जैसलमेर: राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके जैसलमेर में इन दिनों मच्छरों का जबरदस्त प्रकोप है. मलेरिया के मामलों में यह सीमांत जिला पूरे राज्य में शीर्ष पर पहुंच चुका है. अब तक जिले में मलेरिया के कुल 115 मरीज सामने आ चुके हैं. यह किसी एक जिले के लिहाज से राजस्थान में सर्वाधिक हैं. यही कारण है कि जैसलमेर को अब राज्य का ‘मलेरिया हॉटस्पॉट’ माना जा रहा है. चिंताजनक यह है कि जैसलमेर लंबे समय से मलेरिया एंडेमिक जोन में रहा है. यहां की भौगोलिक स्थिति, नहरी क्षेत्रों में जलभराव, सीमावर्ती इलाकों में अस्थाई बस्तियां और दूर-दराज के मुरब्बों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में कठिनाई जैसे कारणों के चलते मलेरिया आसानी से पैर पसार रहा है. ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों में टांकों, कुओं व नालियों में गंदा पानी जमा होने से मच्छरों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे मलेरिया के केस तेजी से फैल रहे हैं.
अब तक मलेरिया के 115 मामले आए: डिप्टी सीएमएचओ डॉ. मुरलीधर सोनी ने माना कि जिले में इस वर्ष अब तक मलेरिया के 115 मामले आ चुके हैं. यह राजस्थान में किसी भी जिले में सर्वाधिक केस हैं. विभाग मलेरिया नियंतत्रण को लेकर पूरी तरह सक्रिय है. हर माह विशेष अभियान चलाकर मलेरिया निरोधी उपायों के बारे में जन जागरूकता पैदा की जा रही है.
राज्य में जब अन्य जिलों की तुलना में जैसलमेर में मलेरिया के इतने ज्यादा मरीज सामने आए तो अब जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में आया है. विभागीय स्तर पर मलेरिया और मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए व्यापक अभियान शुरू किए गए हैं. स्वास्थ्य विभाग ने मलेरिया की पहचान के लिए अप्रैल से अब तक 50 हजार से अधिक रक्त जांच पट्टिकाएं एकत्र की हैं. ग्रामीण इलाकों में डोर टू डोर सर्वे किया गया, ताकि लक्षणों के आधार पर प्राथमिक स्तर पर ही रोग की पहचान की जा सके. इसके लिए एएनएम और आशा सहयोगिनियों की टीमें लगातार फील्ड में सक्रिय हैं.
ऐप के माध्यम से सर्वे: मामले की गंभीरता को देखते हुए डिजिटल निगरानी प्रणाली को भी एक्टिव किया गया है. ‘मरुधरा ऐप’ के माध्यम से घर-घर सर्वे कर रिपोर्टिंग की जा रही है. हर मरीज के संपर्क में आने वालों की 15 दिन की स्वास्थ्य ट्रैकिंग की जा रही है. मलेरिया का असर अब केवल ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं है. शहर के विभिन्न वार्डों में भी लार्वा और मच्छरों की शिकायतें सामने आने लगी हैं.
केमिकल छिड़काव शुरू: नगर निकायों की मदद से वार्डवार सर्वे शुरू कर दिया गया है. टेमिफोस व एमएलओ केमिकल का छिड़काव कर मच्छरों के लार्वा को नष्ट किया जा रहा है. जिले में मच्छरों के नियंत्रण के लिए छह प्रमुख हैचरियों की मरम्मत कर उन्हें पुनः सक्रिय किया गया है. सभी चिकित्सा संस्थानों में मलेरिया की जांच व इलाज के लिए आवश्यक दवाइयां व सामग्री पहले से स्टॉक कर ली गई हैं. साथ ही, मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए समर्पित स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की सेवाएं अनुबंध के आधार पर ली जा रही हैं.




















