जोधपुर: अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ डील अभी अधर में अटकी हुई है. इसका 1 अगस्त तक फाइनल होना संभव नहीं लग रहा है. इस बीच अमेरिका द्वारा भारत को 10 प्रतिशत टैरिफ डील के साथ 90 दिन की जो छूट दी गई थी, वह भी समाप्त हो गई है. इसके चलते अब नए टैरिफ तय नहीं होने से निर्यातक असमंजस की स्थिति में हैं. उनका मानना है कि इस असमंजस की स्थिति में व्यापार करना आसान नहीं है. यही वजह है कि कई एक्सपोर्टर और बायर ने ऑर्डर होल्ड पर डाल दिया है.
दोनों देशों के बीच टैरिफ डील जल्द फाइनल हो जाती है तो एक्सपोर्ट में तेजी आएगी. जोधपुर के एक्सपोर्टर और लघु उद्योग भारती के महानगर अध्यक्ष पंकज भंडारी का कहना है कि अभी स्थिति असमंजस की है. टैरिफ कितना लगता है, यह आने वाले समय में पता चलेगा, लेकिन इतना तय है कि अमेरिका भारत को लेकर इतना सख्त नहीं रहेगा. टैरिफ अगर 18 से 20 फीसदी होता है तो भी दीर्घकाल में यह फायदेमंद ही होगा.
टैरिफ फाइनल नहीं होने तक रहेगी असमंजस की स्थिति : जोधपुर का हैंडीक्राफ्ट और फर्नीचर उद्योग देश-विदेश में अपनी कलात्मक पहचान के लिए जाना जाता है. अभी यह टैरिफ वॉर के बीच जूझ रहा है. वर्तमान में जोधपुर से लगभग 2500 करोड़ रुपए का निर्यात केवल अमेरिका को होता है, जो इस क्षेत्र का 40 प्रतिशत से अधिक है. अमेरिका ने पहले रेसिप्रोकल टैरिफ (प्रतिस्पर्धात्मक शुल्क) नीति के तहत अमेरिका ने भारत पर 26 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की घोषणा कर दी थी, लेकिन इसके बाद 90 दिन की छूट के साथ 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया गया था.
इसमें निर्यातकों ने कई ऑर्डर की डिलीवरी की थी. यह समय सीमा 9 जुलाई को खत्म हो गई. अब नए ऑर्डर फिलहाल होल्ड पर रखे गए हैं. दोनों देशों को 1 अगस्त तक डील फाइनल करनी है, जिसकी संभावना कम लग रही है. ऐसे में हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स ऊहापोह की स्थिती में हैं, क्योंकि 9 जुलाई तक 10 प्रतिशत टैरिफ की छूट समाप्त हो गई. नई दर तय नहीं है. ऐसे में अगस्त में अगर टैरिफ बढ़ा तो भी नुकसान होगा और घट गया तो भी नुकसान तय है. इसलिए असमंजस बना हुआ है. सामने सीजन भी है. क्रिसमस के ऑर्डर लगने हैं. ऐसे में सभी स्थिति साफ चाहते हैं.
चीन से टैरिफ कम रहेगा तो फायदा : हैंडीक्राफ्ट और फर्नीचर सेक्टर में भारत का मुख्य प्रतिस्पर्धी देश चीन है. चीन की उत्पादन लागत कम है और वह पहले से ही अमेरिका में बड़ा सप्लायर बना हुआ है. अमेरिका ने पहले चीन पर 145 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा की थी, लेकिन बाद में 90 दिन के लिए 30 प्रतिशत कर दिया. अभी डील फाइनल होनी बाकी है.
चीन को इसमें ज्यादा ढील मिलती है या भारत के बराबर भी होती है तो भारतीय व्यापारियों के लिए हर क्षेत्र में चुनौती बढ़ जाएगी. इससे रोजगार, उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की हिस्सेदारी पर भी असर पड़ सकता है. निर्यातकों का मानना है कि चीन और भारत पर अभी टैरिफ डील नहीं हुई है. चीन हमारा सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी है. यदि वहां के टैक्स और हमारे यहां में फर्क रहता है तो हमारी उम्मीद बढ़ेगी.
