बूंदी : सावन माह भगवान शिव को अतिप्रिय है. इस माह में भक्त भोलेनाथ की अराधना करते हैं. देश-प्रदेश में कई अनोखे शिव मंदिर हैं, जिनकी विशेष मान्यताएं हैं. सावन के सोमवार पर ईटीवी भारत पर पढ़िए बूंदी जिले में स्थित भीमलत महादेव मंदिर के बारे में. ये मंदिर जिले से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित है, जिसका उल्लेख केवल आधुनिक धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें महाभारत काल से जुड़ी हैं.
मंदिर में वर्षों से सेवा-पूजा करते आ रहे पुजारी सत्यनारायण गोस्वामी बताते हैं कि पांडवों के वनवास काल के दौरान यह क्षेत्र उनके निवास और भ्रमण का हिस्सा था. मझले पांडव भीमसेन परम शिव भक्त माने जाते हैं. उनकी एक विशेष आदत थी कि जब तक वे भगवान शिव की पूजा नहीं कर लेते थे, तब तक वे अन्न का एक दाना तक ग्रहण नहीं करते थे. किंवदंती है कि अज्ञातवास के दौरान माता कुंती को प्यास लगने पर भीम ने जमीन पर लात मारकर पानी निकाला था. हालांकि, माता ने पैर के लगे जल को ग्रहण करने से मना कर दिया था. इसके बाद इसी क्षेत्र में भीमसेन ने एक दिव्य शिवलिंग की स्थापना की और गहन तपस्या कर भगवान आशुतोष को प्रसन्न किया था. उनकी पूजा से प्रसन्न होकर गंगा जी की धारा स्वयं प्रकट हुईं और वह आज भी अनवरत शिवलिंग पर जलाभिषेक कर रही हैं.
प्राचीन शिवलिंग, पांडवों की छाया : पत्थरों से बनी एक ढलान के रास्ते नीचे उतरते ही घाटी के बीचों-बीच गूंजती है झरने की आवाज और दिखता है भगवान शिव का प्राचीन मंदिर. मंदिर पुजारी बताते हैं कि मान्यता है कि ये शिवलिंग स्वयं भीमसेन ने महाभारत के समय स्थापित किया था. भीमलत महादेव मंदिर में स्थित शिवलिंग को महाभारत कालीन माना जाता है. मंदिर का निर्माण शैली स्थानीय पत्थरों से हुआ है, जो इसे प्राकृतिक सौंदर्य से जोड़ता है. श्रद्धालु यहां सुबह-शाम पूजा-अर्चना करते हैं. खास बात यह है कि किसी भी मौसम में चाहे सूखा हो या अत्यधिक वर्षा यह जलधारा कभी नहीं रुकती है. दूर-दराज से श्रद्धालु आते हैं और इस स्थान को ‘राजस्थान की छोटी गंगोत्री’ कहते हैं.
चट्टानों पर आज भी मौजूद हैं पांडवों के निशान : बूंदी जिले की सुरम्य पहाड़ियों के बीच स्थित भीमलत महादेव न केवल एक आध्यात्मिक केंद्र है, बल्कि यह स्थान पौराणिक काल की अमिट छाप भी समेटे हुए है. स्थानीय ग्रामीण शिव प्रकाश पंचोली (उम्र 50 वर्ष) बताते हैं कि उन्होंने जब से होश संभाला है, तब से वे निरंतर भीमलत महादेव के दर्शन करने आ रहे हैं. पंचोली कहते हैं कि यहां हर वो श्रद्धालु आता है, जिसकी कोई मुराद होती है. मान्यता है कि महादेव सबकी मनोकामना पूरी करते हैं.
विशाल जलप्रपात, प्रकृति का अद्भुत उपहार : पुजारी सत्यनारायण गोस्वामी बताते हैं कि भीमलत महादेव का प्राकृतिक जलप्रपात राजस्थान में अद्वितीय है. मानसून के मौसम में यह झरना 150 फीट तक ऊंचाई से गिरता है और उसका गर्जन आसपास के गांवों तक सुनाई देता है. इसका अद्भुत दृश्य सैलानियों और श्रद्धालुओं दोनों के लिए समान रूप से आकर्षण का केंद्र है. भीमलत महादेव ऐसा स्थल है, जहां श्रद्धा और प्रकृति एक साथ प्रकट होती हैं. एक ओर भगवान शिव की महिमा, दूसरी ओर गंगा जल की अविरल धारा, दोनों मिलकर इसे एक अद्वितीय स्थान बनाते हैं. यहां आकर व्यक्ति केवल दर्शक नहीं, एक अनुभवकर्ता बन जाता है. यह स्थल न केवल पूजा-अर्चना के लिए उपयुक्त है, बल्कि मन को शांति देने वाला एक नैसर्गिक तीर्थ भी है.
भीमलत महादेव कोई आम धार्मिक स्थल नहीं : ग्रामीण भगवान सिंह सोलंकी ने बताया कि हर वर्ष शिवरात्रि, सावन और अन्य पर्वों पर यहां दर्शन करने आते हैं. भीमलत महादेव कोई आम धार्मिक स्थल नहीं है. यह एक ऐसा स्थान है जहां किंवदंती, भक्ति और प्राकृतिक चमत्कार एक साथ जीवंत होते हैं. हर साल हजारों पर्यटक विशेषकर मानसून में इस स्थान पर आकर इसके नैसर्गिक सौंदर्य और धार्मिक महत्व से अभिभूत होते हैं. राजस्थान टूरिज्म की ओर से इस स्थान को एक संभावित ‘प्राकृतिक तीर्थ’ स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास जारी है




















