जोधपुर: करगिल विजय दिवस के मौके पर शनिवार को शहर की 8 किमी में फैली पहाड़ियों पर भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध का जीवंत प्रदर्शन किया गया. इस मौके पर बंदूकें चलाई गई, लेकिन इनमें गोलियां नहीं थी. इनकी जगह 2 हजार ‘बीज बॉल’ थी. ये ‘बीज बॉल’ जहां-जहां गिरेंगी, आने वाले समय में वहां हरियाली फैलाएंगी. इस आयोजन में करीब 800 युवाओं ने भाग लिया. इसमें एनसीसी कैडेट्स, बीएसएफ जवान, नागरिक सुरक्षा बल, स्काउट्स और एनआइएफ के सदस्य और सेना के जवान शामिल थे.
यह अनूठा आयोजन क्रीड़ा भारती संस्था की ओर से किया गया था. संस्था के प्रांत सचिव ओमप्रकाश पुरोहित ने बताया कि जोधपुर की पहाड़ियों को करगिल युद्ध की प्रमुख चोटियों जैसे टाइगर हिल, तोलोलिंग, चोरबाटला, जुबेर हिल आदि के नाम दिए गए. भारतीय सेना के रूप में 12 टुकड़ियां तैयार की गई. हर टुकड़ी में भारतीय सेना जैसी वर्दी पहने 60-60 लोगों की टीम थी, जो दुश्मनों पर गोलियां और बम बरसाते हुए दिए गए लक्ष्य को पूरा करते हुए टाइगर हिल की ओर बढ़ी.
पुरोहित ने बताया कि प्रत्येक टुकड़ी को अलग-अलग चोटी फतह करने का लक्ष्य दिया गया था. साथ ही हर टुकड़ी के साथ सहयोग के लिए सेना के जवान भी मौजूद थे. इस आयोजन के लिए युवाओं और जवानों को बीएसएफ द्वारा युद्ध की विशेष ट्रेनिंग दी गई थी.
पहाड़ियों में फैलेगी हरियाली: क्रीड़ा भारती के महानगर अध्यक्ष वरुण धनाड़िया ने बताया कि दुश्मनों पर गोलियों की जगह 2,000 से अधिक ‘बीज बॉल’ दागी गई, जो आने वाले समय में हरियाली में बदल जाएंगी. समापन समारोह रावटी में हुआ. इसमें मुख्य अतिथि बीएसएफ के महानिदेशक एम.एल. गर्ग थे. इस मौके पर उन्होंने कहा कि करगिल युद्ध हमारे शौर्य का प्रतीक है. जवानों ने अपनी जान देकर देश की सीमाओं की रक्षा की थी.
गौरव सैनिकों और शहीद परिवारों का हुआ सम्मान: इस मौके पर क्रीड़ा भारती द्वारा गुरु सैनानियों (वरिष्ठ सैनिकों) और शहीद परिवारों का सम्मान भी किया गया. इस अवसर पर राज्य मंत्री के.के. विश्नोई, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक निंबाराम सहित अन्य लोग उपस्थित थे.




















