जयपुर: उदयपुर जिले में 450 ऐसे स्कूल हैं, जहां मरम्मत की आवश्यकता है और इसके लिए बजट मांगा है. इसी तरह बांसवाड़ा में 54 स्कूलों के 164 कमरे और 73 बरामदे जर्जर हालत में हैं. प्रस्ताव भेजने के बाद भी सरकार ने बजट जारी नहीं किया. झालावाड़ के पीपलोदी गांव में हुए हादसे के बाद अब प्रदेश भर के स्कूलों से जर्जर इमारत के वीडियो और रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. इस बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने पूछा कि चीखते तड़पते परिवारों की पुकारों पर सरकार की संवेदना कब टूटेगी? कब तक सिर्फ सिस्टम दोषी बनेगा…सरकार और मंत्री दोषी कब होंगे?
पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ये कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है. ये बीजेपी सरकार के भ्रष्ट तंत्र और शिक्षा विभाग की लापरवाही, गैर जिम्मेदाराना रवैये से सुनियोजित हत्या है. सवाल सिर्फ स्कूल की छत गिरने और सिस्टम के ढहने का नहीं है. झालावाड़ के रोते-बिलखते परिवार और मां के आंसुओं पर जवाबदेही तय करने और नैतिक जिम्मेदारी से इस्तीफा देने का है. सिर्फ यही वो हादसा नहीं है जिसमें मासूमों की जिंदगियां काल के गाल में समा गई. राज्य में अभी भी हजारों स्कूलें जर्जर हैं, जो कभी भी इस तरह के भयावह हादसों को जन्म दे सकती है.
खड़े किए सवाल: डोटासरा ने बच्चों की जिदंगी से खिलवाड़ करने वाले कुछ आंकड़े पेश करते हुए लिखा कि ये आंकड़े बीजेपी सरकार और शिक्षा विभाग की नाकामी पर कड़े सवाल खड़े करते हैं.
- अकेले उदयपुर में 20 ऐसे स्कूल हैं जो कभी भी गिर सकते हैं
- उदयपुर जिले में 450 ऐसी स्कूलें हैं, जहां मरम्मत की आवश्यकता है व इसके लिए बजट मांगा है
- 4 महीने में करीब 700 प्रस्ताव भेजे जाने के बाद भी सरकार ने इन स्कूलों को फंड जारी नहीं किया
- शिक्षा मंत्री के गृह जिले में चलती क्लास के दौरान प्लास्टर गिरने से 5 छात्र घायल हुए थे, इनमें 2 छात्रों को गंभीर चोट आई थी
- स्वयं शिक्षा मंत्री के गृह जिले में कई स्कूलों के भवनों में ‘यहां ख़तरा है’ की पट्टियां लगाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा जा रहा है
- बांसवाड़ा में 54 स्कूलों के 164 कमरे और 73 बरामदे जर्जर हालत में हैं, प्रस्ताव भेजने के पश्चात भी सरकार ने बजट जारी नहीं किया
- जनजाति क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति बदतर है. बांसवाड़ा में 2142 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 657 बिना भवन के हैं, जबकि 1390 केंद्र जर्जर हालत में टपकती छतों के बीच संचालित हो रहे हैं
- कोटा में कई आंगनबाड़ी भवन क्षतिग्रस्त हैं, लेकिन सरकार ने अधिकांश का बजट मंजूर नहीं किया. यहां अधिकतर इमारतें 20 साल पुरानी हैं
- मुख्यमंत्री के गृह जिले भरतपुर में नंदी घरों की छत उद्घाटन से पहले ही टपकने लगी हैं
- चित्तौड़गढ़ में 562 स्कूलों के जर्जर भवन हैं, जो डरावनी स्थिति में है।
अब जनता तय करें: इन आंकड़ों को बताते हुए डोटासरा ने लिखा कि अब राजस्थान की जनता तय करे.. क्यों मंत्री का इस्तीफा नहीं होना चाहिए? वहीं इन आंकड़ों और झालावाड़ हादसे पर शिक्षक संगठनों ने भी खेद जताया. शिक्षक संघ शेखावत के अध्यक्ष महावीर सिहाग ने कहा कि ये घटना पूरे तंत्र का फेलियर है. स्कूलों की हालत को लेकर संस्था प्रधान की ओर से बार-बार अवगत कराया जाता है. इसके बावजूद ऐसी घटना होना और स्कूलों की सुध नहीं लेना चिंता का विषय है. जरूरत है कि इन स्कूलों की जांच तकनीकी कर्मचारियों के माध्यम से कराई जाए क्योंकि एक शिक्षक ये बता सकता है कि छत टपक रही है लेकिन उसके क्या कारण है, वो कितनी जर्जर हो चुकी है, इसका पता तकनीकी कर्मचारी की लगा सकता है. सरकार ने जितना जोर स्कूलों को बंद करने और नई एजुकेशन पॉलिसी लागू करने में लगा रखा है, उतना जोर यदि इस पर लगाते तो इस तरह के हादसे नहीं होते.




















