झालावाड़. शुक्रवार को झालावाड़ में हुए दर्दनाक हादसे में सात मासूम बच्चों ने अपनी जिंदगी गंवा दी, जबकि तेरह बच्चे अभी मौत से लड़ रहे हैं. इस पूरे वाकये के बाद अब उन लोगों की बात सामने आ रही है, जो हादसे के पहले और बाद में सब कुछ अपनी आंखों से देख रहे थे.
इस हादसे की गवाह रही एक छात्रा ने बताया कि वह बाहर सफाई कर रही थी, जबकि बाकी छात्राएं कक्षा के भीतर बैठी थीं. तभी अचानक छत से पत्थर गिरने लगे. छात्राओं ने तुरंत शिक्षक को अलर्ट किया, लेकिन उन्होंने सभी को बैठा रहने को कहा और खुद बाहर आ गईं. उस वक्त सीनियर छात्राएं भी बाहर थीं. अचानक तेज आवाज के साथ छत भरभराकर गिर गई और कई छात्राएं मलबे में दब गईं. वहां चीख-पुकार मच गई. सभी इधर-उधर भागने लगे. घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और फंसी हुई छात्राओं को बचाने में जुट गए.
वसुंधरा राजे ने जताया शोक: पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे ने उस स्कूल हादसे में मारे गए बच्चों के परिजनों से मुलाकात की, जहां कल प्राइमरी स्कूल की छत गिरने से सात मासूम बच्चों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे. इस मौके पर वसुंधरा राजे ने कहा, “इस दुःख की घड़ी में सभी एकजुट हैं.” वसुंधरा राजे ने कहा कि मुख्यमंत्री की तरफ से कल की गई कुछ घोषणाएं हैं, जिन पर हम फॉलोअप करेंगे. शिक्षा, राशन जैसी समस्याओं का समाधान करेंगे. गांव की स्थिति कैसे सुधरे, इस पर समीक्षा बैठक भी की जाएगी.
सचिन पायलट का सरकार पर हमला: राजस्थान के झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने से सात बच्चों की मौत पर कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने राज्य सरकार पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह से सरकार की आपराधिक लापरवाही है और इसकी जांच होनी चाहिए. शिक्षा मंत्री कह रहे हैं कि पिछली कांग्रेस सरकार ने कुछ नहीं किया, लेकिन आप दो साल से सत्ता में हैं, आपके पास सारे संसाधन हैं, फिर भी समय पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. अब जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और जो भी दोषी हो, उसे तत्काल इस्तीफा देना चाहिए. साथ ही, राज्यभर में मानसून के बाद जिन स्कूल भवनों की स्थिति खराब हो गई है, उनका ऑडिट कराना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके.”
कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ का बयान: झालावाड़ कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने बताया कि कल सुबह करीब 7:45 से 8 बजे के बीच सूचना मिली कि स्कूल के एक कक्षा-कक्ष की छत गिर गई है और बच्चे मलबे में दब गए हैं. बच्चों को तुरंत रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया. इस दर्दनाक हादसे में 7 बच्चों की मौत हुई, जबकि 20 घायल बच्चों का इलाज चल रहा है और वे जल्द स्वस्थ होकर डिस्चार्ज किए जाएंगे.
उन्होंने बताया कि प्राथमिक जांच शुरू कर दी गई है और अब तक पांच लोगों को सस्पेंड किया जा चुका है. कलेक्टर ने बताया कि शिक्षकों को पहले से निर्देश दिए गए थे कि यदि किसी भी इमारत को लेकर खतरा लगे, तो उस दिन अवकाश घोषित कर इसकी सूचना दें, लेकिन कल की घटना के बाद भी शिक्षकों ने कहा कि ऐसी कोई स्थिति नहीं थी. उनका कहना है कि बारिश का पानी छत पर जमा हो जाने से हादसा हुआ.
कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने कहा कि पूरा प्रशासन गांव के लोगों का आभारी है, जिन्होंने राहत और बचाव कार्य में भरपूर सहयोग किया. मृतकों के परिजनों की दो ही प्रमुख मांगें थीं, एक कि ऐसा हादसा दोबारा न हो और दूसरी, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. उन्होंने कहा कि जहां कहीं भी सुरक्षा में चूक या लापरवाही पाई जाएगी, कार्रवाई की जाएगी.
कलेक्टर ने बताया कि 20 जून को ही आदेश जारी किए गए थे कि किसी भी जर्जर भवन में बच्चों को नहीं बैठाया जाएगा. जहां-जहां से रिपोर्ट मिली, वहां से 12 जर्जर भवनों को खाली करवाया गया, लेकिन इस स्कूल को लेकर कोई जानकारी हमें नहीं दी गई थी.




















