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बीसलपुर बांध : पहली बार जुलाई में छलकने को आतुर, डूब क्षेत्र के लोगों को किया अलर्ट

जयपुर: राजस्थान के प्रमुख जलस्रोतों में शुमार बीसलपुर बांध में जलस्तर रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच चुका है. 21 जुलाई (सोमवार) की सुबह तक इसका जलस्तर 315 आरएल मीटर पार कर गया. इसी के साथ यह संभावना प्रबल हो गई है कि अगले 24 घंटे में बीसलपुर बांध ओवरफ्लो हो सकता है और इसके गेट खोलने की नौबत आ सकती है. बीसलपुर बांध के इतिहास में यह पहली बार होगा, जब जुलाई माह में इसके गेट खोले जाएंगे. रविवार को बांध का जलस्तर 315.02 आरएल मीटर पार कर गया था, जो सोमवार सुबह 315.17 RL मीटर पहुंच गया. फिलहाल बांध के बहाव क्षेत्र में त्रिवेणी की ऊंचाई 3.30 मीटर पर है. अब बांध में 94% से ज्यादा पानी मौजूद है.

त्रिवेणी नदी का जलस्तर 3.3 मीटर के ऊपर: एक्सईएन मनीष बंसल ने बताया कि बीसलपुर बांध में पानी पहुंचाने का मुख्य स्रोत त्रिवेणी नदी फिलहाल 3.30 मीटर की ऊंचाई पर बह रही है. शनिवार देर रात से पानी की आवक का सिलसिला रविवार शाम तक तेज रहा, फिर सोमवार सुबह भी धीमी गति के साथ लगातार बांध में पानी की आवक बनी हुई है. यह बांध टोंक जिले में बाणगंगा नदी की सहायक नदी बनास पर बना है. इससे जयपुर, अजमेर, टोंक और दौसा जैसे शहरों को पेयजल उपलब्ध कराया जाता है. साथ ही टोंक जिले के हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई भी इससे होती है. बीसलपुर बांध का कैचमेंट एरिया 6 जिलों में है. इनमें भीलवाड़ा का 51 प्रतिशत, चित्तौड़गढ़ का 17, उदयपुर का 6, अजमेर का 15, टोंक का 2 और प्रतापगढ़ का 1 प्रतिशत क्षेत्र है. चित्तौड़गढ़ में गंभीरी डैम से पानी की निकासी के बाद उसका पानी भी बीसलपुर बांध में आता है. गंभीरी डैम में पानी की आवक मध्यप्रदेश से होती है.

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825 करोड़ की लागत से बना: बीसलपुर बांध का निर्माण वर्ष 1985 में शुरू हुआ, तब शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर और सिंचाई मंत्री परसराम मदेरणा ने किया था. साल 1996 में इसे पूरी तरह से चालू किया. इसका पूर्ण जलग्रहण स्तर 315.5 मीटर है. इसकी क्षमता लगभग 315.5 मीटर तक पानी रखने की है. इसके बाद अतिरिक्त पानी निकालने के लिए गेट खोल दिए जाते हैं. इसके निर्माण पर कुल 825 करोड़ की लागत आई थी.
 
24 घंटे में गेट खुलने की संभावना: अब तक बीसलपुर के गेट सामान्यतः अगस्त या सितंबर में खोले जाते रहे हैं, वह भी बहुत कम बार, लेकिन इस बार जुलाई में ही बांध लगभग छलकने की स्थिति में पहुंच गया. इसका मुख्य कारण है प्रदेश में सामान्य से कई गुना अधिक बारिश का होना. मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी राजस्थान में 1 जून से 20 जुलाई 2025 के बीच बांध पर अब तक करीब 600 एमएम बारिश हो चुकी है, जो सामान्य (200 मिमी) से 130% अधिक है. अकेले टोंक जिले में अब तक 518.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य (176 मिमी) से 195 प्रतिशत अधिक है. इससे बनास नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है और बीसलपुर बांध में तेजी से जल भराव हो रहा है.

 

बीसलपुर बांध के गेट कब-कब खुले: बीसलपुर बांध जुलाई 2025 में पहली बार छलकने की कगार पर है. यह ना सिर्फ जलवायु परिवर्तन और मानसून की तीव्रता का संकेत देता है, बल्कि जल प्रबंधन के लिहाज से भी बड़ी चुनौती और उपलब्धि है. बांध प्रशासन के मुताबिक 1996 के बाद से अब तक बांध 7 बार पूरा भरा है. सबसे पहले 16 अगस्त 2004 को बांध के चार दरवाजे खोलकर पानी की निकासी की गई थी. इसके बाद 19 अगस्त 2006 को बांध में छह दरवाजे खोलकर पानी निकासी की गई. इसी क्रम में 2014 की 13 अगस्त को 2 , 9 अगस्त 2016 को 5 गेट खोले गए. बीसलपुर बांध के 21 साल के इतिहास में सबसे ज्यादा 135 टीएमसी की निकासी 19 अगस्त 2019 को खोले गए बांध के गेटों से की गई. इसी साल एक साथ बांध के सभी 18 गेटों को खोलकर पानी की निकासी की थी. इसके बाद 26 अगस्त 2022 में बांध से छठी बार दो गेट खोलकर पानी की निकासी की गई. फिर पिछले साल 5 सितंबर को बांध के चार गेट खोलकर सातवीं बार पानी निकासी की . इसमें राजस्थान में 2020 में लगे पहले स्काडा सिस्टम (कंप्यूटराइज्ड तरीके से) का प्रयोग किया गया था. इस मानसून सत्र में अच्छी पानी की आवक के बाद प्रशासन भी डूब क्षेत्र के लोगों को अलर्ट कर रहा है कि पानी के भराव वाले स्थानों से दूर रहें.

क्यों खोले जाते हैं गेट: जब बांध के जलस्तर की सीमा पार होने लगती है और वह “फुल टैंक लेवल” पर आ जाता है, तब बांध की सुरक्षा और अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए गेट खोलना आवश्यक होता है. इससे जलाशय में अतिरिक्त दबाव नहीं बनता और डाउनस्ट्रीम इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति से बचाव हो पाता है. बीसलपुर बांध के गेट खुलने का असर त्रिवेणी संगम, बनास और गोमती नदी के तटीय इलाकों पर पड़ता है. ऐसे में प्रशासन पहले से अलर्ट जारी करता है. गेट खोलने से पहले बांध की डाउनस्ट्रीम के 54 गांवों को सायरन बजाकर अलर्ट किया जाएगा. साथ ही बांध के गेट खोलने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. जिला प्रशासन और बांध प्रबंधन ने इस सिलसिले में रविवार देर शाम तैयारी शुरू कर दी. बांध पर लगे चेतावनी सायरन की आवाज नदी क्षेत्र में बांध से दो से तीन किलोमीटर क्षेत्र तक पहुंचती है. गेट खुलने से तीन से चार घंटे पहले बारी बारी से हूटर बजाकर लोगों को सचेत किया जाता है ताकि लोग नदी के बहाव क्षेत्र से दूर रहे. कोई दुर्घटना ना हों. बांध आठवीं बार छलकने को तैयार है.

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