अलवर : आज कारगिल विजय दिवस पर जानिए राजस्थान के वीर सपूतों की कहानी, जिन्होंने वीरता, बलिदान और देशभक्ति की मिसाल पेश की और मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए.
झुंझुनू से 18 वीर सपूत हुए थे शहीद : कारगिल युद्ध में राजस्थान की मरूधरा के 60 रणबांकुरों व इस युद्ध में अपने प्राणों की आहुति दी, जिनमें से 18 वीर सपूत तो केवल झुंझुनू जिले से थे. इन्हीं में एक नाम है सीथल गांव के शहीद हवलदार मनीराम महला का, जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे. मनीराम महला 4 सितंबर 1981 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे और 523 इंटेलिजेंस यूनिट में सेवारत थे. 3 जुलाई 1999 को दुश्मनों से लोहा लेते हुए वो शहीद हुए.
बहरोड के राठ के लाल हो गए थे शहीद : देश की रक्षा करते अपने प्राण न्योछावर करने वाले नायक सतवीर सिंह और सिपाही नरेन्द्र यादव को देश आज भी नमन करता है. शहीद नायक सतवीर सिंह बहरोड के बसई भोपाल के रहने वाले थे, जो 24 दिसम्बर 1979 में आर्मी में भर्ती हुए थे. कारगिल युद्ध के दौरान जम्मू कश्मीर के द्रास सेक्टर के 2 राजपुताना राइफल्स में तैनात थे. कारगिल युद्ध के दौरान 28 जून 1999 में देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए थे. वहीं, शहीद नरेद्र कुमार 1994 में सेना में भर्ती हुए थे. नरेंद्र 13 कुमाऊं रेजिमेंट सब सेक्टर हनीफ जम्मू कश्मीर में तैनात थे. कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मनों से लोहा लेते हुए कई गोली सीने में लगी थी, जिसके बाद वो शहीद हो गए थे.
डीडवाना के पूर्व सैनिकों ने सुनाया किस्सा : पूर्व सैनिक बालूराम ने बताया कि वो फौजी जाट रेजीमेंट का हिस्सा थे. 121 ब्रिगेड कारगिल का एक हिस्सा थे. उनकी यूनिट को बटालियन के नाम से जाना जाता था. पाकिस्तान की तरफ से खूब गोलाबारी हो रही थी. उस समय कई साथियों को गोलियां लगी. बटालियन के हेड को भी गोली लगी. हम पत्थरों के नीचे से आगे बढ़ते रहे दुश्मनों से लोहा लेते हुए हमने अंत में फतह हासिल की. इसी तरह पूर्व कैप्टन ओमप्रकाश ने बताया कि उनकी बटालियन के पांच जवान शहीद हो गए थे. हमने बहुत ही बहादुरी से लड़ाई लड़ी और पाकिस्तान को धूल चटाई.
विजय दिवस के 26 साल पूरे होने के मौके पर डीडवाना के जिला सैनिक कल्याण कार्यालय के शहीद स्मारक परिसर में आयोजित समारोह में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई. जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल राजेंद्र सिंह ने कहा कि कारगिल विजय दिवस पर आज हम उन शहीदों को नमन कर रहे हैं, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान की कुर्बानी दी है. पूर्व सैन्य अधिकारी मेजर दीप सिंह ने कहा कि युद्ध हमारी प्राथमिकता में कभी नहीं रहा, लेकिन युद्ध से मुंह मोड़ लेना भी हमारी फितरत में नहीं है.
श्रीगंगानगर में तिरंगा यात्रा : कारगिल विजय दिवस के अवसर पर शनिवार को सीमाजन कल्याण समिति की ओर से अनूपगढ़ में भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया. यह यात्रा नगर पालिका के पास स्थित शिव मंदिर से आरंभ हुई और शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई एडीएम कार्यालय तक पहुंची, जहां इसका उत्सवपूर्वक समापन हुआ. यात्रा के दौरान अनूपगढ़ देशभक्ति के रंग में सराबोर हो गया और हर ओर भारत माता की जय के नारों की गूंज सुनाई दी. कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई.




















