जयपुर: राजस्थान में मानसून की जबरदस्त सक्रियता के चलते प्रदेश में भारी बारिश का दौर जारी है. मौसम विभाग ने आगामी दो दिनों फिर से भारी बारिश की चेतावनी जारी की. 30 और 31 जुलाई को भरतपुर, जयपुर और अजमेर संभाग के 18 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की आशंका जताई गई है. राजधानी जयपुर में मंगलवार देर रात से बरसात का दौर रुक-रुक कर जारी रहा, जो बुधवार सुबह 8 बजे बाद तेज हो गया और लोगों को दफ्तर जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा. इस दौरान निचले इलाकों में जलभराव भी सामने आया. भारी बारिश को देखते हुए प्रदेश के 15 जिलों में आज स्कूल बंद है.
92% अधिक बारिश, कई जिलों में हालात बिगड़े: राजस्थान में इस साल अब तक सामान्य से 92 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है. राज्य में अब तक कुल 384.7 मिमी बारिश दर्ज की गई है. बीते 24 घंटे में बारां, भरतपुर, अलवर, सवाई माधोपुर समेत कई जिलों में 1 से 3 इंच तक बरसात दर्ज की गई. सवाई माधोपुर में बाढ़ जैसे हालात हैं. कई इलाकों में घरों में 5 फीट तक पानी भर गया.
अगले दो दिन भारी: मौसम विभाग ने 30 जुलाई को झालावाड़, कोटा, चित्तौड़गढ़, बूंदी, बारां, प्रतापगढ़ और भीलवाड़ा में अति भारी बारिश की चेतावनी देते रेड अलर्ट जारी किया गया है. वहीं, जयपुर, अलवर, करौली, भरतपुर और उदयपुर में भारी बारिश की संभावना जताते येलो अलर्ट दिया है. 31 जुलाई को अजमेर और टोंक में ऑरेंज अलर्ट रहेगा, जबकि भीलवाड़ा, बूंदी, जयपुर, सवाई माधोपुर, सीकर, बीकानेर, चूरू, नागौर, पाली और श्रीगंगानगर में येलो अलर्ट जारी किया गया है.
स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद: बारिश की गंभीरता को देखते हुए कई जिलों में स्कूल बंद करने के आदेश दिए गए हैं. सवाई माधोपुर, अजमेर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर और राजसमंद में 30 और 31 जुलाई को स्कूलों में अवकाश रहेगा. टोंक, झालावाड़ और बारां में 2 अगस्त तक स्कूल बंद रहेंगे. अलवर, खैरथल और भीलवाड़ा में 30 जुलाई तक स्कूलों में छुट्टी बढ़ाई गई है. कोटा, टोंक, बारां और उदयपुर में आंगनबाड़ी केंद्र भी बंद कर दिए गए.
चंबल नदी उफान पर, 38 गांवों में बाढ़ का खतरा: बारिश और बांधों से पानी की निकासी के कारण चंबल नदी का जलस्तर 139 मीटर तक पहुंच गया है, जो खतरे के निशान 8.21 मीटर से ऊपर है. चंबल नदी का खतरे का निशान 130.79 मीटर है. चंबल नदी में 10,43,163 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. मंडरायल-करणपुर इलाके के कई गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है. सड़क संपर्क टूट चुका है. धौलपुर और सवाई माधोपुर के 38 गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है.
बांधों से हो रही पानी की निकासी: बीसलपुर बांध में पानी की आवक कम होने पर अब सिर्फ तीन गेट (गेट 9, 10, 11) खुले हैं. इनसे 18,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है. इससे टोंक जिले में जलभराव की स्थिति बन गई है. सवाई माधोपुर में चंबल, नवनेरा और पार्वती बैराज से पानी छोड़े जाने से जलस्तर तेजी से बढ़ा है. करौली के पांचना डैम से 2,700 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है. कोटा के नवनेरा बैराज से 3.5 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से चंबल, पार्वती और कालीसिंध नदियों में उफान आया है. झालावाड़ के भीमसागर और कालीसिंध डैम से भी पानी छोड़ा गया है.
