जैसलमेर: भारतीय सेना की सप्तशक्ति कमान के अंतर्गत चेतक कोर ने बुधवार को राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में एक उन्नत ‘क्षमता संवर्धन प्रदर्शन’ का आयोजन किया. इस आयोजन में भविष्य के युद्ध परिदृश्यों के लिए सेना की तकनीकी और सामरिक तैयारियों को प्रदर्शित किया गया. सेना ने विभिन्न प्रकार के ड्रोन युद्धक कौशल का प्रदर्शन किया, जिसमें निगरानी, सशस्त्र हमले और कामिकेज ड्रोन शामिल थे. चेतक कोर की इकाइयों ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए स्वदेशी ड्रोन तकनीक की क्षमताओं का प्रदर्शन किया. प्रदर्शनी में ड्रोन-रोधी अभियानों के तहत नवीन तकनीकों का सफल परीक्षण किया गया. इन अभियानों को इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के जटिल वातावरण में संचालित किया गया, जिससे भारतीय सेना की वायु संचालन क्षमता की उच्च दक्षता उजागर हुई.
सेना कमांडर ने की सराहना: सप्तशक्ति कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने इस आयोजन का अवलोकन किया और फोर्मेशनों द्वारा विकसित तकनीकी क्षमताओं की सराहना की. उन्होंने कहा कि यह प्रगति भविष्य के युद्धक्षेत्र में निर्णायक बढ़त प्रदान करेगी.
उन्होंने कहा कि ड्रोन तकनीक और नवाचार आधुनिक युद्ध की प्रकृति को बदल रहे हैं. भारतीय सेना को इन चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा. तकनीकी प्रभुत्व आज के वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में महत्वपूर्ण है, इसलिए हमें अपनी क्षमताओं को लगातार उन्नत करना होगा. उन्होंने सभी सैनिकों को उनके समर्पण के लिए प्रशंसा की और परिचालन दक्षता के उच्च मानकों को बनाए रखने का आग्रह किया.
आत्मनिर्भरता से मिलेगी रणनीतिक बढ़त: इस प्रदर्शन में दिखाया गया कि भारतीय सेना स्वदेशी तकनीकों के माध्यम से किसी भी युद्ध परिस्थिति में सामरिक श्रेष्ठता हासिल कर सकती है. ड्रोन युद्धक क्षमताओं में आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा लाभ बताया गया. यह आयोजन सप्तशक्ति कमान की ‘चेतक कोर’ की ओर से किया गया. चेतक कोर की यह पहल न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती प्रदान करती है, बल्कि भविष्य की सैन्य रणनीतियों के लिए भी मार्ग प्रशस्त करती है.




















