झालावाड़ : मनोहरथाना कस्बे के पीपलोदी गांव में शुक्रवार को स्कूल हादसे में जान गंवाने वाले सभी बच्चों का शनिवार को अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान गांव में चारों ओर सन्नाटा पसरा रहा. मृतकों के घरों से महिलाओं की चीख-पुकार सुनाई दे रही है. पूरा इलाका गम में डूबा हुआ है. सभी मृतक बच्चों का पोस्टमार्टम किए जाने के बाद शनिवार सुबह करीब 5 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच सभी बच्चों के शवों को गांव के लिए रवाना किया गया. जैसे ही बच्चों के शव गांव पहुंचे, पूरे गांव में हाहाकार मच गया.
स्कूल हादसे के बाद पीपलोदी गांव में पूरी तरह से शांति है. जिला अस्पताल से पोस्टमार्टम के बाद सभी बच्चों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया है. गांव में सभी बच्चों का अंतिम संस्कार किया गया. स्कूल हादसे में 7 बच्चों की जान गई है, जिसमें 3 बालिकाएं और 4 बालक हैं. जान गंवाने वालों में पायल, प्रियंका, हरीश, सतीश, कान्हा, कुंदन और मीना हैं. इनमें कान्हा और मीना सगे भाई-बहन थे. बच्चों की उम्र 8-13 वर्ष के बीच है. इसके अलावा हादसे में घायल करीब 20 बच्चों का इलाज जारी है.
हादसे के बाद से ही पीपलोद गांव में मातम का माहौल है. पीपलोद के मासूमों को झालावाड़ में जारी हल्की बरसात के बीच अंतिम विदाई दी गई. मृतकों में से 6 बच्चे पीपलोद गांव के निवासी थे, जबकि एक बच्चा दूसरे गांव का था. झालावाड़ एएसपी चिरंजीलाल मीणा और एसडीएम अकलेरा विकास कुमार ने शवों को परिजनों के सुपुर्द करने की प्रक्रिया पूरी की.
सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान हुआ हादसा : शुक्रवार की सुबह अन्य दिनों की तरह बच्चों ने स्कूल में प्रार्थना सभा के लिए एकत्र होना शुरू किया था. इसी दौरान सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय पीपलोद की इमारत का एक हिस्सा ढह गया. एक प्रत्यक्षदर्शी ने इस पूरे घटनाक्रम को बयां किया. स्कूल की यह 35 साल पुरानी इमारत वर्ष 1994 में ग्राम पंचायत की ओर से बनाई गई थी, जिसमें चार कक्षाएं थीं. इन्हीं में से एक कक्षा अचानक भरभरा कर गिर गई, जिसमें बच्चे दब गए. ब्लॉक मनोहरथाना के सभी सरकारी स्कूलों में आज घटना के बाद अवकाश घोषित किया गया है. स्कूल भवन हादसे के बाद जिला कलेक्टर अजय सिंह ने इसके निर्देश दिए. शनिवार को घटना स्थल से आई तस्वीरों में टूटी हुई दीवारें और बिखरे बस्ते इस हादसे की भयावहता को बयां कर रहे हैं.
इसी स्कूल में पढ़ने वाली एक बच्ची के चाचा कालू लाल ने बताया कि बच्चों ने कंकड़ पत्थर छत से गिरने की शिकायत भी अध्यापकों से की थी, लेकिन उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया था. और बच्चों को कमरों में दाखिल होने के लिए आदेश दिया, इसी दौरान हादसा हो गया. स्थानी निवासी लोकेश का आरोप है कि हर बार 15 अगस्त और 26 जनवरी के कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधि यहां आते हैं, जिन्हें जर्जर स्कूल भवन को लेकर शिकायत की जाती है, लेकिन हर बार ग्रामीणों की इस अपील को दरकिनार कर दिया जाता है.
शिक्षकों पर कार्रवाई, उच्च स्तरीय जांच के आदेश : हादसे के बाद स्कूल के पांच शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया है. राजस्थान सरकार ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. राज्य के शिक्षा मंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का दौरा करने की घोषणा की है. प्रशासन का कहना है कि यह इमारत पुरानी और कमजोर हो चुकी थी, जिसकी मरम्मत की आवश्यकता थी.
स्थानीय प्रशासन अब जिले के अन्य स्कूलों की इमारतों की स्थिति की समीक्षा करने में जुट गया है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुखद घटनाओं को रोका जा सके. इस घटना के बाद शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने मृतकों के परिजनों के लिए 10 लाख रुपए की आर्थिक मदद की घोषणा के साथ ही, नए स्कूल भवन के निर्माण के बाद मृतक बच्चों के नाम से कमरे बनाने की घोषणा की. साथ ही एक-एक परिजन को संविदा पर नौकरी का वादा किया.
मुख्यमंत्री ने भी दी श्रद्धांजलि : झालावाड़ जिले के पीपलोदी गांव में विद्यालय भवन की छत गिरने से हुए हृदयविदारक हादसे में दिवंगत मासूम बच्चों को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में मौन धारण कर, श्रद्धांजलि अर्पित की. बैठक में विभागीय अधिकारियों और वीसी से जुड़े समस्त जिला कलेक्टर्स को सरकारी भवनों, विशेष रूप से स्कूलों, आंगनबाड़ियों, अस्पतालों और अन्य राजकीय भवनों का तत्काल निरीक्षण कर, प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कार्य करवाने के निर्देश दिए. साथ ही, इसकी तत्काल रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भिजवाने के लिए भी अधिकारियों को निर्देशित किया.
लिस पर किया हमला : मनोहरथाना कस्बे के स्कूल हादसे के बाद शुक्रवार को ग्रामीणों ने गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर मुख्य गुराड़ी चौराहे पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया. मौके पर पहुंचे एसपी अमित कुमार और जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने ग्राम वासियों से समझाइश की थी. सभी ग्रामवासी ने वहां से जाम हटा भी लिया, लेकिन आक्रोश इतना था कि पुलिस की गाड़ियों को देख ग्रामीण भड़क गए और पुलिस वाहनों पर जबरदस्त हमला बोल दिया.
गांव के गुराड़ी चौराहे पर कुछ ग्रामीण आक्रोशित हो गए. उन्होंने पुलिस के वाहनों को अपना निशाना बनाया और उनमें तोड़फोड़ की. भीड़ ने पुलिस की गाड़ियों पर पथराव भी किया. जवानों ने वहां से भागकर किसी तरह अपनी जान बचाई. इस हमले में पुलिस का एक जवान नरेंद्र घायल हुआ है, जिसे इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा गया.




