भीलवाड़ा में टूटे पुल के विरोध में अनूठा प्रदर्शन: भीलवाड़ा जिले के काछोला क्षेत्र में बारिश से पुल टूट गया. ग्रामीणों ने अनूठे तरीके से विरोध जताया व पुल के पुनर्निर्माण की मांग की. जिले के मांडलगढ़ क्षेत्र में मंगलवार तक बारिश का दौर चला. इससे आम जनजीवन प्रभावित रहा. काछोला थाना क्षेत्र के कटारिया खेड़ा, उमेदपुरा और खजुरिया के बीच का पुल कुछ महीने पहले बना था, जो हालिया बरसात में टूट गया. इसके जरिए काछोला से खेड़ा के बच्चे-बच्ची उम्मेदपुरा स्कूल आते हैं. बारिश के बाद विधार्थियों व आमजन का आना-जाना बंद हो जाता है. बरसात से पुल टूटने के बाद लोगों ने मेवाड़ में प्रसिद्ध गायन अलगोजा वादन कर विरोध जताया. विधायक गोपाल खंडेलवाल ने कहा कि बारिश में पुल व सड़कें टूटने की जानकारी मिली. अधिकारियों को क्षेत्र की टूटी सड़कें व पुल दुरुस्त के निर्देश दिए.
झालावाड़ : जायजा लेने ट्रैक्टर से जलमग्न इलाकों में पहुंचे कलेक्टर व एसपी: उधर, झालावाड़ जिले में तीन दिन से लगातार बारिश ने जनजीवन खासा प्रभावित किया. निचले इलाकों में पानी भर गया. प्रशासन मदद पहुंचा रहा है. बारिश से नुकसान और हालात का जायजा लेने जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ व एसपी अमित कुमार ट्रैक्टर के जरिए जलमग्न इलाकों में पहुंचे. कलेक्टर व एसपी का ट्रैक्टर पर सवार होने का वीडियो वायरल हो रहा है. मध्यप्रदेश में ज्यादा वर्षा से रेवा नदी उफन गई व नया पीपलिया क्षेत्र की बंजारा व मेघवाल बस्ती जलमग्न हो गई. वहां किसी साधन से पहुंचना आसान नहीं था. ऐसे में कलेक्टर राठौड़ तथा एसपी कुमार ट्रैक्टर से पहुंचे. राठौड़ ने मौके पर मौजूद उपखंड अधिकारी श्रद्धा गोमे को दिशानिर्देश दिए. सिविल डिफेन्स एवं अन्य ग्रामीणों की सहायता से निचले इलाकों से लोगों को रेस्क्यू कर हरिपुरा के हनुमानजी मंदिर में सुरक्षित ठहराया. प्रशासन ने पीड़ितों के खाने-पीने व ठहरने की व्यवस्था की. कलेक्टर ने नुकसान का शीघ्र सर्वे करवा सरकार से सहायता दिलाने का आश्वासन दिया. कलेक्टर ने लोगों से पुलिया, रपट व तेज बहाव से दूर रहने की अपील की. उन्होंने कहा कि आपात स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ की दो कंपनियां मौजूद है. खतरे वाली जगह थाना प्रभारी, तहसीलदार तथा पटवारी को अलर्ट किया. जर्जर भवन व इमारतों को लेकर नगर परिषद तथा ग्राम पंचायत ने मुनादी करा दी है.
टोंक में कलेक्टर ने लिया जायजा: इस बीच, टोंक जिले में मेहरबान मानसून ने नगर परिषद की बरसाती नालों को लेकर तैयारी की पोल खोल दी. जिले में इस सत्र में लगभग 730 एमएम बरसात हो चुकी. बुधवार को जिला मुख्यालय पर बिगड़ते हालात का जायजा लेने खुद कलेक्टर कल्पना अग्रवाल शहर की कॉलोनियों व बाजारों में पंहुचीं, जहां लोगों के घरों में पानी भरा देखा. जिला मुख्यालय पर मंगलवार रात से जारी तेज बरसात से गली, मोहल्लों ओर कॉलोनियों में जलभराव हो गया. बीते 12 घंटे में टोंक में लगभग 90 एमएम बरसात हुई. हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, कैलाशपुरी,पीली तलाई,चतरा खटीक का नाला,कचहरी दरवाजा,मोदी की चौकी आदि में जलभराव से लोग परेशान हैं. काली पल्टन इलाके में घरों व दुकानों में पानी घुस गया. जलमग्न बस्तियों का जायजा लेने पहुंची कलेक्टर ने कहा कि मैं भी देखना चाहती हूं कि जलभराव का क्या कारण है. बरसात के पहले नालों की सफाई की गई या नहीं. कलेक्टर ने नगर परिषद से तुरंत पंप लगा बस्तियों से पानी निकालने के निर्देश दिए.उसके बाद निवाई दौरे पर निकल गईं.




















