण का मॉडल सरकार को दिया है.
नए एसटीपी की जरूरत, सरकार ने बनाई डीपीआर : जोधपुर वैध व अवैध फैक्ट्रियां का दूषित पानी और नियिमत फैक्ट्रिज से तय सीमा से अधिक पानी बाहर जा रहा है. जो ट्रीटमेंट प्लांट लगे हैं उनको अपग्रेड करने की जरूरत है. जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक के लिए अपग्रेड होगा. हाल ही में मंत्री जोगाराम पटेल ने बताया था कि सरकार ने इस नदी के पुरुद्धार के लिए नए ड्रेनेज और सीवरेज प्लांट के लिए 176 करोड़ की लागत से काम होगा. इसकी डीपीआर तैयार हो गई है.
जोजरी पर भारी औद्योगिक विकास :
- नदी में 700 कारखाने का दूषित पानी डिस्चार्ज
- 300 वैध टेक्सटाइल फैक्ट्री का वेस्टेज नदी में
- 300 अवैध टेक्सटाइल फैक्ट्रियां छोड़ रही है रसायन
- 100 स्टील फैक्ट्री का तेजाब युक्त पानी भी नदी में
हर वर्ग हो रहा है प्रभावित :
- किसान को नहीं मिल रहा सिंचाई का पानी
- ग्रामीणों को नहीं मिल रहा है पेयजल
- 31 किलोमीटर की दूरी में प्रदूषित जोजरी का असर
- जोधपुर की 16 फीसदी आबादी प्रभावित
- कुंए के पानी में भी पहुंचा रसायन का असर
प्रशासन के निरीक्षण में सामने आईं अनियमितताएं :
- कई इकाइयों में SCADA प्रणाली को पंप से इंटरलॉक नहीं किया गया था, जिससे अपशिष्ट जल सीधे बहता पाया गया.
- अधिकांश इकाइयों के प्री-ट्रीटमेंट प्लांट्स (PETP) की स्थिति असंतोषजनक पाई गई.
- RIICO नालों में रंगीन गंदा पानी बहता मिला और कई स्थानों पर अवैध बायपास लाइनों की सक्रिय उपस्थिति दर्ज की गई.
- RIICO क्षेत्र में पाई गई 17 अवैध टेपिंग्स में से 16 को अब तक सीमेंट-कंक्रीट से बंद किया जा चुका है.




















