उदयपुर: दक्षिणी राजस्थान के सबसे बड़े अस्पताल महाराणा भूपाल (एमबी) अस्पताल में इन दिनों एक स्लोगन खासा ध्यान आकर्षित कर रहा है, “अंगदान है सेवा का काम, देता है जीवन को नया मुकाम”. इस स्लोगन के जरिए अंगदान के महत्व को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. हर साल 3 अगस्त को ‘राष्ट्रीय अंगदान दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य आमजन में अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाना है.
इस मौके पर उदयपुर के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. तरुण रलोत से बातचीत कर जाना कि आखिर अंगदान क्यों महादान है. इस दौरान उन्होंने न केवल अंगदान की जरूरत बताई, बल्कि यह भी बताया कि राजस्थान और खासकर उदयपुर इस मामले में कितने पीछे हैं.
राजस्थान में अंगदान की स्थिति और चुनौतियां: डॉ. तरुण रलोत के अनुसार, राजस्थान में अंगदान की स्थिति चिंताजनक है. पूरे देश में अगर देखा जाए तो राजस्थान तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों के बाद कहीं आता है. वहीं, उदयपुर की बात करें तो यहां अब तक केवल दो ही मामले सामने आए हैं. एमबी अस्पताल में एक और एक प्राइवेट अस्पताल में अंगदान हुआ है. इसके पीछे मुख्य वजह है जागरूकता की कमी और भ्रांतियां.
डॉ. रलोत ने बताया कि आज भी कई लोगों को लगता है कि अंगदान करने से पुनर्जन्म में शरीर अधूरा मिलेगा. कुछ लोग तो पोस्टमार्टम से भी डरते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि मृत्यु के बाद शरीर को जलाया या दफनाया जाता है, जिससे सभी अंग नष्ट हो जाते हैं, लेकिन अगर यही अंग किसी जरूरतमंद को दान किए जाएं, तो कई लोगों की जिदगियों में रोशनी लाई जा सकती है.
एक व्यक्ति से 8 जिंदगियां: डॉ. रलोत ने बताया कि मरणोपरांत अंगदान करने से एक व्यक्ति आठ लोगों की जान बचा सकता है. जैसे कि अगर किसी अंधे व्यक्ति को नेत्रदान के जरिए आंख मिल जाए, तो उसके जीवन में नया उजाला आ सकता है. लीवर, किडनी, दिल, फेफड़े, आंखें ये सभी अंग मृत शरीर से लिए जा सकते हैं और जीवित व्यक्ति के जीवन को नया आधार दे सकते हैं.
अंगदान से बदली कई जिंदगियां: हाल के तीन उदाहरण
1. गुड़गांव से जयपुर तक दिल की उड़ान: गुड़गांव निवासी 25 वर्षीय भूपेंद्र सड़क हादसे में घायल हो गए थे और बाद में ब्रेन डेड घोषित कर दिए गए. उनके परिजनों ने अंगदान की स्वीकृति दी. उनका दिल एयर एंबुलेंस से जयपुर लाया गया और ग्रीन कॉरिडोर के जरिए ईएचसीसी अस्पताल पहुंचाया गया. वहां 38 वर्षीय महिला का सफल हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया. यह राजस्थान का 10वां हार्ट ट्रांसप्लांट था और पहली बार किसी महिला में पुरुष का दिल ट्रांसप्लांट किया गया. भूपेंद्र के अंगों से 5 लोगों को नया जीवन मिला. यह केस अंगदान के असर का जीता-जागता उदाहरण है.
2. तीन लोगों को नया जीवन: जयपुर स्थित एसएमएस अस्पताल में कैडेवर ट्रांसप्लांट के जरिए तीन मरीजों को नया जीवन मिला. गुजरात निवासी तेजस उपेंद्र दुर्घटना के बाद ब्रेन डेड हो गए थे. निजी अस्पताल में भर्ती तेजस के परिजनों को सोटो (SOTTO) टीम ने काउंसिलिंग के बाद अंगदान के लिए सहमत किया. इसके बाद उनका लिवर एसएमएस अस्पताल में एक 44 वर्षीया महिला को ट्रांसप्लांट किया गया. दोनों किडनी भी ट्रांसप्लांट की गईं, एक एसएमएस में और दूसरी उसी निजी अस्पताल में. यह केस राज्य में कैडेवर ट्रांसप्लांट की प्रभावशीलता को दर्शाता है.
3. पहली बार सफल अंगदान: उदयपुर के महाराणा भूपाल अस्पताल में दक्षिणी राजस्थान का पहला सफल अंगदान केस सामने आया. मध्यप्रदेश के नीमच निवासी 56 वर्षीय माणिकलाल का इलाज पिछले 15 दिनों से एमबी अस्पताल में चल रहा था. ब्रेन डेड घोषित होने के बाद डॉक्टर्स की काउंसलिंग से परिजन अंगदान के लिए तैयार हुए. इसके बाद जयपुर, चंडीगढ़ और हैदराबाद से विशेषज्ञ बुलाए गए और दोनों किडनी और लीवर निकाल कर ट्रांसप्लांट के लिए भेजे गए. सभी अंग जरूरतमंदों को ट्रांसप्लांट कर दिए गए. इस प्रक्रिया के बाद मृतक की देह को पूरे सम्मान के साथ विदा किया गया.
डॉ. तरुण रलोत ने कहा कि भारत में अंगदान को लेकर अभी लंबा रास्ता तय करना है. भ्रांतियों, डर और जानकारी की कमी के चलते लोग आगे नहीं आते, लेकिन जैसे-जैसे जागरूकता बढ़ेगी, वैसे-वैसे लोगों की सोच भी बदलेगी. डॉक्टरों की कोशिशें और इन सफल मामलों की प्रेरणा से उम्मीद की जा सकती है कि अंगदान को लेकर समाज में नई सोच विकसित होगी. इस 3 अगस्त अंगदान दिवस पर जरूरत है कि हम सब यह प्रण लें कि मरणोपरांत भी जीवन देना है, अंगदान करके अमर बनना है.




















