जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने कैडर पुनर्गठन की मांग को लेकर आंदोलनरत न्यायिक कर्मचारियों की हड़ताल को अवैध माना है. इसके साथ ही अदालत ने कर्मचारियों को कल से काम पर लौटने को कहा है. अदालत ने कहा कि जब वकीलों को हड़ताल का अधिकार नहीं है, तो वेतन भोगी कर्मचारी हड़ताल पर कैसे जा सकते हैं. अदालत ने कहा कि यदि कर्मचारी काम पर नहीं लौटते हैं, तो संबंधित जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियमानुसार कार्रवाई करें. जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश इबरान व अन्य की आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए.
सुनवाई के दौरान रजिस्ट्रार न्यायिक की ओर से अदालत में रिपोर्ट पेश की गई. रिपोर्ट में कहा गया कि कर्मचारी 18 जुलाई से सामूहिक अवकाश पर हैं. इससे अदालतों का कामकाज प्रभावित हो रहा है. हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया है. इस पर अदालत ने कहा कि कर्मचारी यदि काम पर नहीं लौटते हैं, तो सुचारू कार्य संचालन के लिए वैकल्पिक इंतजाम किए जाएं. जिला न्यायाधीश और कलेक्टर समन्वय से वैकल्पिक व्यवस्था के तहत होमगार्ड की नियुक्ति करें और जरूरत पड़ने पर बार एसोसिएशन से भी मदद ली जा सकती है.अदालत ने मामले की सुनवाई 28 जुलाई को तय करते हुए कहा है कि यदि तब तक कर्मचारी काम पर नहीं लौटे, तो रजिस्ट्रार जनरल रेस्मा लागू करें, लेकिन किसी भी सूरत में हड़ताल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अदालत ने कहा कि कर्मचारियों से जुड़ा मामला हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को भिजवा दिया है और यह नीतिगत मामला है. इसमें कोर्ट दखलंदाजी नहीं कर सकती है. गौरतलब है कि गत सुनवाई पर अदालत के सामने आया था कि कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश पर जाने के कारण अदालतों में कामकाज ठप हो गया है. इस पर अदालत ने रजिस्ट्रार न्यायिक से रिपोर्ट तलब की थी.




















