जोधपुर: झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद जारी एडवाजरी ने जोधपुर के सरकारी स्कूलों की पोल खोलनी शुरू कर दी. सरकार चेती तो विभाग भी अलर्ट नजर आया. शहर में लंबे समय से चल रहे छह स्कूलों को जर्जर माना व कक्षाएं रोकते हुए अगले आदेशों तक छुट्टी कर दी. इनको दूसरी स्कूलों में शामिल किया जा सकता हैं. खास बात है कि बरसों से जर्जर भवनों में चलती स्कूलें पहले किसी को नजर नहीं आई. इन स्कूलों के अध्यापकों ने उच्च अधिकारियों व स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी जर्जर भवनों के बारे में कई बार आगाह किया लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया.
सिटी सीबीईओ रजनी शेखावत ने बताया कि छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए छह स्कूलों में छुट्टियों का आदेश दिया है. शिक्षा विभाग ने जोधपुर के 6 स्कूलों के भवन बारिश में ढहने की आशंका जताई. विभाग ने आदेश में कहा कि वर्तमान परिस्थिति एवं मानसून को दृष्टिगत रखते जर्जर स्कूलों में कक्षाओं का संचालन नहीं किया जा सकता. इनके आसपास सुरक्षित स्कूल उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में इनमें वैकल्पिक व्यवस्था होने तक विद्यार्थियों का अवकाश घोषित किया जाता है.
आठवीं से 12वीं तक की पढाई प्रभावित: आदेश में जिन स्कूलों में छुट्टियां की है, वे उच्च प्राथमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय हैं. इनमें सैकड़ों बच्चे पढ़ते हैं. महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय विनायकिया, राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय बम्बा, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय खेतानाडी, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय ह्यूसुन मंडी, महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय सर्राफा बाजार व बंशीधर पुरोहित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय विद्याशाला में शिक्षा विभाग के आदेश के बाद अवकाश रखा गया है. इन स्कूलों के स्टाफ को विद्यालय समय में अनिवार्य रूप से आना होगा.
350 बालिकाएं हैं बंबा स्कूल में: बंबा मोहल्ले में बरकत साहब की हवेली पर चलने वाली बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में 350 बालिकाएं हैं. पुरानी इमारत में जगह जगह दरारें हैं. यहां के अध्यापकों ने कहा, बारिश में कमरों में रिसाव होता है. खतरा बना हुआ है. ऐसी स्थिति में बच्चों को सुरक्षित कमरों में एक साथ रखना पड़ता है. प्रिंसिपल ने बताया कि सीबीईओ के आदेश पर छुट्टी की है. संभवतया स्कूल की जगह बदली जाएगी. स्थानीय नागरिक दशरथ प्रजापत ने कहा कि भीतरी शहर की स्कूलों की स्थिति सुधारना जरूरी है. जर्जर इमारतों के साथ यहां शौचालय भी बदहाल है.
विधायकों से कहा, पर नहीं बदले हालात: भीतरी शहर स्थित ह्यूसन मंडी के उच्च माध्यमिक बालिका विद्यालय में करीब 500 बालिकाएं हैं. पुरानी इमारत के हालात और ज्यादा खराब हैं. बरसों से मरम्मत नहीं हुई. अध्यापक कमरों की बजाय हॉल में बैठकर काम करते हैं. यहां व्याख्याता तारा वर्मा ने बताया कि हमने पहले विधायक रहीं मनीषा पंवार को भी पत्र लिखे थे. वर्तमान विधायक को भी पत्र लिखा है. विभाग को अवगत कराया लेकिन जर्जर इमारत का समाधान नहीं हुआ. अब छुट्टियां करनी पड़ी है.
सिरोही में जर्जर स्कूल भवन को लेकर ग्रामीणों का प्रदर्शन: उधर, सिरोही में आबूरोड अम्बाजी रोड स्थित सुरपगला में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की जर्जर इमारत को लेकर ग्रामीणों ने रोष जताया व प्रदर्शन किया. लोगों ने कहा कि विद्यालय भवन 30-40 वर्ष पुराना है. केवल 6 कक्ष हैं. इनमें एक की 5 पट्टियां तीन साल पहले टूट चुकी है, जो कभी गिर सकती है. एक कक्ष की आरसीसी छत से प्लास्टर गिरता है. एक कक्ष की छत व दीवारों से पानी रिसता है. इनमें छात्रों को बिठाना संभव नहीं है. शेष तीन कक्ष भी क्षतिग्रस्त हैं. ऐसे में वर्तमान परिसर में विद्यालय संचालन संभव नहीं है.नवीन भूमि आवंटन के लिए 5 वर्ष पहले फाइल जिला कार्यालय को भेजी, लेकिन दो बार फाइल निरस्त की जा चुकी. भूमि आवंटन के अभाव में नए भवन का निर्माण संभव नहीं है. प्रदर्शन की सूचना पर तहसीलदार मंगलाराम मीणा व शिक्षा विभाग के सतीश पुरोहित मौके पर पहुंचे. मीणा ने लोगों से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पंचायत सभा भवन और हनुमान मंदिर के टीन शेड में स्कूल संचालन व जल्द नए भवन के प्रयास करने का आश्वासन दिया. इस पर ग्रामीणों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया.




















