जोधपुर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के निर्णय ने जोधपुर सहित पूरे भारत के हैंडीक्राट उद्योग को हिला दिया है. इस निर्णय से लंबे समय से मंदी की मार झेल रहे हैंडीक्राफ्ट कारोबार के लिए नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. ऐसे में अगर डोनाल्ड ट्रंप ने 10% अलग जुर्माना लगा दिया तो स्थिति बहुत विकट हो जाएगी. इससे जोधपुर से अमरीका को होने वाले करीब 2500 करोड़ के हैंडीक्राट निर्यात को बड़ा झटका लग सकता है. अमेरिका के ग्राहक भारत की बजाय मैक्सिको, तुर्की की ओर रुख कर सकते हैं, जहां केवल 10 प्रतिशत ही टैरिफ है.
इसके अलावा चीन से भी मुकाबला करना मुश्किल होगा, क्योंकि वहां सरकारी सहायता मिलती, जिससे भारतीय उत्पाद को कड़ी चुनौती मिलेगी. जोधपुर के एक्सपोर्टर भी इसे बड़ा झटका मानते हैं. उनका कहना है कि शुरुआत में यह काफी नुकसानदेह हो सकता है, लेकिन धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगा. इसके अलावा एक्सपोर्टर नए विकल्प भी तलाशेंगे. एक्सपोर्टर अशोक चौहान ने बताया कि हमें नए रास्ते भी मिलेंगे. भारत सरकार की ब्रिटेन के साथ हुई डील का हमें फायदा मिलेगा. इसके अलावा सरकार यूरोपीय देशों में भी और डील का प्रयास कर रही है. उससे उम्मीदें हैं. अमेरिकी बाजार से पहले भी निर्यातकों को नुकसान हुआ है. ऐसे में नए विकल्प भी तलाशे जाएंगे.
यह होगा टैरिफ का असर : भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में 25 प्रतिशत महंगे हो जाएंगे, जिससे प्रतिस्पर्धा में भारी गिरावट आएगी. अमेरिकी आयातक सस्ते विकल्पों की ओर जा सकते हैं. जैसे वियतनाम, बांग्लादेश, तुर्की की तरफ. निर्यात में 60 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आने की आशंका है, जिससे हजारों यूनिट्स बंद होने के कगार पर पहुंच सकती हैं.
चुनौतियां विकराल होंगी : जोधपुर हैंडीक्राट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. भरत दिनेश ने बताया कि भारत के हैंडीक्राट क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एक विशेष दर्जा मिला हुआ है. यह टैरिफ निर्णय हमारे हजारों कारीगरों और छोटे उद्योगों के लिए विनाशकारी सिद्ध होगा. हम भारत सरकार से आग्रह करते हैं कि वे इस मुद्दे को शीर्ष प्राथमिकता दें और अमेरिकी प्रशासन के साथ उच्च स्तरीय वार्ता शुरू करे.
चीन से मुकाबले के लिए सरकार सहायता करे : भारत में हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स को कुछ समय पहले तक सरकार एक्सपोर्ट करने पर कई तरह की छूट और इंसेंटिव दिया करती थी, लेकिन विगत समय में यह धीरे-धीरे पूरी तरह से बंद हो चुका है. अब चीन पर अमेरिका ने 34 प्रतिशत टैरिफ लगाया है जो भारत के टैरिफ के काफी नजदीक है. निर्यातकों का कहना है कि चीन से मुकाबले के लिए भारत सरकार पुरानी योजनाएं शुरू कर वापस इंसेंटिव दे तो ही बाजार में मुकाबला हो सकता है.
सरकार को निर्यातकों के लिए इंसेंटिव शुरू करना चाहिए : अमेरिका के टैरिफ निर्णय के कारण भारत व जोधपुर को बड़ी चुनौती मिली है. लाखों परिवारों की आजीविका को खतरा है. अमेरिका के साथ राजनयिक स्तर पर वार्ता कर हस्तशिल्प उत्पादों को टैरिफ से छूट दिलाई जाए. सरकार हैंडीक्राट निर्यातकों को इंसेंटिव योजनाओ में राहत दे. वरिष्ठ निर्यातक निर्मल भंडारी का कहना है कि इससे छोटे एक्सपोर्टर काफी हद तक प्रभावित होंगे. सरकार को तुरंत एक राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए, जिसमें निर्यात पर सब्सिडी, ब्याज राहत और मार्केटिंग सहायता शामिल हो, ताकि निर्यातकों को इस संकट से उबारा जा सके.
रोजगार पर संकट के बादल, सरकार दे राहत : निर्यातक अनिल टाटिया का कहना है कि जोधपुर से अमरीका को लगभग 2500 करोड़ मूल्य के लकड़ी, लोहा और चमड़े से बने हस्तशिल्प उत्पाद निर्यात किए जाते हैं. अमेरिका जोधपुर के लिए सबसे बड़ा बाजार है और करीब 1 लाख से अधिक कारीगरों व श्रमिकों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है. ऐसे में अगर यह बाजार प्रभावित होता है तो सीधे-सीधे रोजगार क्षेत्र भी प्रवाहित होगा. हां, भारत सरकार को जो उनके हाथ में रहता है, वह जल्द देनी चाहिए. एक बार अगर इस काम की लेबर यहां से निकल गई तो वापस इसे पटरी पर लाना आसान नहीं होगा.
इन देशों से प्रतिस्पर्धा :
- यूके पर 10 टैरिफ अमरीका ने लगाया है.
- वियतनाम पर 20 प्रतिशत.
- इंडानेशिया पर 19 प्रतिशत.
- चीन पर 30 प्रतिशत.
- फिलिपींस पर 19 प्रतिशत.
- जापान पर 15 प्रतिशत.




















