बूंदी : जिले के खनन क्षेत्रों बरड़, डाबी में बीते तीन दिनों से जारी सैंड स्टोन उद्योग की हड़ताल अब विकराल रूप लेती जा रही है. जिले के सैकड़ों स्टोन माइंस, ब्लॉक कटर मशीनें, गिट्टी क्रेशर, ट्रांसपोर्ट यूनिटें और स्टोन स्टॉक इकाइयां पूरी तरह बंद हो चुकी हैं. इसका सीधा असर 30,000 से अधिक मजदूरों और वाहन चालकों पर पड़ा है, जो अब बेरोजगारी के संकट से जूझ रहे हैं.
खनिज विभाग बूंदी के एमई सहदेव सारण ने बताया कि जो भी इनकी मांग हैं, उसका निस्तारण सरकार के स्तर पर ही होना है. हमारे हाथ में कुछ भी नहीं है. जहां तक रॉयल्टी बढ़ाने की बात है तो इस बार तो सरकार ने साढ़े चार साल में बढ़ाई है, जबकि नियम तो हर 3 साल में रॉयल्टी बढ़ाने का है. ये पिछले 50 सालों से अनवरत जारी है. कुछ नई टेक्नोलॉजी भी व्यापारियों के लिए परेशानी है, लेकिन जो सरकार स्तर पर नियम बनाए गए हैं उन्हें फॉलो तो करना ही पड़ेगा. मामला कोई एक क्षेत्र का नहीं पूरे राजस्थान का है. निर्णय सरकार को ही करना है.
हड़ताल और बरड़ क्षेत्र की स्थिति : बरड़ और डाबी क्षेत्र में खनन से जुड़े व्यापारियों और मजदूर संगठनों ने सरकार की असंगठित और कठोर खनन नीतियों, पर्यावरणीय अनुमति में देरी, खनन शुल्क की विसंगतियों और पट्टों के नवीनीकरण में अड़चनों को लेकर संगठित हड़ताल की घोषणा की थी. उनकी मांग है कि सरकार तत्काल संज्ञान लेकर नीतियों में बदलाव करें, वरना आंदोलन और व्यापक रूप लेगा.
बरड़ में करीब 600 सैंडस्टोन माइंस : जिले की सबसे बड़ी खनन पट्टी बरड़ में करीब 600 सैंडस्टोन माइंस हैं. इनमें से 300 के आसपास खदानें पहले ही बारिश और अन्य कारणों से बंद थीं, अब चालू माइंस भी बंद कर दी गई हैं. एक दर्जन से अधिक ब्लॉक कटर मशीनें, जो पत्थरों की चिराई करती हैं, पूरी तरह बंद हैं. हजारों कुशल कारीगर, जो इन मशीनों पर काम करते थे, रोज़गार से वंचित हैं.
डाबी क्षेत्र की स्थिति : डाबी में करीब 500 पत्थर स्टॉक हैं, जिन पर पट्टी और पर्सी निर्माण का कार्य होता है. यहां करीब 12 गिट्टी क्रेशर भी संचालित होते थे, लेकिन हड़ताल के चलते कार्य बंद हो गया है. पूरे बरड़ डाबी क्षेत्र में खनिज ढुलाई में लगे 2000 से अधिक ट्रेलर, डंपर, लोडर और ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़े हैं. इनसे जुड़े ड्राइवर, खलासी और ऑपरेटर भी बेरोजगार हो गए हैं.
झालावाड़ में भी मिनी सचिवालय पर प्रदर्शन : जिले के क्रेशर संचालकों ने प्रदेश सरकार की ओर से 25% रॉयल्टी में व्रद्धि, जुर्माना प्रणाली में पारदर्शिता, क्रेशर को उद्योग का दर्जा दिए जाने को लेकर मिनी सचिवालय पर प्रदर्शन किया. इस दौरान क्रेशर संचालक एसोसिएशंस के पदाधिकारी की ओर से मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया. एसोसिएशन के अध्यक्ष शैलेंद्र यादव ने बताया कि प्रदेश सरकार ने क्रेशर संचालकों पर अचानक रॉयल्टी में बेतहाशा वृद्धि की है, जिसके चलते संचालकों पर अतिरिक्त आर्थिक भार बढ़ा है. ऐसे में विभिन्न मांगों को लेकर क्रेशर संचालक 2 अगस्त से हड़ताल पर हैं.




















