अजमेर : विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह में ऐतिहासिक इमारतों और जर्जर भवनों को लेकर दरगाह कमेटी और खुद्दामें ख्वाजा समाज के लोग आमने-सामने हो गए हैं. दरगाह कमेटी मैनजमेंट की शिकायत पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्री किरण रिजिजू तक पहुंचने के बाद दरगाह नाजिम मोहम्मद बिलाल खान ने एक नोटिस जारी किया, जिसको लेकर अजमेर से दिल्ली और सियासी गलियारे से धार्मिक स्थलों के धर्म गुरुओं में बड़ी बहस छिड़ गई है.
ऐसे में अब अजमेर दरगाह मामला 3 सांसदों ने संसद में उठाने की भी बात की है. फिलहाल, दरगाह परिसर में नाजिम की ओर से चस्पा कराए गए नोटिस से खुद्दामें ख्वाजा समाज में बेहद गुस्सा और नाराजगी देखी जा रही है. नाजिम दफ्तर की ओर से चेतावनी दी गई है कि दरगाह परिसर में जर्जर भवनों को खाली कर दिया जाए, अन्यथा कमेटी किसी भी प्रकार की कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करेगी.
नोटिस में क्या लिखा है : सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि तेज वर्षा के कारण दरगाह शरीफ की कुछ पुरानी और जर्जर भवनों में संरचनात्मक क्षति की संभावना बनी हुई है. सुरक्षा दृष्टि से इन इमारतों का प्रयोग न करें और वहां रखे सभी सामान (चाहे अतिक्रमण हों या स्वीकृत) तुरंत हटा लें. यदि किसी प्रकार की दुर्घटना या अनहोनी होती है तो उसके लिए व्यक्ति खुद पूरी तरह उत्तरदायी रहेगा और कार्यालय नाजिम प्रशासन किसी भी प्रकार की कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करेगा. इस नोटिस ने देशभर के मुस्लिम संगठनों और धार्मिक संस्थाओं में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है.
मैं यह मुद्दा संसद में उठाऊंगा और मोदी सरकार की अजमेर दरगाह को लेकर लापरवाही को उजागर करूंगा
यह शर्मनाक है. दरगाह प्रशासन खुद को जिम्मेदारी से अलग नहीं कर सकता.
यह जानबूझकर श्रद्धालुओं को दरगाह आने से रोकने की कोशिश है. अगर समिति दरगाह व्यवस्थाएं नहीं संभाल सकती तो जिम्मेदारी पेशेवरों को सौंपी जाए.
वहीं, दूसरी तरफ दरगाह कमेटी में ही कभी उपाध्यक्ष रहे दरगाह के खादिम सैय्यद बारी चिश्ती का भी कहना है कि नाजिम कार्यालय को अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए, बल्कि दरगाह विकास पर ध्यान देना अति महत्वपूर्ण है. इस तरह से नोटिस चस्पा करना ठीक नहीं. दरगाह में बॉलीवुड दुआगो व सखी खिदमत फाउंडेशन के अध्यक्ष सैयद कुतुबुद्दीन सखी ने भी दरगाह कमेटी स्टाफ की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि दरगाह नाजिम मोहम्मद बिलाल खान को चाहिए कि दरगाह में जर्जर इमारतों और भवनों का जायजा लेकर उसे मरम्मत कराने या उसकी इजाजत देकर खुद्दामें ख्वाजा ही नहीं, बल्कि जायरीन श्रद्धालुओं को भी राहत देनी चाहिए.
दरगाह परिसर में चस्पा जिस नोटिस को लेकर विवाद किया जा रहा है वो नहीं होना चाहिए. ऐसे नोटिस इससे पहले भी बरसात के मौसम में दिए और लगाए जा चुके हैं. हमने ये नोटिस आमजन में सतर्कता व जागरूकता लाने के लिए लगाए थे. किसी को बेदखल करने और अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने के लिए नहीं. नाजिम कार्यालय का हर शख्स जनसेवा के लिए दिलों जान से लगा हुआ है. दरगाह और जायरीन की सुरक्षा के लिए सब से तालमेल मिला कर जनहित के कार्य अंजाम देते रहेंगे.
दरगाह, कमेटी की ओर से परिसर में चस्पा किए गए नोटिस से देशभर में बहस शुरू हो गई है. ऑल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुस्लिमीन चेयरमेन असदउद्दीन ओवैसी, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जनरल सेकेट्री मोहम्मद रशीद मुजद्दीदी, मुस्लिम प्रोग्रेसिव फेडरेशन के संयोजक अब्दुल सलाम जौहर समेत देश के कई बड़े नेताओं, समाज सेवियों व धार्मिक संगठनों ने भी आवाज उठाना शुरू कर दिया है.




