यूरोपीय बाजार भी कमजोर : अमेरिका के बाद सर्वाधिक हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट यूरोपीय देशों को होता है, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से लगातार यूरोपीय देशों की आर्थिक स्थिति सही नहीं रहने से बाजार कमजोर है. भंडारी ने बताया कि वहां बहुत ज्यादा सुधार नहीं हुआ है. इसलिए यूरोप से ज्यादा हैंडीक्राफ्ट व्यापार की उम्मीद नहीं है. माना जा रहा है कि सर्वाधिक निर्यात अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित होगा. चाहे वह कम समय के लिए हो, लेकिन स्थिति साफ होने से काम में तेजी आएगी.
तैयार माल भी अटका, एक्सपोर्टर परेशान : एक्सपोर्टर अनिल टाटिया ने बताया कि अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ डील घोषित नहीं होने से हर तरफ अनिश्चितता है. अब 30 जुलाई के बाद 26 प्रतिशत टैरिफ हो सकता है. ऐसे में जो कंटेनर रास्ते में हैं और वो 30 के बाद पहुंचे तो उनका टैरिफ 26 हो जाएगा. वह अगर बायर ने नहीं लिया तो क्या होगा ? यह अनिश्चितता बहुत परेशान कर रही है. यही कारण है कि बड़ी मात्रा में तैयार माल डिस्पैच में पड़ा है. कंटेनर नहीं जा रहे हैं. माल ड्राइपोर्ट पर अटक रहा है. वापस लाने पर दोहरी मार पड़ेगी. यह बहुत असमंजस की स्थिति है. टाटिया ने बताया कि यह बहुत बड़ा सेक्टर है. इसमें काम रुकना आसान नहीं है. सैंकडों की संख्या में लेबर एक-एक यूनिट में होते हैं. काम रोक दो और वे चले गए तो ऑर्डर मिलने पर लेबर नहीं मिलते हैं. हमारे पर अगर 26 प्रतिशत टैरिफ लगता है, अन्य देश भी इसी कैटेगरी में आते हैं तो भी हमारा काम प्रभावित होगा. इसलिए अभी एक्सपोर्टर काफी परेशान हैं.
यूके के साथ डील से राहत : भारत की ब्रिटेन के साथ हुई डील को एक्सपोर्टर फायदेमंद मान रहे हैं. हालांकि, जोधपुर से यूरोपियन देशों को एक्सपोर्ट अमेरिका के मुकाबले कम होता है, लेकिन ब्रिटेन के साथ हुई ट्रेड डील से भारत को फायदा होगा. हैंडीक्राफ्ट के साथ-साथ टेक्सटाइल को भी फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि बांग्लादेश में सत्ता की उठापटक से वहां का टेक्सटाइल्स कारोबार काफी प्रभावित हुआ है. इससे भारत के बाजार में ऑर्डर लौटे हैं. फ्री ट्रेड डील से इसको फायदा होगा. टेक्साटाइल्स इंडस्ट्रीज से जुड़े राकेश चौरड़िया ने बताया कि हर भारत सरकार बांग्लादेश की तर्ज पर यहां भी इस उद्योग पर ध्यान दे तो इसका एक्सपोर्ट बढ़ सकता है.
चीन से दोहरा मुकाबला : चीन हैंडीक्राफ्ट मैन्युफैक्चरिंग में काफी आगे है. वहां उत्पाद कम लागत पर तैयार होता है. साथ में कच्चा माल बहुतायत उपलब्ध होता है. इससे वह अंतराष्ट्रीय बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा देता है. भारतीय माल अपनी गुणवत्ता के आधार पर बिकता है, लेकिन चीनी कंपनियों के शिपिंग लाइन पर बड़ा आधिपत्य है, जो कंटेनर की उपलब्धता व भाड़ा तय करते हैं. जिस पर उनकी मनमर्जी होती है. इसका कई बार भारतीय एक्सपोर्ट को नुकसान उठाना पड़ता है.




















