सवाईमाधोपुर: जिले के शिवाड़ स्थित घुश्मेश्वर महादेव मंदिर में इन दिनों सावन माह के चलते श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. देशभर से भक्त दर्शनों के लिए आ रहे हैं. मंदिर में एक माह तक श्रावण महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. महोत्सव के दौरान आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में भक्त शिव आराधना करते हैं और अपने परिवार की कुशलता की कामना करते हैं.
मंदिर का रोचक इतिहास: मंदिर के पुजारी के अनुसार घुश्मेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास अत्यंत रोचक है. प्राचीन काल में देवगिरी पर्वत के निकट सुधर्मा नामक ब्राह्मण रहते थे, जिनकी पत्नी सुदेहा संतान सुख से वंचित थी. इस कारण सुदेहा ने अपनी छोटी बहन घुश्मा का विवाह अपने पति से करवा दिया. घुश्मा शिव की परमभक्त थी और कुछ समय बाद उसे पुत्र प्राप्ति हुई, लेकिन सुदेहा ने ईर्ष्यावश घुश्मा के पुत्र की हत्या कर दी. जब घुश्मा को इसका पता चला, तो उसने शिव की तपस्या की. शिव ने प्रसन्न होकर घुश्मा को वरदान दिया कि वह उसके नाम से इस स्थान पर ‘घुश्मेश्वर’ के रूप में विराजमान होंगे.
900 वर्ष पुराना मंदिर: घुश्मेश्वर मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रेम प्रकाश शर्मा ने बताया कि यह मंदिर लगभग 900 वर्ष पुराना है. उन्होंने कहा कि शिवलिंग को पाताल से जुड़ा हुआ माना जाता है और वेदों-उपनिषदों में भी इसका वर्णन मिलता है. महर्षि वेदव्यास ने भी इस मंदिर का उल्लेख किया है.
सरकार ने धार्मिक पर्यटन में किया शामिल: राजस्थान सरकार ने इस मंदिर को प्रदेश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल किया है. ट्रस्ट अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी. श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां सच्चे मन से आने वाले भक्तों की भोलेनाथ हर मनोकामना पूरी करते हैं, इसलिए श्रावण मास में यहां भक्तों का तांता लगा रहता है.




















