जयपुर: गुलाबी नगरी का परकोटा भले ही आज भी अपना इतिहास बयां करता हो, लेकिन इस चारदीवारी के अंदर कई भवनों की दीवारें अब खतरे की दीवार बन चुकी हैं. वर्षों पुरानी जर्जर इमारतों को अब जीर्णोद्धार की जरूरत है. हेरिटेज नगर निगम ने मानसून के इस संवेदनशील दौर में सख्त रुख अपनाते ऐसी इमारतों को नोटिस दिया है. जिन मकान मालिकों की ओर से जीर्णोद्धार का कार्य नहीं कराया जाएगा, उन पर निगम बुलडोजर चलाएगा.
हेरिटेज नगर निगम की कमिश्नर निधि पटेल ने बताया कि निगम क्षेत्र में सभी जर्जर इमारतों का निरीक्षण करवा लिया है. एडिशनल कमिश्नर की अध्यक्षता में टीम गठित की थी. उस टीम ने सभी जर्जर इमारत को मौके पर निरीक्षण किया. वहां फिलहाल नोटिस चस्पा किए गए हैं. इसके साथ ही मकान मालिक और वहां रह रहे किराएदारों को अवगत करा दिया गया है कि यह इमारत अब रहने लायक नहीं है, उन्हें तुरंत खाली कर देना चाहिए. मानसून को देखते हुए उनसे एक बार और समझाइश की जा रही है. उन्होंने कहा कि ऐसी कुछ इमारतें हैं, जिन्हें तुरंत ठीक करने की जरूरत है. कुछ में मकान मालिक स्तर पर काम शुरू भी करवा दिया गया है. यदि नियमों के तहत मकान मालिक काम नहीं करता है तो ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी.
मालूम हो, परकोटे में इतिहास की गवाही दे रही कुछ इमारतें अब आमजन के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं. दरअसल, ये वो इमाारते हैं, जो किसी वक्त जयपुरवासियों का घरौंदा होती थी, लेकिन आज जर्जर हालात में कुछ खाली पड़े हैं तो कुछ में किराएदार रह रहे हैं. ये भवन किसी भी वक्त जमींदोज हो सकते हैं. ऐसे में अब नगर निगम ने इन इमारतों को चिह्नित करते हुए नोटिस दिए हैं. इनमें जिन भवनों के मकान मालिक जीर्णोद्धार कर लेंगे, उन्हें सूची से बाहर कर दिया जाएगा. बाकी पर सख्त कार्रवाई अपनाते हुए ध्वस्तीकरण किया जाएगा.
हेरिटेज निगम ने चिह्नित किए जर्जर भवन
- जयपुर क्षेत्र में कुल 126 जर्जर भवन
- हवामहल आमेर जोन में 29 भवन
- किशनपोल जोन में 65 भवन
- आदर्श नगर जोन में 18 भवन
- सिविल लाइन जोन में 14 भवन
परकोटे के कई भवनों की कई साल से संभाल नहीं की गई. इन इमारत और हवेलियों की साज-संवार नहीं होने के चलते ये पूरी तरह से जर्जर हो चुकी हैं. आलम ये है कि किसी भी समय ये इमारतें गिर सकती हैं. अभी मानसून का सीजन है. राजधानी में बारिश का दौर लगातार बना हुआ है. ऐसे में ये इमारतें स्थानीय लोगों की लिए खतरा बनी है. हालांकि जिन इमारतों में मरम्मत कार्य शुरू हुआ है, वहां जिओ टैगिंग, फोटो और वीडियो भी जोन उपायुक्त के निर्देशन में उपलब्ध कराई जा रही है.
वक्त रहते कार्रवाई की दरकार: कुछ ही दिन पहले झालावाड़ में एक सरकारी स्कूल की छत गिरने से सात मासूम बच्चों की जान चली गई थी. कुछ अभी भी अस्पतालों में इलाज ले रहे हैं. ऐसे में सोचिए, अगर जयपुर के परकोटे में मौजूद ये सैकड़ों जर्जर इमारतें अचानक धराशायी हो जाएं, तो हालात कितने भयावह हो सकते हैं. ऐसे में वक्त रहते कार्रवाई जरूरी है.




















